तलाक के बाद भी चुदाई – Group chudai story

दोस्तों यह Group chudai story Antarvasna Hindi sex stories 44 साल की तलाक़ शुदा औरत प्रीति सहगल की है उसकी ज़ुबानी:-

में मनाली के एक पेंटहाउस में अपनी बहू कुसुम के साथ 69 की
पोज़िशन में एक दूसरे की चूत चाट रहे हैं. साथ ही साथ हमारी
गांडकी चुदाई भी हो रही है. कुसुम की गांडमेरा बेटा अजय मार
रहा है मेरी गांडमेरे बेटे का खास दोस्त प्रकाश मार रहा है. इसके
पहले की में इसके आयेज कुछ काहु में आप सब को ये बताना चाहती
हूँ की हम यहाँ तक कैसे पहुँचे.

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में एक तलाक़ शुदा औरत हूँ जिसने बड़ी मुश्किल से अपने पति से
अपने जीने का हक़ छीना है. मुझे तलाक़ के बाद एक चार कमरों का
फ्लॅट, एक गाड़ी और अची ख़ासी नकद रकम मिली जो हमारे गुज़रे के
लिए काफ़ी थी.

मेरा बेटा अपनी ग्रॅजुयेशन कर चक्का था और अगले महीने शादी करना
चाहता था. मेरा बेटा अजय 22 साल की उमर और देखने में बहोट ही
सनडर था, 6″ फ्ट की हाइट, भूरी आँखें और उसका बदन देखने
काबिल था. उसका सबसे खास और प्यारा दोस्त प्रकाश की 6.01 फ्ट थी और
बहोट ही ताकतवर था. प्रकाश भी 22 साल का था और उसकी आँखों भी
भूरी थी मेरे बेटे की तरह.

मेरा बेटा अपनी प्रेमिका कुसुम से शादी करना चाहता था, जो मुझे
बिल्कुल भी पसंद नही थी, लेकिन माइयन अपने बेट एके आगे मजबूर थी.
ना जाने क्यों मुझे हमेशा यही लगता था की वो मेरे बेट एके पैसों
के पीछे है.

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वैसे कुसुम देखने माइयन काफ़ी सनडर थी, हिएत् 5.07, पतला बदन,
पतली कमर उसका फिगर 36-24-36 था. उसे मिनी स्कर्ट्स और इस तरह
के कपड़े पहनने का बड़ा शुक था. मेने अक्सर उसकी मिनी स्कर्ट में
से उसकी छूट के बाहर झँकते देखे थे.

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मेरा भी फिगर कुछ कम नही था, 44 साल की उमर में भी मेने
अपने शरीर को संभाल कर रखा था. 35.25.36 मेरा फिगर था. माइयन
रोज़ दो घंटे स्विम्मिंग करती थी जिससे मेरा शरीर शेप में रह
सकूँ.

अजय और कुसुम अगले महीने शादी करना चाहते थे इसलिए हुँने
शॉपिंग भी बहुत कीट ही. वो अपने हनिमून पर मनाली जाना चाहते
थे. एक दिन में शॉपिंग करने के लिए घर से निकली पर मुझे याद
आया की में कुछ समान घर में भूल गयी हूँ.

जैसे ही में घर में दाखिल हुई मुझे अजय और प्रकाश की आवाज़े सुनाई
दी. माइयन एक बेडरूम की और बढ़ी और उनकी आवाज़े सुनने की कोशिश
करने लगी. इतने में मेने प्रकाश की आवाज़ सुनी,

“हन मेरे लंड को इसी तरह चूसो, बड़ा मज़ा आ रहा है.”

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मेरी मस्त चुदाई

मेने कमरे में झाँक कर देखा, प्रकाश बेड के किनारे पर बैठा हुआ
था और मेरा बेटा घुटनो के बाल बैठ कर प्रकाश के लंड को चूस रहा
था. मुझे विश्वास नही हो रहा था की मेरा बेटा जिसकी शादी एक
महीने मे होने वाली थी वो अपने दोस्त का लंड चूस रहा था.

“अजय तुम तो यार कुसुम से भी अछा लंड चूस्टे हो?” प्रकाश ने कहा.

में जो सुन रही थी उसपर मुझे विश्वास नही हो रहा था क्या कुसुम
और अजय दोनो प्रकाश के लंड के चूस्टे थे.

“मेरा पानी छूटने वाला है अजय!” प्रकाश बोला.

“आज तुम तुम्हारा पानी मेरे मूह पेर छोड़ो,” कहकर अजय ने प्रकाश के
लंड को अपने मूह मे से निकल दिया.

में प्रकाश के लंड को देख कर चौंक गयी, मुझे अंदाज़ा तो था की
उसका लंड मोटा और लंबा है लेकिन आज रूबरू देख कर माइयन चौंक
गयी. उसका लंड करीब 10″ इंच लंबा और 4″ इंच मोटा था. अजय भी
उसके लंड को अपने हाथों में नही ले पा रहा था.

अजय उसके लंड को हिला रहा था और साथ ही चूस्टे जर आहा था,
अचानक ही प्रकाश के लंड ने अपना पानी छोड़ दिया. मेने आज तक किसी
को इस तरह पानिन छोड़ते नही देखा था. प्रकाश ने कम से कम 7 बार
पिचकारी छोड़ी होगी. अजय ने उसके लंड को चूस कर एक दम निढाल कर
दिया था.

“आज तक मेने किसी लंड को इतना पानी छोड़ते हुए नही देखा.” अजय
बोला.

“तुम्हे क्या अछा लगता है मेरा पानी छोड़ने का तरीका या तुम्हारे मूह
में झड़ना.” प्रकाश ने पूछा.

“इस सवाल का जवाब देना बहोट कठिन है, जब तुम्हारा लॉडा हवा
में पानी फैंकता है तो भी अक्चा लगता है और जब वो मेरे मूह
में पिचकरी छोड़ता है तो ऐसा लगता है की मेरे गले की सारी
प्यास बुझ गयी है.” अजय ने प्रकाश के लंड को और जोरों से चूस्टे
हुए कहा.

“क्या तुम मेरी गांडमरने को तय्यार हो? मुझे सही में तुम्हारा
लॉडा अपनी गांडमें चाहिए,” मेरे बेटे ने प्रकाश से पूछा

में यही सोच रही थी की मेरा बेटा इतना बद्ड लॉडा अपनी गांडमें
कैसे लगा, वहीं प्रकाश ने क्रीम की शीशी निकल अपने लॉड पर अवाम
मेरे बेटे की गांडपर माल दी.

मेरा बेटा दरवाज़े के हॅंडल को पकड़ झुक गया और प्रकाश ने अपना
खंबे जैसा लॉडा उसकी गांडमें घुसेड दिया.

प्रकाश पहले तो धीरे धीरे गांडमरता रहा फिर जैसे ही उसने रॅफटर
पकड़ी मुझे विश्वास नही हुआ की मेरा बेटा इतना मोटा और लमनबा लंड
झेल सकता है.

प्रकाश पहले तो धीरे धीरे अजय की गांडमार रहा था फिर उसने रॅफटर
पकड़ ली. मुझे विश्वास नही हो रहा था की मेरा बेटा इतना मोटा लंड
अपनी गांडमें झेल लेगा.

“हाआआं ज़ोर सीईई मेरी गाआआंद मरूऊओ, पुर्र्ररा घुसााअ दो”
अजय ज़ोर ज़ोर से प्रकाश से कह रहा था.

“तुम्हारी गांडबहोट अची है. सही में मुझे उतना ही मज़ा आ रहा
जितना मुझे कुसुम की गांडमरने में आता है.” प्रकाश ने अपने
धक्कों की रॅफटर बढ़ते हुए कहा.

“क्या तुम चाहते हो की आज में तुम्हारी गांडका कचूमर बना डू,”
प्रकाश ने तेज़ी से अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए कहा.

“हन आज ज़ोर से मेरी गांडमरो चाहे मेरी गांडफॅट ही क्यों ना
जाए.” मेरा बेटा गिड़गिदते हुए प्रकाश से बोला.

प्रकाश ने अपना लंड तोड़ा सा बाहर खींचा और ज़ोर से अजय की गांद
में पेल दिया.

“हन फाड़ दो मेरी गांडदो, छोड़ दो अपना पानी मेरी गांडमें.”
कहकर अजय अपने लंड पर मूठ मरने लगा.

“तुम्हारी गांडसही में बड़ी जानदार है, मुझे तुम्हारी गांडमरने
में उतना ही मज़ा आ रहा है जितना मुझे कुसुम की गांडमरने में
आता है,” कहकर और ज़ोर से उसने अपना लंड अंदर पेरल दिया.

प्रकाश ने अपनी रॅफटर तेज कर दी, और वो ज़ोर ज़ोर से अपना लंड अजय की
गांडके अंदर बाहर कर रहा था, “ले मेरा पूरा लंड ले ले मेरा
छूटने वाला है.” कहकर प्रकाश ने अपना पानी अजय की गांडमें छोड़
दिया.

प्रकाश रुकने का नाम नही लाए रहा था. उसका लंड अब्भी भी अजय की
गांडके अंदर बाहर हो रहा था, में पहली बार किसी को इतनी ताक़त
से और ज़ोर से छोड़ते देख रही थी.

“आज में तुम्हारी गांडकी धज्जियाँ उड़ा दूँगा,” प्रकाश और तेज़ी से
गांडमरते हुए बोला.

“हाआआं फ़ाआआद दो मेर्रर्र्ररी गाआाअंड को.” अजय उसका साथ देते
हुए बोला.

प्रकाश का लंड तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था. उसके चेहरे के

और ज़ोर ज़ोर से लंड पेल रहा था. दोनो की साँसे फूली हुई थी.
“ये मेरााआ छूटा” कहकर प्रकाश ने वीर्या अजय की गांडमें उंड़ेल
दिया.

“हााआआं मुझे महसूस हो रहााआअ है, छोद्दद्ड दो सारा पानी
मेरी गाआआंद में छोड़ दो.” अजय हानफते हुए बोल रहा था.

इनकी चुदाई देख में डांग रह गयी थी. में सोच रही थी क्या
कुसुम को ये सब मालूम है? कुसुम भी तो प्रकाश से चुड़वति है, तो
ज़रूर मालूम होगा. में चुपचाप अपने कमरे में आ गयी. मेरी छूट
भी इनकी चुदाई देख गीली गो गयी थी. मेरा खुद का मान छुड़वाने को
कर रहा था.

शाम को में शॉपिंग के लिए घर से निकली, मेरे ख़यालों में अभी
भी अजय और प्रकाश का नज़ारा घूम रहा था. मेने सोच लिया था की
में उनपर ज़्यादा नज़र रखूँगी, शायद कुसुम को चुड़ते देखने का
मौका मिल जाए.

दो दिन बाद में कम पर से घर लौटी तो मुझे अजय के कमरे से
आवाज़ें सुनाई दे रही थी. मेने धीरे से खिड़की से झाँका तो देखा
बिस्तर पर प्रकाश, अजय और कुसुम के बीच में बैठा हुआ था. तीनो
नंगे थे और उनके कपड़े कमरे में चारों तरफ बिखरे पड़े थे.
कुसुम घुटनो के बाल होकर प्रकाश का लंड चूस रही थी.

“अब मेरी बरी है.” कहकर अजय ने कुसुम से प्रकाश का लंड लिया और
चूसने लगा.

कुसुम बिस्तर के नीचे उतार अजय के लंड को अपने मूह में ले चूसने
लगाई.

में असचर्या चकित थी की मेरा बेटा और उसकी होने वाली बीवी दोनो
ही लॉडा चूस रहे थे.

अजय और कुसुम दोनो लंड को तब तक चूस्टे रहे जब तक प्रकाश और
अजय के लंड पानी नही छोड़ दिया. प्रकाश ने अपने वीर्या से अजय का मूह
भर दिया और अजय ने अपने वीर्या की पिचकारी कुसुम के मूह म्ेईः छोड़
दी.

प्रकाश ने फिर कुसुम को बिस्तर के किनारे पर बिता उसकी टाँगे फैला
दी. उसने दोनो टाँगे को और फैला अपना जीव कुसुम की छूट पर रख
उसे चाटने लगा. प्रकाश अब ज़ोर ज़ोर से उसकी छूट को चूस रहा था, वो
अपनी जीव उसकी छूट के अंदर दल छोड़ रहा था. थोड़ी देर में ही
कुसुम के मूह से मादक सिसकारियाँ फुट रही थी.

“हाआआं चााआआतो और्र्र्ररर ज़ोर से चूवसो हाआआऐं यहीयईिन.”
कुसुम का शरीर अकड़ने लगा, वो अपनी गर्दन उन्माद में इधर उधर

लगता था की प्रकाश इस खेल का पुराना खिलाड़ी था उसे आचसी तरह
मालूम था उसे क्या करना है, वो ज़ोर से अपनी जीव रस्मी की छूट में
घुसा अपने होठों से पूरी छूट को मूह में ले लेता. वो ज़ोर ज़ोर से
तब तक कुसुम की छूट छत रहा था जब तक कुसुम की छूट नही
छोड़ दिया और वो तक कर उसे रुकने को कहने लगी,

“प्लीज़ रुक जाओ बसस्स्स्सस्स और नही में और सहन नही कर सकती.”

में अगले चार घंटे तक इस चुदाई का नज़ारा देखती रही. चारों
आसान बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे, जैसे पूरी कामसुत्रा का
अनुभव करना चाहते हो. में खुद गिनती भूल गयी की कायं कितनी बार
झाड़ा.

थोड़ी देर सुसताने के बाद प्रकाश का लंड फिर टन कर खड़ा हो गया
था, कुसुम भी उसका लंड अपनी छूट में लेना चाहती थी. प्रकाश
बिस्तर पर लेट गया और कुसुम उसपर चाड उसके लंड को छूट के छेड़
पर लगा खुद उसके लंड पर बैठ गयी.

प्रकाश का पूरा लंड कुसुम की छूट में घुस चक्का था. उसने प्रकाश के
लंड को खुद की छूट में जगह बनाना का समय दिया और फिर खुद
धक्के लगाने लगी. उसके कुल्हों को पकड़ प्रकाश भी नीचे से ढके
लगा रहा था. कुसुम के मूह से सिसकारियाँ फुट रही थी,

“हाआाआआं ओह य्ाआआआआआ आईसस्स्स्स्सीईई ही.”

इतने में अजय कुसुम के पीछे आ गया और उसे तोड़ा नीचे झुका उसकी
गांडको सहलाने लगा. उसने अपनी दो उंगली उसकी गांडमें ग्घहुसा
दी, “उूुुुुउउ माआआआ,” कुसुम दर्द से करही.

अजय थोड़ी वॅसलीन ले अपने लंड और उसकी गांडपे लगा दिया, और
फिर अपना 6′ लंड उसकी गांडमाइयन पेल दिया. अब प्रकाश कुसुम को नीचे
से छोड़ रहा था और अजय पीछे से. मेने आज तक दो लंड एक साथ
नही लिए थे, ये सीन देख के मेरी छूट में पानी आ गया.

मेने आने वेल दीनो में कई बार कुसुम, अजय और प्रकाश को एक साथ
चुदाई करते देखा. मुझे भी किसी से छुड़वा कई साल हो गये थे
और मेरा भी शरीर गरमा उठता था.

ऐसा लगता था की तीनो को सेक्स के अलावा कुछ सुझाई ही नही देता था.
मेने नही जानती थी की ये सब कुछ कितने दीनो तक चलेगा. अगले
महीने अजय और कुसुम की शादी होने वाली थी.

एक दिन जब वो तीनो चुदाई मे मशगूल थे में हर बार की तरह उन्हे
चुप कर देख रही थी. में अपने ही ख़यालों में खोई हुई थी कीसोचते हुए में वापस अपने कमरे मे आ गयी.

कुछ दिन गुज़र गये पर प्रकाश ने किसी से कुछ नही कहा. में समझी
शायद उसने मुझे ना देखा हो पर उस दिन के बाद मेने छुपकर देखना
बंद कर दिया.

शनिवार के दिन अजय और कुसुम ने अपने कुछ दोस्तों के साथ पिक्निक
मानने चले गये. मेने सोचा की चलो आज घर में कोई नही में
भी तोड़ा आराम कर लूँगी.

मेने अपने सारे कपड़े उत्तर दिए और नंगी हो गयी. एक रोमॅंटिक
नॉवेल ले में सोफे पर लेट पढ़ने लगी. बेखायाली मे मुझे याद नही
रहा की मेने दरवाज़ा कैसे खुला छोड़ दिया. मुझे पता तब चला
जब मेने प्रकाश की आवाज़ सुनी, “किताब पढ़ी जेया रही है.”

मेने तुरंत अपना हाथ अपने नाइट गाउन की तरफ बढ़ाया पर प्रकाश ने
मेरे गाउन को मेरी पहुँच से डोर कर दिया था. मेने झट से एक
हाथ से अपनी चुचियों को ढाका और दूसरे हाथ से अपनी छूट को
ढाका.

“तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम तो अजय के साथ पिक्निक पर जाने वेल
थे?” मेने तोड़ा चिंतित होते हुए पूछा.

“पता नही क्यों मेरा मान नही किया उनके साथ जाने को. उस दिन के बाद
मेने सोचा आप अकेली होंगी चल कर आपका साथ दे दूं. आपको ऐतराज़
तो नही?” प्रकाश ने जवाब दिया.

“ज़रूर ऐतराज़ है. आज में आकेयलए रहना चाहती हूँ. अब तुम यहाँ से
चले जाओ.” मेने अपनी आवाज़ पर ज़ोर देते हुए कहा.

प्रकाश ज़ोर से हँसने लगा और अपने कपड़े उत्तर दिए, “में थोड़ी देर
आपके साथ बिताकर चला जौंगा.”

में उसके व्यवहार को लेकर चिंतित हो उठी. जब उसने कपड़े उत्तरने
शुरू किए तो में चौंक पड़ी. मेने गौर से उसके लंड की तरफ
देखा, मुरझाए पं की हालत में भी वो कम से कम 6′ इंच लंबा
दिख रहा था. मेने अपनी नज़रें हटाई और पेट के बाल लेट गयी
जिससे उसकी नज़रों से अपने नंगे बदन को छुपा साकु.

“इसमे इतनी हैरानी की क्या बात है. तुम मुझे इससे पहले भी नंगा
देख चुकी हो.” उसने कहा.

उसे पता था की में उन लोगो को चुप कर देख चुकी हूँ और में
इनकार भी नही कर सकती थी. उसने एक बार फिर मुझे चौंका दिया
जब वो मेरे नग्न चुततादों को सहलाने लगा.

साइड टेबल पर पड़ी तेल की शीशी को देख कर वो बोला, “प्रीति
अचानक मेने देखा की प्रकाश मुझे ही देख रहा था. शायद उसने

तुम्हारे चुतताड वाकई बहोट शानदार है और तुम्हारा फिगर. लाओ में
तोड़ा तेल लगा कर तुम्हारी मालिश कर देता हूँ.”

मेने महसुस्न किया को वो मेरे कंधों पर और पीठ पर तेल दल रहा
है. फिर वो तोड़ा झुकते हुए मेरे बदन पर तेल मलने लगा. उसके
हाथों का जादू मेरे शरीर मे आग सी भर रहा था. उसका लंड अब
खड़ा होकर मेरे चुततादों की दरार पर रग़ाद खा रहा था. मेने
अपने आप को छुड़ाना चाहा पर वो मुझे कस कर पकड़े तेल मलने
लगा.

मेरे कंधों और पीठ पर से होते हुए उसके हाथ मेरी पतली कमर पर
मालिश कर रहे थे. फिर और नीचे होते हुए अब वो मेरी नगञा
जांघों को मसल रहे थे. अब वो मेरी गांडपर अपने हाथ से धीरे
धीरे तेल लगाने लगा. बीच मे वो उन्हे भींच भी देता था. एक अजीब
सी सनसनी मेरे शरीर में दौड़ रही थी.

प्रकाश काफ़ी देर तक यूँही मेरी मालिश करता रहा. गांडकी मालिश
करते हुए कभी वो मेरी जांघों के बीच मे भी हाथ दल देता था.

फिर उसने मुझे कंधे से पकड़ा और पीठ के बाल लिटा दिया. इससे
पहले की में कोई विरोध करती उसने मेरे होठों को अपने होठों मे ले
चूसना शुरू कर दिया. अब मुझसे अपने आपको रोक पाना मुश्किल लग
रहा था आख़िर इतने दीनो से में भी तो यही चाहती थी. मेने अपने
आपको प्रकाश के हवाले करते हुए अपना मुँह तोड़ा खोला और उसने अपनी
जीभ मेरे मुँह में दल घूमने लगा.

प्रकाश मेरे निचले होठों को चूस्टे हुए मेरी थोड़ी फिर मेरी गर्दन
को चूम रहा था. जब उसने मेरे कांके लाउ को चूमा तो एक अजीब सा
नशा छा गया.

अपनी जीब को होल होल मेरे नंगे बदन पर फिरते हुए नीचे की और
खिसकने लगा. जब वो मेरी चुचियों के पास पहुँचा तो उसने मेरी
चुचियों को हल्के से मसालने लगा. मेरे ताने हुए निपल पर अपनी
जीब फिरने लगा. अजीब सी गुदगुदी मच रही थी मेरे शरीर मे.
कितने सालों से में इस तरह के प्यार से वंचित थी.

प्रकाश मेरी आँखों में झँकते हुए कहा, “तुम्हारी चुचियों बड़ी
शानदार है.”

में उसके छूने मात्रा से झड़ने के कगार पर थी. प्रकाश ने मुझे
ऐसे हालत पे लाकर खड़ा कर दिया था की मेरी छूट मात्रा चुने से
पानी छोड़ देती.

वो मेरी चुचियों को चूसे जेया रहा था और दूसरे हाथ से मेरी
जांघों को सहला रहा था. झड़ने की इक्चा मेरे में त्रव होती जेया
रही थी. मेरी छूट में आग लगी हुई थी और उसका एक स्पर्श उसकी
उठती आग को ठंडा कर सकती थी. मेने उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा, “प्रकाश प्लीज़ प्लीज़…..”

“प्लीज़ क्या प्रीति बोलो ना? तुम क्या चाहती हो मुझसे? क्या तुम झड़ना
चाहती हो?’ जैसे उसने मेरी मान की बात पढ़ ली हो.

“हन प्रकाश मेरा पानी चूड़ा दो, में झड़ना चाहती हूँ.” मेने जैसे
मिन्नत माँगते हुए कहा.

उसने मेरी दोनो चुचियों को साथ साथ पकड़ कर मेरे दोनो निपल को
अपने मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगा. अपनी मुँह हटा कर वो फिर
से वही हरकत बार बार दोहराने लगा जब तक में अपने कूल्हे ना
उकचलने लगी.

जैसे ही उसका हाथ मेरी छूट पर पहुँचा उसने अपनी उंगली मेरी गीली
हुई छूट में घुसा दी. फिर उसने अपनी दो और उंगली मेरी छूट में
घुसा कर अंदर बाहर करने लगा.

प्रकाश फिर मेरी टॅंगो के बीच आ गया और मेरी छूट को अपने मुँह मे
ले लिया. उत्तेजना के मारे मेरी छूट फूल गयी थी. वो मेरी छूट को
चूस और छत रहा था. प्रकाश अपनी लंबी ज़ुबान से मेरे गंद के छेड़
से चाटते हुए मेरी छूट तक आता और फिर अपनी ज़ुबान को अंदर घुसा
देता.

उसके इस हरकत ने मेरी टॅंगो का तनाव बढ़ा दिया और एक पिचकारी की
तरह मेरी छूट ने उसकी मुँह मे पानी छोड़ दिया. मेरे शरीर मारे
उत्तेजना के कांप रहा था और मुँह से सिसकारिया निकल रही थी.

प्रकाश ने आक्ची तरह मेरी छूट को छत कर साफ किया और फिर खड़े
होते हुए मेरी ही पानी का स्वाद देते हुए मेरे होठों को चूम लिया.

“देखा तुम्हारी छूट के पानी का स्वाद कितना अक्चा है. और तुम्हारी
छूट पानी भी पिचकारी की तरह छोड़ती है.” उसने कहा.

“हन अजय मेरी छूट उत्तेजना में फूल जाती है और पानी भी इसी
तरह छोड़ती है. मेरे पति का अक्चा नही लगता था इसीलिए वो मेरी
छूट को चूसना कम पसंद करता था.” मेने कहा.

“में समझ सकता हूँ. अब में तुम्हे आराम से प्यार करना चाहता हूँ
और तुम भी मज़े लो.” कहकर प्रकाश मेरी चेहरे पर हाथ फिरने लगा.

प्रकाश उठ कर खड़ा हो गया और उसका लंड और टन कर खड़ा हो गया.
में अपनी जिंदगी में सबसे लंबे और मोटे लंड को देख रही थी.
प्रकाश का लंड मेरे पति के लंड से दुगना था लंबाई मे. वो काँसे कम
9’इंच लंबाई मे और 5′ इंच मोटाई मे था. मेरा जी उसके लंड को
मुँह मे लेने को मचल रहा था और में दर भी रही थी क्योंकि
मेने आज तक इतने लंबे लंड को नही चूसा था. उसने मुझे धीरे से सोफे पर लिटा दिया. में आराम से लेट गयी और
अपनी टाँगे फैला दी. उसने अपने लंड को मेरी छूट के मुँह पर रखा
और धीरे से अंदर घुसा दिया.

मेने कस कर प्रकाश को अपनी बाहों में जाकड़ लिया था. उसके लंड की
लंबाई से मुझे दर लग रहा था की कहीं वो मेरी छूट को सही मे
फाड़ ना दे.

प्रकाश धीरे से अपने लंड को बाहर खींचता और फिर अंदर घुसा देता.
मेने अपनी टाँगे उठा कर अपनी छाती से लगा ली जिससे उसको लंड
घुसने में आसानी हो. जब उसका लंड पूरा मेरी छूट मे घुस गया
था तो वो रुक गया जिससे मेरी छूट उसके लंड को अड्जस्ट कर सके.
मुझे पहली बार लग रहा था की मेरी छूट भर सी गयी है.

प्रकाश ने मेरी आँखों मे झाँका और पूछा, “प्रीति तुम ठीक तो हो
ना?”

मेरे मुँह से आवाज़ नही निकली, मेने सिर्फ़ गर्दन हिला कर उसे हन
कहा और अपने बदन को तोड़ा हिला कर अड्जस्ट कर लिया. मुझसे अब
रहा नही जेया रहा था.

“पल्ल्ल्ल्ल्लेआआअसए अब मुज्ज़ज्ज्ज्ज्झे चूऊओदो.” मेने धीरे से उससे
कहा.

प्रकाश ने मुस्कुराते हुए अपने कूल्हे हिलने शुरू कर दिए. पहले तो वो
मुझे धीरे धीरे छोड़ता रहा, जब मेरी छूट गीली हो गयी और उसका
लंड आसानी से मेरी छूट मे आ जेया रहा था अचानक उसने मेरी टाँगे
उठा कर अपने कंधों पर रख ली और ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा.

उसका हर धक्का पहले धक्के ज़्यादा ताकतवर था. उसकी साँसे तेज हो
गयी थी और वो एक हुंकार के साथ अपना लंड मेरी छूट की जड़ों तक
दल देता. अब में भी अपने कूल्हे उछाल उसका साथ दे रही थी. में
भी अपनी मंज़िल के नज़दीक पहुँच रही थी.

“चूऊऊदो राआआआवी आईसस्स्स्स्स्ससे ही हााआअँ ओह मेरााा
छुउतने वााआाअल हाईईइ.” में उखड़ी सांसो के साथ बड़बड़ा रही
थी.

“हाआआं प्रीईएटी चूऊऊद डूऊऊ अपनााआ पाणिीईई मेरे
लिईई.” कहकर वो ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लग गया.

प्रकाश मुझे जितनी ताक़त से छोड़ सकता था छोड़ रहा था और मेरी
छूट पानी पर पानी छोड़ रही थी. मेरा शरीर उत्तेजना मे कांप रहा
था, मेने अपने नाख़ून उसके कंधों पे गाड़ा दिए. मेरी साँसे संभली
भी नही थी की प्रकाश का शरीर अकड़ने लगा.

“ओह प्रीईईटी मेरााआआआ भी चूऊऊथा ओह ये
लो.” प्रकाश ने एक आखरी ढकाया लगाया और अपना वीर्या मेरी छूट मे
छोड़ दिया.

पिचकारी पिचकारी मेरी छूट मे गिर रही थी. जैसे ही हम संभले
मेने अपनी टाँगे सीधी कर ली. प्रकाश तक कर मेरे शरीर पर लुढ़क
गया, हम दोनो का शरीर पसीने से तार बतर था.

“चलो नहा लेते है.” प्रकाश ने मुझे चूमते हुए कहा.

अब मुझे अपने किए हुए पर शरम नही आ रही थी. में नंगी ही
उठी और प्रकाश का हाथ पकड़ बत्रोंम की और बढ़ गयी. हम दोनो
गरम पानी के शवर की नीचे खड़े हो अपने बदन को सेकने लगे. हम
दोनो एक दूसरे की बदन को सहला रहे थे और एक दूसरे की बदन पर
साबुन माल रहे थे. मेने प्रकाश के लंड और उसकी गोलियों पर साबुन
लगाना शुरू किया तो उसका लंड एक बार फिर टन कर खड़ा हो गया.

में उसके मस्ताने लंड को हाथों मे पकड़े सहला रही थी. मुझमे भी
फिर से छुड़वाने की इक्चा जाग उठी. मेने उसके लंड को अपनी छूट पर
रख रगड़ने लगी.

प्रकाश भी अपने आपको रोक नही पाया उसने मुझे बातरूम की दीवार के
सहाहे खड़ा किया और मेरे चुततादों को अपनी और खींचते हुए अपना
लंड मेरी छूट मे घुसा दिया.

उसके हर धक्के के साथ मेरी पीठ दीवार मे धँस जाती. में अपने
बदन का बोझ अपनी पीठ पर दल अपनी छूट को और आयेज की और कर
देती और उसके धक्के का साथ देती. थोड़ी ही देर में हम दोनो का
पानी छूट गया.

हम दोनो एक दूसरे को बाहों मे लिए शवर के नीचे थोड़ी देर खड़े
रहे. फिर में उसे अलग हुई तो उसका लंड मुरझा कर मेरी छूट से
फिसल कर बाहर आ गया. मेरे मान में तो आया की में उसके
मुरझाए लंड को अपने मुँह मे ले दोनो के मिश्रित पानी का स्वाद चखू
पर ये मेने बहाविष्या के लिए छोड़ दिया.

पूरा दिन हमे मज़े करते रहे. कभी हम टीवी देखते तो कभी एक दूसरे
को छेड़ते. पूरे दिन हम कई बार चुदाई कर चुके थे. मेने रत के
लिए भी प्रकाश को रोक लिया. रात को एक बार फिर हुँने जमकर चुदाई
की और एक दूसरे की बाहों मे सो गये.

दूसरे दिन मे सो कर उठी तो मान में एक अजीब सी खुशी और शरीर मे
एक नशा सा भरा था. मेने प्रकाश की तरफ देखा जो गहरी नींद मे
सोया हुआ था. उसका लंबा मोटा लंड इस समय मुरझाया सा था. उसके
लंड को अपने मुँह मे लेने से मे अपने आपको नही रोक पाई.

————– समाप्त —————–

दोस्तों कैसी लगी आपको मेरी Group chudai story बताना जरुर

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