दोस्त की मम्मी ने आखिर मुझसे चूत चुदवा ही ली Dost ki mammy choot

मैं हूँ रोहित और मैं इलाहाबाद से हूँ। मित्रों मेरी उम्र 22 वर्ष है और करीब साढ़े 5 फुट की मेरी हाइट है। मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये 6 माह पहले दिल्ली आया था, और इस समय मैं लक्ष्मी नगर में एक रूम लेकर रह रहा हूँ। आज मैं आप को मेरे साथ घटी एक सच्ची सेक्स घटना सुनाने जा रहा हूँ जो कि मेरे करीबी दोस्त की माँ के साथ हुयी। मेरी कोचिंग क्लासेस मेरे घर से करीब एक किमी की दूरी पर थी। और मेरी कोचिंग स्टडी शुरू हो चुकी थी। मैं अपनी बढ़ाई न करते हुए यह बताना चाहता हूँ कि मैं पढ़ने में काफी अच्छा हू,ँ और इस कारण अपनी क्लास में फेमस हूँ। इस तरह मेरे क्लास में कई दोस्त भी बन गये थे, पर उनमें से मेरा सबसे करीबी दोस्त रवि था। और धीरे धीरे हम दोंनो की दोस्ती बढ़ गई और मजबूत होती गई।

फिर जल्द ही मेरा उसके घर आना जाना शुरू हो गया। और हम दोनों ही अक्सर उसकी बाइक पर साथ में कोचिंग आने जाने लगे। रवि के परिवार में उसकी माँ और पापा थे। उसके पापा रांची में किसी विभाग में सीनियर अफसर थे और छुट्टी न मिलने के कारण कम ही घर आ पाते थे। और उसकी माँ करीब 35 वर्ष की हाउस वाइफ थी। लेकिन पूरी तरह से दिल्ली के परिवेश में ढली होने के कारण उनका यौवन और शरीर की काया किसी भी पच्चीस साल की लड़की को भी मात देने वाली थी। वह बहुत ही मिलनसार और हंसमुख नेचर की थी। जब मैंने उनको पहली बार देखा तो मुझे उन्हें देखकर कतई यह अहसास नहीं हो रहा था कि वह एक जवान लड़के की माँ है। पहले पहल को मैं उनको निहारता ही रह गया और उनके मस्त ट्रिम्ड शेप वाले शरीर और दूध से भी निखरे चेहरे पर मोहित हो गया, लेकिन फिर अपने आप को यह समझाते हुए रोक लिया कि वह मेरे दोस्त की माँ है।

इस तरह मेरा दिल्ली में ज्यादातर समय रवि के घर पर बीतने लगा और मेरी स्टडी उसके साथ आगे बड़ रही थी। मैं जब कभी भी बोर होता तो रवि के घर पर चला जाया करता था और उसकी मम्मी ने भी मुझे उनके यहाँ आने जाने की परमीशन दे दी थी, क्योंकि वे जानती थी कि मैं दिल्ली से नहीं हूं और यहाँ पर अकेले रहता हूँ। स्टडी के बाद हम दोनो ही घंटो बाते करते और कभी कभी उसकी माँ भी हमें ज्वाॅइन कर लेती थी। और इस तरह धीरे धीरे मेरी हिचकिचाहट दूर होने लगी और मैंने भी खूब बातें करनी शुरू कर दी। और हमारे बीच अलग अलग विषयों पर काफी लंबी बातें होने लगी। इसी बीच मैं उन्हें छिपी निगाहों से तड़ने लगा क्योंकि मैं पहले से ही उन पर लट्टू था और छोटी छोटी शरारतें करके उनके पास जाने लगा। अपने उम्र के तजुर्बे के हिसाब से वे यह समझ चुकी थी कि मैं उनकी ओर आकर्षित हूँ और वे कभी मुझे समझाती तो कभी मुस्कुराकर टाल देती थी पर मुझ पर नाराज नहीं होती थी।। इसलिए मैं भी उनके मना करने के बावजूद उनके करीब जाता क्योंकि मुझे उनके अंदर की गर्मी का अहसास होने लगा था जो उनके पति के न होने से बढ़ती जा रही थी, और जब भी रवि घर पर नहीं होता था, मैं उस गर्मी को हवा देकर आग बनाने की कोशिश करता रहता था। कुछ दिनों बाद आंटी ने भी अपनी अदायें बिखेरना शुरू कर दिया जो कि मेरी ओर उनकी सहमति भरा इशारा था।

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