आंटी और उसकी बेटी की चूत

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Aunty or uski beti ki Chut chudai
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Aunty or uski beti ki Chut chudai हेलो फ्रेंड, मेरा नाम राहुल राजपूत एंड मैं २१ साल का हु. मुझे सेक्स की कहनिया पढने का बहुत शौक है और मैं इस वेबसाइट पर बहुत सी कहानिया पढ़ी है और यहीं से कहानिया पढने के बाद मुझे अपनी कहानी यहाँ पर शेयर करने की प्रेरणा मिली. ये कहानी २ साल पहले की है, जब मैं १८ की हुआ था और मुझे मेरे पड़ोस की आंटी ने पहली बार सेक्स करना सिखाया था और मजेदार बाद है, कि मैंने बाद मैं उनकी बेटी को बजाया. तो बात मेरे बर्थडे के बाद वाली सर्दियों की है. मेरे बोर्ड के एग्जाम थे और मैं छत पर धुप में पढाई करता था. मेरे पड़ोस में एक आंटी और उसके दो बच्चे रहते थे. अंकल अक्सर घर से बाहर ही रहते थे. तो वो तीनो अकेले ही रहते थे. आंटी का नाम नीना था और उनकी बेटी काम प्रिया और बेटा पाराश. नीना की उम्र करीब ४० साल की होगी और कमाल की खुबसुरत. उसका फिगर ३६-३२-३६ और दूध की तरह सफ़ेद रंग. उसकी बेटी प्रिया भी बिलकुल उसी की कार्बन कॉपी थी.

प्रिया के बूब्स भी ३४, कमर २८ और गांड ३६ थी. माँ-बेटी खूबसूरती में एक दुसरे को काम्प्लेक्स देते थे. मैं तो उन दोनों पर ही जान छिडकता था. ना- जाने, कितनी ही बार मैंने उन दोनों के ना पर मुठ मारी होगी. प्रिया और मैं दोनों एक ही क्लास में थे, तो हम दोनों का एक दुसरे के घर आना जाना लगा हो रहता था और नीना आंटी भी मुझे पसंद करती थी. मेरा बदन भी कसरती था. जब भी मैं छत पर कसरत करता और नीना छत पर होती, तो मेरे मस्त बदन की काफी तारीफ करती. कभी-कभी तो मुझे लगता, कि वो मुझपर लाइन मारती है. उनके मस्त बातो पर मैं स्माइल कर देता या हंस देता था. मम्मी तो मुझे उनसे बचकर रहने को कहती थी. लेकिन, मैं भी कहता था. क्या मम्मी. वो मेरी माँ की उम्र की है. आप भी ना क्या-क्या सोचती हो? लेकिन, मेरी मम्मी का शक जयाज था. वो मुझे अपनी बाहों में लेकर अपनी तड़प बुझाना चाहती थी. अंकल को आये हुए, शायद काफी समय हो गया था और वो किसी के साथ समभंद नहीं बनाना चाहती थी. उन्हें अपनी बेटी का भी ख्याल रखना था, इसलिए शायद उन्होंने मुझे चुना था.

जब मैं छत पर पढता था, आंटी भी छत पर आ जाती थी वो मेरे सामने कपडे सुखाती थी और उनके चुचे ब्लाउज में से अपना पूरा व्यू दिखाते थे. आंटी का पल्लू सारे समय नीचे की गिरा होता था. एक दिन, घर में कोई नहीं था. शायद उनके घर में भी कोई नहीं था. मैं पढ़ रहा था और वो रोज़ की तरह कपड़े सुखा रही थी. अचानक से उनके पैर में मोच आ गयी और वो नीचे बैठ गयी. उन्होंने मुझे आवाज़ दी और मैं भाग कर उनकी छत पर चले गया. हम दोनों के घरो की छत आपस में जुडी हुई थी. तो मैं उनके पास गया. वो छत पर रखे एक पत्थर पर बैठ गयी थी और उनका पैर सूज गया था. वो चल नहीं पा रही थी. मैंने आसपास देखा और उनको गोद में उठा लिया और नीचे ले गया. उनको उनके बिस्तर पर लिटा दिया और उन्होंने मुझे मूव लाने को कहा. मैं उनके पैरो की मालिश कर रहा था. क्या सॉफ्ट स्किन थी उनकी. मेरे साथ लगाते ही, मेरा लंड एकदम तन्न गया. मैंने पैरो को एकदूसरे से सटा लिया और अपने लंड के उभार को अपने दोनों पैरो के बीच में छिपा लिया.

नीना शायद ये देख चुकी थी और उसने अपनी साडी को ऊपर तक खीच लिया और अब साडी उसकी जांघो पर आ चुकी थी. मैंने मूव को अपने हाथो में लिया और उसकी मालिश कर रहा था और धीरे- धीरे मेरा हाथ ऊपर जाता जा रहा था. धीरे-धीरे उसने अपने आप को बेड से लगा लिया और अपनी आँखे बंद कर ली. मैंने उनको आँखे बंद करे हुए देखा, थोडा मौका का फायदा लेना चाह और अपने हाथ को साडी के अन्दर ले गया और उन्होंने मेरे बालो में अपने हाथ डाल दिए और बोली – राहुल, प्लीज. मेरी चूत को चुओ ना. बहुत प्यासी है ये. कब से ये तुम्हारे होठो का इंतज़ार कर रही है. प्लीज आओ ना. नीना की आँखे अभी भी बंद थी, लेकिन वो बार-बार बडबडा रही थी. मैंने एक ही झटके में अपना लोअर उतार दिया और अपने लंड को बाहर निकाल लिया. मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोले और बिना रुके उनकी चुचियो को उनकी ब्रा से बाहर निकाल लिया और उनकी साडी को ऊपर तक चढ़ा दिया. उन्होंने अन्दर कुछ नहीं पहना हुआ था. जैसे ही, मेरी नज़र उनकी गुलाबी चूत पर पड़ी, मेरे लंड ने फनफना शुरू कर दिया और उन्होंने मेरे लंड को एकदम पकड़कर अपने मुह में ले लिया और उसको चूस कर गीला कर दिया.

उन्होंने मुझे बोला, राहुल अभी तो बस चोद मुझे. बाद में खेल लेना मेरे बदन से. उन्होंने अपने पैरो को खोल लिया और मैं अपने आप को उनके ऊपर गिरा लिया और अपने लंड को उनकी चूत के मुह पर रखा और एक ही जोरदार झटके में अपने लंड को उनकी चूत में उतार दिया. उनकी चूत काफी खुली थी. शायद बहुत चुदवाई थी उन्होंने. मेरा लंड एकदम अन्दर चले गया था और मैं अपनी गांड को हिलाकर उनकी चुदाई कर रहा था. वो चिला रही थी और बोल रही थी, चोद मादरचोद .. चोद मुझे. भोसदा बना दे मेरी चूत का, बहुत दिनों से प्यासी है. अहहहहः अहहहहः म्मम्मम्म.. उनकी ये आवाज़े मेरा जोश बड़ा रही थी और मैं उनके चूचो को दबाते हुए उनकी चुदाई कर रहा था. हमने पता ही नहीं चला, कि कब प्रिया उनके कमरे के बाहर आकर हम दोनों को देख रही थी. वो कॉलेज से आ गयी थी. उसके पास घर की दूसरी चाभी होती है. उस दिन, शायद लाइट नहीं आ रही थी. जिस वजह से घटी नहीं बजी और वो दूसरी चाभी से दरवाजा खोलकर अन्दर आई और हमें देख रही थी. जब हम दोनों ने देखा, तो वो अपनी टीशर्ट उतर चुकी और अपने बूब्स मसल रही थी.

मैंने उसे भी अपने पास बुला लिया और हम तीनो ने अपने- अपने कपडे उतार दिए और पुरे नंगे हो गये और आपस में लिपट गये. वो दोनों मेरे बदन से खेल रहे और नीना मेरे लंड को पकड़कर चूम रही थी और अब उसने मेरे लंड को अपने मुह में ले लिया और चूस रही थी. हम तीनो ने खूब मस्ती की. मैंने उन दोनों माँ- बेटी को खूब बजाया. अब तो हम तीनो मस्त सेक्स करते.

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