मास्टरजी की शिष्या

एक टीचर अपने शिष्यों के बहुत करीब होता है, पर अगर वो ही मास्टर का दिल अपनी कुंवारी शिष्या पे आ जाए तो उसे हासिल करने के लिए उसके पास बहुत तरीके होते है.. पढ़िए एक मस्त masterji shishya sex story in hindi.

नव्या का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था।

उसके पिता बागवानीका काम करते थे और माँ घरों

में काम करती थी। ज्यादातर देखा गया है कि समाज केबुरे लोगों की नज़र गरीब घरों की कमसिन लड़कियों पर होती

है। वे सोचते हैंकि गरीब लड़की की कोई आकांक्षा

ही नहीं होती और वे उसके साथ मनमर्ज़ी करसकते हैं।

नव्या जैसे जैसे बड़ी हो रही थी, आस पास के लड़कों और आदमियोंकी उस पर नज़र पड़ रही थी। वे उसको तंग करने और छूने का

मौका ढूँढ़ते रहतेथे। नव्या शर्म के

मारे अपने माँ बाप को कुछ नहीं कह पाती थी।एक दिन

स्कूल में जब वह फीस भर रही थी, तो गुरूजी masterji shishya sex story

ने उसे अकेले में लेजाकर कहा कि अगर वह चाहे तो वे उसकी फीस माफ़ करवा सकते

हैं। नव्या खुश होगई और गुरूजी

को धन्यवाद देते हुए बोली कि इससे उसके पिताजी

को बहुतराहत मिलेगी। गुरूजी ने कहा पर इसके लिए उसे कुछ करना होगा। नव्या प्रश्न मुद्रा में गुरूजी

की तरफ देखने लगी तो गुरूजी ने उसे स्कूल केबाद अपने घर आने के लिए कहा और बोला कि वहीं पर सब समझा

देंगे।चलते चलते

गुरूजी ने नव्या को आगाह

किया कि इस बारे में किसी और को नबताये नहीं

तो बाकी बच्चे भी फीस माफ़ करवाना चाहेंगे !! नव्या समझ गई औरकिसी को न बताने का आश्वासन दे दिया। गुरूजी क्लास में नव्या पर ज्यादाध्यान दे रहे थे और उसकी पढ़ाई की तारीफ़ भी कर रहे थे।

नव्या गुरूजी सेखुश थी। जब स्कूल की घंटी बजी तो गुरूजी ने उसे आँख से इशारा किया औरअपने घर को चल दिए। नव्या भी अपना masterji shishya sex story

बस्ता घर में छोड़ कर और अपनी बहन कोबता कर

कि वह पढ़ने जा रही है, गुरूजी के घर को चल दी।

गुरूजी घर में अकेले ही थे, नव्या को देख कर खुश हो गए और उसकी पढ़ाई की तारीफ़ करने लगे। नव्या अपनी तारीफ़ सुन कर खुश हो गई और मुस्कराने लगी। गुरूजी ने उसे सोफे पर अपने पास बैठने को कहा और उसके परिवार वालों के बारे में पूछने लगे।

इधर उधर की बातों के बाद उन्होंने नव्या को कुछ ठंडा पीने को दिया और कहा कि वह अगर इसी तरह मेहनत करती रहेगी और अपने गुरूजी को खुश रखेगी तो उसके बहुत अच्छे नंबर आयेंगे और वह आगे चलकर बहुत नाम कमाएगी। नव्या को यह सब अच्छा लग रहा था और उसने गुरूजी को बोला कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगी !!

गुरूजी ने उसके सर पर हाथ रखा और प्यार से उसकी पीठ सहलाने लगे। गुरूजी ने नव्या को हाथ दिखाने को कहा और उसके हाथ अपनी गोदी में लेकर मानो उसका भविष्य देखने लगे। नव्या बेचारी को क्या पता था कि उसका भविष्य अँधेरे की तरफ जा रहा है ! masterji shishya sex story

हाथ देखते देखते गुरूजी अपनी ऊँगली जगह जगह पर उसकी हथेली के बीच में लगा रहे थे और उस भोली लड़की को उसके भविष्य के बारे में मन गढ़ंत बातें बता रहे थे। उसे राजकुमार सा वर मिलेगा, अमीर घर में शादी होगी वगैरह वगैरह !!

दोनों हाथ अच्छी तरह देखने के बाद उन्होंने उसकी बाहों को इस तरह देखना शुरू किया मानो वहां भी कोई रेखाएं हैं। उसके कुर्ते की बाजुओं को ऊपर कर दिया जिससे पूरी बाहों को पढ़ सकें। गुरूजी थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ ऐसा बोल देते जैसे कि वे कुछ पढ़ कर बोल रहे हों। अब उन्होंने नव्या को अपनी टाँगें सोफे के ऊपर रखने को कहा और उसके तलवे पढ़ने लगे।

यहाँ वहां उसके पांव और तलवों पर हाथ और ऊँगली का ज़ोर लगाने लगे जिससे नव्या को गुदगुदी होने लगती। वह अजीब कौतूहल से अपना सुन्दर भविष्य सुन रही थी तथा गुदगुदी का मज़ा भी ले रही थी। जिस तरह गुरूजी ने उसके कुर्ते की बाजुएँ ऊपर कर दी थी ठीक उसी प्रकार उन्होंने बिना हिचक के नव्या की सलवार भी ऊपर को चढ़ा दी और रेखाएं ढूँढने लगे। उसके सुन्दर भविष्य की कोई न कोई बात वे बोलते जा रहे थे।

अचानक उन्होंने नव्या से पूछा कि क्या वह वाकई में अपना और अपने परिवार वालों का संपूर्ण भविष्य जानना चाहती है? अगर हाँ, तो इसके लिए उसे अपनी पीठ और पेट दिखाने होंगे। नव्या समझ नहीं पाई कि क्या करे तो गुरूजी बोले कि गुरु तो पिता सामान होता है और पिता से शर्म कैसी? तो नव्या मान गई और अपना कुर्ता ऊपर कर लिया। गुरूजी ने कहा इस मुद्रा में तो तुम्हारे हाथ थक जायेंगे, बेहतर होगा कि कुर्ता उतार ही दो। यह कहते हुए उन्होंने उसका कुर्ता उतारना शुरू कर दिया। नव्या कुछ कहती इससे पहले ही उसका कुर्ता उतर चुका था। masterji shishya sex story

नव्या ने कुर्ते के नीचे ब्रा पहन रखी थी। गुरूजी ने उसे सोफे पर उल्टा लेटने को कहा और उसके पास आकर बैठ गए। उनके बैठने से सोफा उनकी तरफ झुक गया जिससे नव्या सरक कर उनके समीप आ गई। उसका मुँह सोफे के अन्दर था और शर्म के मारे उसने अपनी आँखों को अपने हाथों से ढक लिया था। पर गुरूजी ने उसकी पीठ पर अपनी एक ऊँगली से कोई नक्शा सा बनाया मानो कोई हिसाब कर रहे हों या कोई रेखाचित्र खींच रहे हों।

ऐसा करते हुए वे बार बार ऊँगली को उसकी ब्रा के हुक के टकरा रहे थे मानो ब्रा का फीता उनको कोई बाधा पहुंचा रहा था। उन्होंने आखिर नव्या को बोला कि वे एक मंत्र उसकी पीठ पर लिख रहे हैं जिससे उसके परिवार की सेहत अच्छी रहेगी और उसे भी लाभ होगा। यह कहते हुए उन्होंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। नव्या घबरा कर उठने लगी तो गुरूजी ने उसे दबा दिया और बोले घबराने और शरमाने की कोई बात नहीं है। यहाँ पर तुम बिल्कुल सुरक्षित हो !!

उस गाँव में बहुत कम लोगों को पता था कि गुरूजी , यहाँ आने से पहले, आंध्र प्रदेश के ओंगोल शहर में शिक्षक थे और वहां से उन्हें बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप के कारण निकाल दिया था। इस आरोप के कारण उनकी सगाई भी टूट गई थी और उनके घरवालों तथा दोस्तों ने उनसे मुँह मोड़ लिया था। अब वे अकेले रह गए थे। उन्होंने अपना प्रांत छोड़ कर यहाँ नौकरी कर ली थी जहाँ उनके पिछले जीवन के बारे में कोई नहीं जानता था। उन्हें यह भी पता था कि उन्हें होशियारी से काम करना होगा वरना न केवल नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, हो सकता है जेल भी जाना पड़ जाये।

उन्होंने नव्या की पीठ पर प्यार से हाथ फेरते हुए उसे सांत्वना दी कि वे उसकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ नहीं करेंगे। अचानक, गुरूजी चोंकने का नाटक करते हुए बोले,”तुम्हारी पीठ पर यह सफ़ेद दाग कब से हैं?” masterji shishya sex story

नव्या ने पूछा,”कौन से दाग?”

तो गुरूजी ने पीठ पर 2-3 जगह ऊँगली लगाते हुए बोला,” यहाँ यहाँ पर !” फिर 1-2 जगह और बता दी।

नव्या को यह नहीं पता था, बोली,”मुझे नहीं मालूम गुरूजी , कैसे दाग हैं?”

गुरूजी ने चिंता जताते हुए कहा,”यह तो आगे चल कर नुकसान कर सकते हैं और पूरे शरीर पर फैल सकते हैं। इनका इलाज करना होगा।”

नव्या ने पूछा,”क्या करना होगा?”

गुरूजी ने बोला,”घबराने की बात नहीं है। मेरे पास एक आयुर्वैदिक तेल है जिसको पूरे शरीर पर कुछ दिन लगाने से ठीक हो जायेगा। मेरे परिवार में भी 1-2 जनों को था। इस तेल से वे ठीक हो गए। अगर तुम चाहो तो मैं लगा दूं।”

नव्या सोच में पड़ गई कि क्या करे। उसका असमंजस दूर करने के लिए गुरूजी ने सुझाव दिया कि बेहतर होगा यह बात कम से कम लोगों को पता चले वरना लोग इसे छूत की बीमारी समझ कर तुम्हारे परिवार को गाँव से बाहर निकाल देंगे। फिर थोड़ी देर बाद खुद ही बोले कि तुम्हारा इलाज मैं यहाँ पर ही कर दूंगा। तुम अगले ७ दिनों तक स्कूल के बाद यहाँ आ जाना। यहीं पर तेल की मालिश कर दूंगा और उसके बाद स्नान करके अपने घर चले जाया करना। किसी को पता नहीं चलेगा और तुम्हारे यह दाग भी चले जायेंगे। क्या कहती हो?

बेचारी नव्या क्या कहती। वह तो गुरूजी के बुने जाल में फँस चुकी थी। घरवालों को गाँव से निकलवाने के डर से उसने हामी भर दी। गुरूजी अन्दर ही अन्दर मुस्करा रहे थे। masterji shishya sex story

गुरूजी ने कहा, “नेक काम में देरी नहीं करनी चाहिए। अभी शुरू कर देते हैं !”

वे उठ कर अन्दर के कमरे में चले गए और वहां से एक गद्दा और दो चादर ले आये। गद्दे और एक चादर को फर्श पर बिछा दिया और दूसरी चादर नव्या को देते हुए बोले,”मैं यहाँ से जाता हूँ, तुम कपड़े उतार कर इस गद्दे पर उल्टी लेट जाओ और अपने आप को इस चादर से ढक लो।” जब तुम तैयार हो जाओ तो मुझे बुला लेना। नव्या को यह ठीक लगा और उसने सिर हिला कर हाँ कर दी। गुरूजी फट से दूसरे कमरे में चले गए।

उनके जाने के थोड़ी देर बाद नव्या ने इधर उधर देखा और सोफे से उठ खड़ी हुई। उसने कभी भी अपने कपड़े किसी और घर में नहीं उतारे थे इसलिए बहुत संकोच हो रहा था। पर क्या करती। धीरे धीरे हिम्मत करके कपड़े उतारने शुरू किये और सिर्फ चड्डी में गद्दे पर उल्टा लेट गई और अपने ऊपर चादर ले ली। थोड़ी देर बाद उसने गुरूजी को आवाज़ दी कि वह तैयार है।

गुरूजी अन्दर आ गये और गद्दे के पास एक तेल से भरी कटोरी रख दी। वे सिर्फ निकर पहन कर आये थे। कदाचित् तेल से अपने कपड़े ख़राब नहीं करना चाहते थे। उन्होंने धीरे से नव्या के ऊपर रखी चादर सिर की तरफ से हटा कर उसे पीठ तक उघाड़ दिया। नव्या पहली बार किसी आदमी के सामने इस तरह लेटी थी। उसे बहुत अटपटा लग रहा था। उसने अपने स्तन अपनी बाहों में अच्छी तरह अन्दर कर लिए और आँखें मींच लीं।

उसका शरीर अकड़ सा रहा था और मांस पेशियाँ तनाव में थी। गुरूजी ने सिर पर हाथ फेर कर उसे आराम से लेटने और शरीर को ढीला छोड़ने को कहा। नव्या जितना कर सकती थी किया। पर वह एक अनजान सफ़र पर जा रही थी और उसके शरीर के एक एक हिस्से को एक अजीब अहसास हो रहा था। masterji shishya sex story

गुरूजी ने कुछ देर उसकी पीठ पर हाथ फेरा और फिर दोनों हाथों में तेल लेकर उसकी पीठ पर लगाने लगे। ठंडे तेल के स्पर्श से नव्या को सिरहन सी हुई और उसके रोंगटे खड़े हो गए। पर गुरूजी के हाथों ने रोंगटों को दबाते हुए मालिश करना शुरू कर दिया। शुरुआत उन्होंने कन्धों से की और नव्या के कन्धों की अच्छे से गुन्दाई करने लगे । नव्या की तनी हुई मांस पेशियाँ धीरे धीरे आराम महसूस करने लगीं और वह खुद भी थोड़ी निश्चिंत होने लगी।

धीरे धीरे गुरूजी ने कन्धों से नीचे आना शुरू किया। पीठ के बीचों बीच रीढ़ की हड्डी पर अपने अंगूठों से मसाज किया तो नव्या को बहुत अच्छा लगा। अब वे पीठ के बीच से बाहर के तरफ हाथ चलाने लगे। पीठ के दोनों तरफ नव्या की बाजुएँ थीं जिनसे उसने अपने स्तन छुपाए हुए थे। गुरूजी ने धीरे से उसके दोनों बाजू थोड़ा खोल दिए जिस से वे उसकी पीठ के दोनों किनारों तक मालिश कर। सकें। गुरूजी ने तेल की कटोरी अपने पास खींच ली और नव्या की पीठ के ऊपर दोनों तरफ टांगें कर के उसके ऊपर आ गए। इस तरह वे पीठ पर अच्छी तरह जोर लगा कर मालिश कर सकते थे।

नव्या के नितंब अभी भी चादर से ढके थे। गुरूजी के हाथ रह रह कर नव्या के स्तनोंके किनारों को छू जाते। पर वह इस तरह मालिश कर रहे थे मानो उन्हें नव्या के शरीर से कुछ लेना देना न हो। उधर नव्या को अपने स्तनों के आस पास के स्पर्श से रोमांच हो रहा था। वह आनंद ले रही थी।

यही कारण था कि उसके बाजू स्वतः ही थोड़ा और खुल गए जिस से गुरूजी के हाथों को और आज़ादी मिल गई। गुरूजी पुराने पापी थे और इस तरह के इशारे भांप जाते थे सो उन्होंने अपनी मालिश का घेरा थोड़ा और बढ़ाया। दोनों तरफ उनके हाथ नव्या के स्तनों को छूते और नीचे की तरफ नितंबों तक जाते। masterji shishya sex story

नव्या के इस छोटे से प्रोत्साहन से गुरूजी में और जोश आया और वे उसकी पीठ पर ऊपर से नीचे तक और दायें से बाएं तक मालिश करने लगे। कभी कभी उनकी निकर नव्या के चादर से ढके नितंब को छू जाती। नव्या की तरफ से कोई आपत्ति नहीं होते देख गुरूजी ने उसके नितंब को थोड़ा और ज़ोर से छूना शुरू कर दिया। जिस तरह एक पहलवान दंड पेलता है कुछ उसी तरह गुरूजी नव्या के ऊपर घुटनों के बल बैठ कर उसकी पीठ पेल रहे थे।

कभी कभी उनका लिंग, जो कि इस प्रक्रिया के कारण उठ खड़ा था, निकर के अन्दर से ही नव्या के चूतडों को छू जाता था। नव्या आखिर जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाली एक लड़की थी, उसके मन को न सही पर तन को तो यह सब अच्छा ही लग रहा था।

अब गुरूजी ने पीठ से अपना ध्यान नीचे की तरफ किया। पर नितम्बों की तरफ जाने के बजाय वे नव्या के पाँव की तरफ आ गए। उन्होंने नव्या के ऊपरी शरीर को चादर से फिर से ढक दिया और पाँव की तरफ से घुटनों तक उघाड़ दिया। इससे नव्या को दुगनी राहत मिली। एक तो ठंडी पीठ पर चादर की गरमाई और दूसरे उसे डर था कहीं गुरूजी उसकी मजबूरी का फ़ायदा न उठा लें।

गुरूजी को मन ही मन वह एक अच्छा इंसान मानने लगी। उधर गुरूजी , लम्बी दौड़ की तैयारी में लगे थे। वे नहीं चाहते थे कि नव्या आज के बाद दोबारा उनके घर लौट कर ही न आये। इसलिए बहुत अहतियात से काम ले रहे थे। हालाँकि उनका लिंग बेकाबू हो रहा था। इसी लिए उन्होंने निकर के नीचे चड्डी के बजाय लंगोट बाँध रखी थी जिसमें उनके लिंग का विराट रूप समेटा हुआ था। वरना अब तक तो नव्या को कभी का उसका कठोर स्पर्श हो गया होता। masterji shishya sex story

गुरूजी ने नव्या के तलवों पर तेल लगा कर मालिश शुरू की तो नव्या यकायक उठ गई और बोली, “यह आप क्या कर रहे हैं?”

ऐसा करने से नव्या के नंगे स्तन गुरूजी के सामने आ गए। हड़बड़ा कर उसने जल्दी से अपने आपको हाथों से ढक लिया। पर गुरूजी को दर्शन तो हो ही गए थे। गुरूजी के लिंग ने ज़ोर से अंगड़ाई ली और अपने आपको लंगोट की बंदिश से बाहर निकालने की बेकार कोशिश करने लगा। नव्या के स्तन छोटे पर गोलाकार और गठे हुए थे। अभी इन्हें और विकसित होना था पर किसी मर्द को लालायित करने के लिए अभी भी काफी थे। इस छोटी सी झलक से ही गुरूजी के मन में वासना का अपार तूफ़ान उठ गया पर वे दूध के जले हुए थे।

इस छाछ को फूँक फूँक कर पीना चाहते थे। उन्होंने दर्शाया मानो कुछ देखा ही न हो। बोले, “नव्या यह तुम्हारे उपचार की क्रिया है। इसमें तुम्हे संकोच नहीं होना चाहिए। तुम मुझे गुरूजी के रूप में नहीं बल्कि एक चिकित्सक के रूप में देखो। एक ऐसा चिकित्सक जो कि तुम्हारा हितैषी और दोस्त है। अब लेट जाओ और मुझे मेरा काम करने दो वरना तुम्हें घर लौटने में देर हो जायेगी।”

नव्या संकोच में थी फिर भी लेट गई। किसी के सामने नंगेपन का अहसास एक मानसिक लक्ष्मण रेखा की तरह होता है। बस एक बार ही इसकी सीमा पार करनी होती है। उसके बाद उस व्यक्ति के सामने नंगापन नंगापन नहीं लगता। नव्या को अपने ऊपर शर्म आ रही थी कि अपनी बेवकूफी के कारण उसने अपने आप को गुरूजी के सामने नंगा कर दिया था। यह तो अच्छा है, उसने सोचा, कि गुरूजी एक अच्छे इंसान हैं और बुरी नज़र नहीं रखते। कोई और तो उसे दबोच देता। यह सोच कर नव्या सहम गई। masterji shishya sex story

उधर गुरूजी ने तलवों के बाद नव्या की दोनों टांगों की पिंडलियों को दबाना शुरू किया। नव्या को लगा मानो उसकी सालों की थकान दूर हो रही थी। उसे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ था। किसी ने कभी इस तरह उसकी सेवा नहीं की थी। वह गुरूजी की कृतज्ञ हो रही थी। तो जब गुरूजी ने उसकी टांगें थोड़ी और खोलने की कोशिश की तो नव्या ने उनका सहयोग करते हुए अच्छी तरह अपनी टांगें खोल दीं।

गुरूजी अब पिंडलियों से नव्या करते हुए घुटने और जांघों तक आ गए। अच्छे से तेल लगा कर हाथ चला रहे थे जिस से हाथ में खूब फिसलन हो और वे “गलती से” इधर उधर छू लें। अब नव्या अपनी मालिश करवाने में पूरी तरह लीन थी। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। नव्या के ऊपर रखी चादर उसके नितंब तक उघड़ गई थी।

गुरूजी ने अब देखा कि नव्या पूरी नंगी नहीं है और उसने चड्डी पहन रखी है। मन ही मन उन्हें गुस्सा आया पर गुस्सा दबा कर प्यार से बोले,”तुम्हें यह चड्डी भी उतारनी होगी नहीं तो शरीर के ज़रूरी भाग इस उपचार से वंचित रह जायेंगे। बाद में तुम्हें पछतावा हो सकता है। लेकिन अगर तुम्हें संकोच है तो जैसा तुम ठीक समझो !!”

गुरूजी ने अपना तीर छोड़ दिया था और वे आशा कर रहे थे कि नव्या उनके जाल में फँस जायेगी। ऐसा ही हुआ।

नव्या ने कहा,” गुरूजी , जैसा आप ठीक समझें !!” masterji shishya sex story

तो गुरूजी ने उसको चादर से ढक दिया और कमरे के बाहर यह कहते हुए चले गए कि वे बाथरूम हो कर आते हैं। तब तक नव्या चड्डी उतार कर लेट जाये।

गुरूजी को थोड़ा समय वैसे भी चाहिए था क्योंकि उनका भाला अपनी क़ैद से मुक्त होना चाहता था। इतनी देर से वह अपने आप को संभाले हुए था। गुरूजी को डर था कहीं ज्वालामुखी लंगोट में ही न फट जाए। बाथरूम में जाकर गुरूजी ने अपनी लंगोट खोली और अपने लिंग को आजाद किया। इससे उन्हें बहुत राहत मिली क्योंकि उनके लिंग में हल्का सा दर्द होने लगा था। उसके अन्दर का लावा बाहर आने को तड़प रहा था।

इतनी कमसिन और प्यारी लड़की के इतना नजदीक होने के कारण उनका लंड अति उत्तेजित था और कुछ न कर पाने के कारण बहुत विवश महसूस कर रहा था। उसके लावे को छुटकारा चाहिए था। गुरूजी ने इसी में भलाई समझी कि अपने लिंग को शांत करके ही नव्या के पास जाना चाहिए। वरना करे कराये पर पानी फिर सकता है। यह सोच उन्होंने अपने लंड को तेल युक्त हाथ में लिया और नव्या के स्तनों का स्मरण कर मैथुन करने लगे। लिंगराज तो पहले से ही उत्तेजित थे, थोड़ी सी देर ही में चरमोत्कर्ष को पा गए। गुरूजी ने सोचा अब लंगोट की क्या ज़रुरत सो सिर्फ निकर ही पहन कर बाहर आ गए।

वहां नव्या चड्डी उतार कर चादर के नीचे लेटी हुई थी। चड्डी में थोड़ा गीलापन था सो उसने चड्डी को गद्दे के नीचे छुपा दिया। masterji shishya sex story

गुरूजी ने जहाँ छोड़ा था वहीं से आगे मसाज शुरू किया। चादर को पाँव की तरफ से ऊपर लपेट कर नव्या की जांघों तक उठा दिया और उसकी टांगें अच्छे से खोल दीं क्योंकि नव्या अब नंगी थी, टांगें खुलने से उसे शर्म आ रही थी सो उसने अपनी टांगें थोड़ी सी बंद कर लीं। गुरूजी ने कुछ नहीं कहा और पीछे से घुटनों और जांघों पर तेल लगाने लगे। उनके हाथ धीरे धीरे ऊपर की तरफ जाने लगे और चूतडों पर पहुँच गए। गुरूजी नव्या की टांगों के बीच वज्रासन में बैठ गए और नव्या के घुटने से ऊपर की टांगों की मालिश करने लगे।

चादर को उन्होंने उसकी पीठ तक उघाड़ दिया और वह उलटी, नंगी और असहाय उनके सामने लेटी हुई थी। गुरूजी अपने जीवन में सिर्फ लड़कियां ही नहीं लड़कों का यौन शोषण भी कर चुके थे सो उन्हें गांड से बेहद प्यार था और उन्हें गांड मारने में मज़ा भी ज्यादा आता था। इस अवस्था में नव्या की कुंवारी गांड को देख कर गुरूजी की लार टपकने लगी। उनका मन कर रहा था इसी वक़्त वे नव्या की गांड भेद दें पर अपने ही इरादे से मजबूर थे।

उनके हाथ नव्या के चूतडों पर सरपट फिर रहे थे। रह रह कर उनकी उंगलियाँ चूतडों के पाट के बीच चली जातीं। जब ऐसा होता, नव्या हिल हिल कर आपत्ति जताती। वज्रासन से थक कर गुरूजी अपने घुटनों के बल बैठ गए और मालिश जारी रखी। उनकी उंगलियाँ नव्या की योनि के द्वार तक दस्तक देने लगीं। ऐसे में भी नव्या हिलडुल कर मनाही कर देती।

अब गुरूजी ने नव्या के ऊपर से पूरी चादर हटा दी और मालिश का वार पिंडलियों से लेकर पीठ और कन्धों तक करने लगे। जब वे आगे को जाते तो उनकी निकर नव्या के चूतडों से छू जाती। masterji shishya sex story

मास्टरजी अपनी कुंवारी मासूम शिष्या की ऊपर से नीचे तक मसाज कर रहे है, देखते है वो बेचारी लड़की कब तक अपने आप पे काबू रख पायेगी.. इस sex hindi story का अगला भाग..

उनके हाथ नव्या के चूतडों पर सरपट फिर रहे थे। रह रह कर उनकी उंगलियाँ चूतडों के पाट के बीच चली जातीं। जब ऐसा होता, नव्या हिल हिल कर आपत्ति जताती। वज्रासन से थक कर गुरूजी अपने घुटनों के बल बैठ गए और मालिश जारी रखी। उनकी उंगलियाँ नव्या की योनि के द्वार तक दस्तक देने लगीं। ऐसे में भी नव्या हिलडुल कर मनाही कर देती।

अब गुरूजी ने नव्या के ऊपर से पूरी चादर हटा दी और मालिश का वार पिंडलियों से लेकर पीठ और कन्धों तक करने लगे। जब वे आगे को जाते तो उनकी निकर नव्या के चूतडों से छू जाती।

हालाँकि गुरूजी एक बार लिंगराज को राहत दिला चुके थे और आम तौर पर उनका लंड एक दो घंटे के विश्राम के बाद ही दुबारा तैयार होता था, इसी विश्वास पर तो उन्होंने लंगोट उतार दी थी। पर आज आम हालात नहीं थे। लिंगराज के लिए कठिन समय था। उनके सामने एक अत्यंत कामुक और आकर्षक लड़की उनकी गिरफ्त में थी। वह नंगी और कई तरह से असहाय भी थी। उनके संयम की मानो परीक्षा हो रही थी। masterji shishya sex story

मन पर तो गुरूजी ने काबू पा लिया पर तन का क्या करें। उनका लंड ताव में आ गया और उसके तैश के सामने बेचारी निकर का कपड़ा कमज़ोर पड़ रहा था। वह उसके बढ़ाव और उफ़ान को अपने में सीमित रखने में नाकामयाब हो रहा था। अतः गुरूजी का लंड निकर को उठाता हुआ आसमान को सलामी दे रहा था। गुरूजी के इरादों का विद्रोह करते हुए उन्हें मानो अंगूठा दिखा रहा था। यह तो अच्छा था कि नव्या उलटी लेटी हुई थी वरना लिंगराज की यह हरकत उससे छिपी नहीं रह सकती थी। सावधानी बरतते बरतते भी उनकी लंड-युक्त निकर नव्या की गांड को छूने लगी।

कुछ भी कहो, सामाजिक आपत्ति और विपदा एक बात है और प्रकृति के नियम और बात हैं। नव्या या उसकी जगह कोई और लड़की, का सम्भोग के प्रति विरोध सामाजिक बंधनों के कारण होता है ना कि उसके तन-मन की आपत्ति के कारण। तन-मन से तो सबको सम्भोग का सुख अच्छा लगता है बशर्ते सम्भोग सम्मति के साथ किसी प्रियजन के साथ हो। यहाँ भी, हालाँकि नव्या के संस्कार उसको ग्लानि का आभास करा रहे थे, पर गुरूजी के लंड का उसके चूतड़ों पर हल्का हल्का स्पर्श, उसके शरीर को रोमांचित और मन को प्रफुल्लित कर रहा था। नव्या की योनि से सहसा पानी बहने लगा।

गुरूजी क्योंकि पीठ की मालिश में मग्न थे, नव्या की योनि गीली होने का दृश्य नहीं देख पाए। उनकी नज़र पीठ की तरफ और ध्यान चूतड़ों से स्पर्श करती अपनी निकर पर था जिसके कारण उनका लिंग कठोर से कठोरतर होता जा रहा था। उन्हें याद नहीं आ रहा था कि इससे पहले उनका लंड इतनी जल्दी कब दुबारा सम्भोग के लिए तैयार हुआ हो !! उन्हें अपने आप पर गर्व होने लगा पर साथ ही चिंता भी होने लगी कि इस अवस्था से कैसे निपटें ? वे नहीं चाहते थे कि नव्या को उनका विराट लंड दिख जाये। उन्हें डर था वह घबरा कर भाग न जाए।

स्थिति पर काबू पाने के लिए वे नव्या के ऊपर से हट गए और उसकी बगल में बैठ कर उसकी गर्दन और कन्धों को सहलाने लगे। उन्होंने नव्या के निचले शरीर पर चादर भी उढ़ा थी। नव्या के कामोत्तेजन को जैसे अचानक ब्रेक लग गया। उसे थोड़ा बुरा लगा पर राहत भी महसूस की। उसे अपने ऊपर गुस्सा भी आ रहा था कि अपने ऊपर संयम क्यों नहीं रख पा रही है। उसे लगा कि गुरूजी क्या सोचेंगे अगर उन्हें पता लगा कि उसके शरीर में कैसी कशिश चल रही है। वे तो उसका इलाज करने में लगे हैं और वह किसी और प्रवाह में बह रही है ! masterji shishya sex story

अपने ऊपर नव्या को शर्म आने लगी और मन ही मन गुरूजी का धन्यवाद किया कि वे उसके ऊपर से उठ गए और उसको ढक दिया। अब उन्हें नव्या की योनि की अवस्था का पता नहीं चलेगा, जो कि सम्भोग के लिए तत्पर हो रही थी।

थोड़ी देर में गुरूजी का लिंग मायूस हो कर सिकुड़ गया और नव्या की योनि भी बुझ सी गई। दोनों को इससे राहत मिली। नव्या नहीं चाहती थी कि गुरूजी को उसकी कामोत्तेजना के बारे में पता चले। कहीं वे उसे बुरी और बदचलन लड़की न समझने लगें। उधर गुरूजी नहीं चाहते थे कि नव्या उनके लिंग के विराट रूप को देख ले। उन्हें डर था नव्या डर के मारे भाग ही न जाए। वे नव्या के साथ अपने रिश्ते को धीरे धीरे विकसित करना चाहते थे और एक लम्बा सम्बन्ध बनाना चाहते थे।

गुरूजी को जब यकीन हो गया कि उनका लंड नियंत्रण में आ गया है और उनकी निकर के आकार को नहीं ललकार रहा तो वे उठ खड़े हुए और नव्या को चित लेट जाने का आदेश दे कर कमरे से बाहर चले गए। नव्या एक आज्ञाकारी शिष्या कि भांति चादर के नीचे ही करवट बदल कर सीधी हो गई। हालाँकि वह चादर के नीचे थी, फिर भी सहसा उसने अपने हाथों से अपने स्तन ढक लिए ताकि उसके वक्ष की रूपरेखा चादर पर न खिंचे।

वहां गुरूजी ने गुसलखाने में जाकर अपने नटखट लंड को नियंत्रण में लाने के लिए एक बार फिर मामला हाथ में लिया और हस्त मैथुन करने लगे। वे दुबारा अपने आप को ऐसी स्थिति में नहीं लाना चाहते थे जहाँ उन्हें नव्या से हाथ धोना पड़े। कुछ देर के प्रयास के बाद गुरूजी का लंड एक बार फिर लावा उगलने लगा, पर इस बार पहले की भांति का ज्वालामुखी नहीं था। एक फुलझड़ी के मानिंद था। गुरूजी को इस राहत से तसल्ली मिली और वे एक नए भरोसे के साथ नव्या के पास आ गए। उनका लिंग एक भीगी बिल्ली की तरह असहाय सा निकर में लटक रहा था और गवाएँ हुए दो मौकों का अफ़सोस कर रहा था।

नव्या के चित्त लेटने से एक समस्या यह खड़ी हुई कि अब दोनों एक दूसरे को देख सकते थे। पर दोनों ही एक दूसरे से आँख नहीं मिलाना चाहते थे क्योंकि दोनों के मन में ग्लानि भाव था।एक अजीब सी चुप्पी का वातावरण छा गया था। इतने में नव्या ने अपने हाथ चादर से बाहर निकाल कर अपनी आँखों पर रख लिए और आँखें मूँद लीं। उसे शायद ज्यादा शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि नंगी तो वह थी !!!

उसकी इस हरकत से दो फायदे हुए। एक तो दोनों की आँखों का संपर्क टूट गया और दूसरे नव्या के वक्ष स्थल से उसके हाथों का बचाव चला गया। नव्या की साँसें उसकी छाती को ऊपर नीचे कर रहीं थीं जिस से उसके स्तनों के ऊपर रखी चादर ऊपर नीचे खिसक रही थी। इस चादर की रगड़ से उसकी चूचियों में गुदगुदी हो रही थी और वे उभर कर खड़ी हो गई थीं। उसके वक्ष की रूप रेखा अब चादर पर स्पष्ट दिखाई दे रही थी। गुरूजी को यह दृश्य बहुत अच्छा लगा। masterji shishya sex story

गुरूजी ने अपने काम पांव की तरफ से आरम्भ किया। वे नव्या की छाती पर पड़ी चादर को नहीं छेड़ना चाहते थे। उन्होंने नव्या के पांव से लेकर जांघों तक की चादर उघाड़ दी और तेल की मालिश करने लगे। तलवे तो पहले ही हो चुके थे फिर भी उन्होंने तलवों पर कुछ समय बिताया क्योंकि वे नव्या को गुदगुदा कर उसकी उत्तेजना को कायम रखना चाहते थे।

तलवों के विभिन्न हिस्सों का संपर्क शरीर के विभिन्न अंगों से होता है और सही जगह दबाव डालने से कामेच्छा जागृत होती है। इसी आशा में वे उसके तलवों का मसाज कर रहे थे। नव्या को इसमें मज़ा आ रहा था। कुछ देर पहले उसकी कामुक भावनाओं पर लगा अंकुश मानो ढीला पड़ रहा था। गुरूजी की उंगलियाँ उसके शरीर में फिर से बिजली का करंट डाल रही थीं।

धीरे धीरे गुरूजी ने तलवों को छोड़ कर घुटनों के नीचे तक की टांगों को तेल लगाना शुरू किया। यह करने के लिए उन्होंने नव्या के घुटने ऊपर की तरफ मोड़ दिए। चादर पहले ही जाँघों तक उघड़ी हुई थी। घुटने मोड़ने से नव्या की योनि प्रत्यक्ष हो गई। नव्या ने तुंरत अपनी टाँगें जोड़ लीं। पर इस से क्या होता है !? उसकी योनि तो फिर भी गुरूजी को दिख रही थी हालाँकि उसके कपाट बिलकुल बंद थे। गुरूजी ने खिसक कर अपने आप को नव्या के और समीप कर लिया जिस से उनके हाथ नव्या की जांघों तक पहुँच सकें।

नव्या की साँसें और तेज़ हो गईं और उसने अपने दोनों हाथ अपनी आँखों पर और कस कर बांध लिए। गुरूजी ने नव्या के घुटनों से लेकर उसकी जांघों तक की मालिश शुरू की। वे उसकी जांघों की सब तरफ से मालिश कर रहे थे और उनके अंगूठे नव्या की योनि के बहुत नज़दीक तक भ्रमण कर रहे थे। नव्या को बहुत गुदगुदी हो रही थी और वह अपनी टाँगें इधर उधर हिलाने लगी। ऐसा करने से गुरूजी के अंगूठों को और आज़ादी का मौका मिल गया और वे उसकी योनि के द्वार तक पहुँचने लगे। नव्या ने शर्म से अपनी टांगें सीधी कर लीं और आधी सी करवट ले कर रुक गई।

उसने अपनी टाँगें भी जोर से भींच लीं। गुरूजी ने उसकी इस प्रतिक्रिया का सम्मान किया और कुछ देर तक कुछ नहीं किया। नव्या की प्रतिक्रिया उसके कुंवारेपन और अच्छे संस्कारों का प्रतीक था और यह गुरूजी को अच्छा लगा। उनकी नज़र में जो लड़की लज्जा नहीं करती उसके साथ सम्भोग में वह मज़ा नहीं आता। वे तो एक कमसिन, आकर्षक, गरीब, असहाय और कुंवारी लड़की का सेवन करने की तैयारी कर रहे थे और उन्हें लगता था वे मंजिल के काफी नज़दीक पहुँच गए हैं। masterji shishya sex story

थोड़े विराम के बाद उन्होंने नव्या को करवट से सीधा किया और बिना टांगें मोड़े उसकी मालिश करने लगे। उन्हें शायद नहीं पता था कि नव्या की योनि फिर से गीली हो चली थी और इसीलिए नव्या ने इसे छुपाने की कोशिश की थी। नव्या ने अपने होंट दांतों में दबा रखे थे और वह किसी तरह अपने आप को क़ाबू में रख रही थी जिससे उसके मुँह से कोई ऐसी आवाज़ न निकल जाए जिससे उसको मिल रहे असीम आनंद का भेद खुल जाए। गुरूजी ने स्थिति का समझते हुए नव्या की जांघों पर से ध्यान हटाया।

उन्होंने उसके पेट पर से चादर को ऊपर लपेट दिया और उसके पतले पेट पर तेल लगाने लगे। नव्या को लग रहा था मानो उसका पूरा शरीर ही कामाग्नि में लिप्त हो गया हो। गुरूजी जहाँ भी हाथ लगायें उसे कामुकता का आभास हो। यह आभास उसकी योनि को तर बतर करने में कसर नहीं छोड़ रहा था और नव्या को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे !!

उसे लगा थोड़ी ही देर में उसकी योनि के नीचे बिछी चादर गीली हो जायेगी। गुरूजी को शायद उसकी इस दशा का भ्रम था। कुछ तो वे उसकी योनि देख भी चुके थे और कुछ वे नव्या के शारीरिक संकेत भी पढ़ रहे थे। उन्हें पुराने अनुभव काम आ रहे थे।

नव्या के पेट पर हाथ फेरने में गुरूजी को बहुत मज़ा आ रहा था। इतनी पतली कमर और नरम त्वचा उनके हाथों को सुख दे रही थी। वे नाभि में अंगूठे को घुमाते और पेट के पूरे इलाके का निरीक्षण करते। उनकी आँखों के सामने नव्या की योनि के इर्द गिर्द थोड़े बहुत घुंघराले बाल थे जो योनि को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे। नव्या ने अपनी टाँगें कस कर जोड़ रखी थीं जिससे योनि ठीक से नहीं दिख रही थी पर फिर भी गुरूजी की नज़रों के सामने थी और उनकी नज़रें वहां से नहीं हट रही थीं। masterji shishya sex story

अब गुरूजी ने नव्या की छाती पर से चादर हटाते हुए उसके सिर पर डाल दी। अब वह कुछ नहीं देख सकती थी और उसके हाथ भी चादर के नीचे क़ैद हो गए थे। गुरूजी को यह व्यवस्था अच्छी लगी। इसकी उन्होंने योजना नहीं बनाईं थी। यह स्वतः ही हो गया था। गुरूजी को लगा भगवान् भी उसका साथ दे रहे हैं।

गुरूजी ने पहली बार नव्या के स्तनों को तसल्ली से देखा। यद्यपि वे इतने बड़े नहीं थे पर मनमोहक गोलनुमा आकार था और उनके उभार में एक आत्मविश्वास झलकता था। उनके शिखर पर कथ्थई रंग के सिंघासन पर गौरवमई चूचियां विराजमान थीं जो सिर उठाए आसमान को चुनौती दे रही थीं।

नव्या की आँखें तो ढकी थीं पर उसे अहसास था कि गुरूजी उसके नंगे शरीर को घूर रहे होंगे। यह सोच कर उसकी साँसें और तेज़ हो रही थीं उसका वक्ष स्थल खूब ज्वार भाटे ले रहा था। गुरूजी का मन तो उन चूचियों को मूंह में लेकर चूसने का कर रहा था पर आज मानो उनके लिए व्रत का दिन था। तेल हाथों में लगाकर उन्होंने नव्या के स्तनों को पहली बार छुआ। इस बार उन्हें बिजली का झटका सा लगा। इतने सुडौल, गठीले और नरम वक्ष उन्होंने अभी तक नहीं छुए थे। उनका स्पर्श पा कर स्तन और भी कड़क हो गए और चूचियां तन कर और कठोर हो गईं।

जब उनकी हथेली चूचियों पर से गुज़रती तो वे दबती नहीं बल्कि स्वाभिमान में उठी रहतीं। गुरूजी को स्वर्ग का अनुभव हो रहा था। इसी दौरान उन्हें एक और अनुभव हुआ जिसने उन्हें चौंका दिया, उनका लिंग अपनी मायूसी त्याग कर फिर से अंगडाई लेने की चेष्टा कर रहा था। गुरूजी को अत्यंत अचरज हुआ।

उन्होंने सोचा था कि दो बार के विस्फोट के बाद कम से कम १२ घंटे तक तो वह शांत रहेगा। पर आज कुछ और ही बात थी। उन्हें अपनी मर्दानगी पर गरूर होने लगा। चिंता इसलिए नहीं हुई क्योंकि नव्या का सिर ढका हुआ था और वह कुछ नहीं देख सकती थी। गुरूजी ने अपने लिंग को निकर में ही ठीक से व्यवस्थित किया जिस से उसके विकास में कोई बाधा न आये। masterji shishya sex story

जब तक नव्या की आँखें बंद थीं उन्हें अपने लंड की उजड्ड हरकत से कोई आपत्ति नहीं थी। वे एक बार फिर नव्या के पेट के ऊपर दोनों तरफ अपनी टांगें करके बैठ गए और उसकी नाभि से लेकर कन्धों तक मसाज करने लगे। इसमें उन्हें बहुत आनंद आ रहा था, खासकर जब उनके हाथ बोबों के ऊपर से जाते थे। कुछ देर बाद गुरूजी ने अपने आप को खिसका कर नीचे की ओर कर लिया और उसके घुटनों के करीब आसन जमा लिया। अपना वज़न उन्होंने अपनी टांगों पर ही रखा जिससे नव्या को थकान या तकलीफ़ न हो।

गुरूजी के घर से चोरों की तरह निकल कर घर जाते समय नव्या का दिल जोरों से धड़क रहा था। उसके मन में ग्लानि-भाव था। साथ ही साथ उसे ऐसा लग रहा था मानो उसने कोई चीज़ हासिल कर ली हो। गुरूजी को वशीभूत करने का उसे गर्व सा हो रहा था। अपने जिस्म के कई अंगों का अहसास उसे नए सिरे से होने लगा था। उसे नहीं पता था कि उसका शरीर उसे इतना सुख दे सकता है। पर मन में चोर होने के कारण वह वह भयभीत सी घर की ओर जल्दी जल्दी कदमों से जा रही थी।

जैसे किसी भूखे भेड़िये के मुँह से शिकार चुरा लिया हो, गुरूजी गुस्से और निराशा से भरे हुए दरवाज़े की तरफ बढ़े। उन्होंने सोच लिया था जो भी होगा, उसकी ख़ैर नहीं है।

“अरे भई, भरी दोपहरी में कौन आया है?” गुरूजी चिल्लाये। masterji shishya sex story

जवाब का इंतज़ार किये बिना उन्होंने दरवाजा खोल दिया और अनचाहे महमान का अनादर सहित स्वागत करने को तैयार हो गए। पर दरवाज़े पर नव्या की छोटी बहन अदिति को देखते ही उनका गुस्सा और चिड़चिड़ापन काफूर हो गया। अदिति हांफ रही थी।

“अरे बेटा, तुम? कैसे आना हुआ?”

“अन्दर आओ। सब ठीक तो है ना?” गुरूजी चिंतित हुए। उन्हें डर था कहीं उनका भांडा तो नहीं फूट गया….

अदिति ने हाँफते हाँफते कहा,”गुरूजी , पिताजी अचानक घर जल्दी आ गए। दीदी को घर में ना पा कर गुस्सा हो रहे हैं।”

गुरूजी ,”फिर क्या हुआ?”

अदिति,”मैंने कह दिया कि सहेली के साथ पढ़ने गई है, आती ही होगी।” masterji shishya sex story

गुरूजी ,”फिर?”

अदिति,”पिताजी ने पूछा कौन सहेली? तो मैंने कहा गुरूजी ने कमज़ोर बच्चों के लिए ट्यूशन लगाई है वहीं गई है अपनी सहेलियों के साथ।”

अदिति,”मैंने सोचा आपको बता दूं, हो सकता है पिताजी यहाँ पता करने आ जाएँ।”

गुरूजी ,”शाबाश बेटा, बहुत अच्छा किया !! तुम तो बहुत समझदार निकलीं। आओ तुम्हें मिठाई खिलाते हैं।” यह कहते हुए गुरूजी अदिति का हाथ खींच कर अन्दर ले जाने लगे।

अदिति,”नहीं गुरूजी , मिठाई अभी नहीं। मैं जल्दी में हूँ। दीदी कहाँ है?” अदिति की नज़रें नव्या को घर में ढूंढ रही थीं।

गुरूजी ,”वह तो अभी अभी घर गई है।”

अदिति,” कब? मैंने तो रास्ते में नहीं देखा…”

गुरूजी ,”हो सकता है उसने कोई और रास्ता लिया हो। जाने दो। तुम जल्दी से एक लड्डू खा लो।” masterji shishya sex story

गुरूजी ने अदिति से पूछा,”तुम चाहती हो ना कि दीदी के अच्छे नंबर आयें? हैं ना ?”

अदिति,”हाँ गुरूजी । क्यों? ”

गुरूजी ,”मैं तुम्हारी दीदी के लिए अलग से क्लास ले रहा हूँ। वह बहुत होनहार है। क्लास में फर्स्ट आएगी।”

अदिति,”अच्छा?”

गुरूजी ,”हाँ। पर बाकी लोगों को पता चलेगा तो मुश्किल होगी, है ना ?”

अदिति ने सिर हिला कर हामी भरी।

गुरूजी ,”तुम तो बहुत समझदार और प्यारी लड़की हो। घर में किसी को नहीं बताना कि दीदी यहाँ पर पढ़ने आती है। माँ और पिताजी को भी नहीं…. ठीक है?”

अदिति ने फिर सिर हिला दिया….. masterji shishya sex story

गुरूजी ,”और हाँ, नव्या को बोलना कल 11 बजे ज़रूर आ जाये। ठीक है? भूलोगी तो नहीं, ना ?”

अदिति,”ठीक है। बता दूँगी…। ”

गुरूजी ,”मेरी अच्छी बच्ची !! बाद में मैं तुम्हें भी अलग से पढ़ाया करूंगा।” यह कहते कहते गुरूजी अपनी किस्मत पर रश्क कर रहे थे। नव्या के बाद उन्हें अदिति के साथ खिलवाड़ का मौक़ा मिलेगा, यह सोच कर उनका मन प्रफुल्लित हो रहा था।

गुरूजी ,”तुम जल्दी से एक लड्डू खा लो !”

“बाद में खाऊँगी” बोलते हुए वह दौड़ गई।

अगले दिन गुरूजी 11 बजे का बेचैनी से इंतज़ार रहे थे। सुबह से ही उनका धैर्य कम हो रहा था। रह रह कर वे घड़ी की सूइयां देख रहे थे और उनकी धीमी चाल गुरूजी को विचलित कर रही थी। स्कूल की छुट्टी थी इसीलिये उन्होंने अदिति को ख़ास तौर से बोला था कि नव्या को आने के लिए बता दे। कहीं वह छुट्टी समझ कर छुट्टी न कर दे। वे जानते थे 10 से 4 बजे के बीच उसके माँ बाप दोनों ही काम पर होते हैं। masterji shishya sex story

और वे इस समय का पूरा पूरा लाभ उठाना चाहते थे। उन्होंने हल्का नाश्ता किया और पेट को हल्का ही रखा। इस बार उन्होंने तेल मालिश करने की और बाद में रति-क्रिया करने की ठीक से तैयारी कर ली। कमरे को साफ़ करके खूब सारी अगरबत्तियां जला दीं, ज़मीन पर गद्दा लगा कर एक साफ़ चादर उस पर बिछा दी। तेल को हल्का सा गर्म कर के दो कटोरियों में रख लिया। एक कटोरी सिरहाने की तरफ और एक पायदान की तरफ रख ली जिससे उसे सरकाना ना पड़े। साढ़े १० बजे वह नहा धो कर ताज़ा हो गए और साफ़ कुर्ता और लुंगी पहन ली। उन्होंने जान बूझ कर चड्डी नहीं पहनी।

उधर नव्या को जब अदिति ने गुरूजी का संदेशा दिया तो वह खुश भी हुई और उसके हृदय में एक अजीब सी कूक भी उठी। उसे यह तो पता चल गया था कि गुरूजी उसे क्या “पढ़ाने” वाले हैं। उसके गुप्तांगों में कल के अहसासों के स्मरण से एक बिजली सी लहर गई। उसने अपने हाव भाव पर काबू रखते हुए अदिति को ऐसे दर्शाया मानो कोई ख़ास बात नहीं है। बोली,”ठीक है…. देखती हूँ …। अगर घर का काम पूरा हो गया तो चली जाऊंगी।”

अदिति,” दीदी तुम काम की चिंता मत करो। छुटकी और मैं हैं ना …। हम सब संभाल लेंगे। तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो।”

उस बेचारी को क्या पता था कि नव्या को “काम” की ही चिंता तो सता रही थी। छुटकी, जिसका नाम दीप्ति था, अदिति से डेढ़ साल छोटी थी। तीनों बहनें मिल कर घर का काम संभालती थीं और माँ बाप रोज़गार जुटाने में रहते थे।

नव्या ,”तुम बाद में माँ बापू से शिकायत तो नहीं करोगे?” masterji shishya sex story

अदिति,”हम उन्हें बताएँगे भी नहीं कि तुम गुरूजी के पास पढ़ने गई हो। हमें मालूम है बापू नाराज़ होंगे…। यह हमारा राज़ रहेगा, ठीक है !!”

नव्या को अपना मार्ग साफ़ होता दिखा। बोली,”ठीक है, अगर तुम कहती हो तो चली जाती हूँ। ”

“पर तुम्हें भी हमारा एक काम करना होगा……” अदिति ने पासा फेंका।

“क्या ?”

“गुरूजी मुझे मिठाई देने वाले थे पर पिताजी के डर से मैंने नहीं ली। वापस आते वक़्त उन से मिठाई लेती आना।”

“ओह, बस इतनी सी बात…..। ठीक है, ले आऊँगी।” तुम ज़रा घर को और माँ बापू को संभाल लेना।”

दोनों बहनों ने साज़िश सी रच ली। छुटकी को कुछ नहीं मालूम था। दोनों ने उसे अँधेरे में रखना ही उचित समझा। बहुत बातूनी थी और उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता था। masterji shishya sex story

नव्या अब तैयारी में लग गई। घर का ज़रूरी काम जल्दी से निपटाने के बाद नहाने गई। उसके मन में संगीत फूट रहा था। वह नहाते वक़्त गाने गुनगुना रही थी। अपने जिस्म और गुप्तांगों को अच्छे से रगड़ कर साफ़ किया, बाल धोये और फिर साफ़ कपड़े पहने। उसे मालूम था मालिश होने वाली है सो चोली और चड्डी के ऊपर एक ढीला ब्लाऊज और स्कर्ट पहन ली। अहतियात के तौर पर स्कूल का बस्ता भी साथ ले लिया जब कि वह जानती थी इसकी कोई आवश्यकता नहीं होगी।

ठीक पौने ग्यारह बजे वह गुरूजी के घर के लिए चल दी।

नव्या सुनिश्चित समय पर गुरूजी के घर पहुँच गई। वे उसकी राह तो बाट ही रहे थे सो वह घंटी बजाती उसके पहले ही उन्होंने दरवाजा खोल दिया। एक किशोर लड़के की भांति, जो कि पहली बार किसी लड़की को मिल रहा हो, गुरूजी ने फ़ुर्ती से नव्या को बांह से पकड़ कर घर के अन्दर खींच लिया। दरवाजा बंद करने से पहले उन्होंने बाहर इधर उधर झाँक के यकीन किया कि किसी ने उसे अन्दर आते हुए तो नहीं देखा। masterji shishya sex story

जब कोई नहीं दिखा तो उन्होंने राहत की सांस ली। अब उन्होंने घर के दरवाज़े पर बाहर से ताला लगा दिया और पिछले दरवाज़े से अन्दर आ गए। उसे भी उन्होंने कुंडी लगा दी और घर के सारे खिड़की दरवाजों के परदे बंद कर लिए।नव्या को उन्होंने पानी पिलाया और सोफे पर बैठेने का इशारा करते हुए रसोई में चले गए।

अब तक दोनों में कोई बातचीत नहीं हुई थे। दोनों के मन में रहस्य, चोरी, कामुकता और डर का एक विचित्र मिश्रण हिंडोले ले रहा था। गुरूजी तो बिलकुल बच्चे बन गए थे। नव्या के चेहरे पर फिर भी एक शालीनता और आत्मविश्वास झलक रहा था। कल के मुकाबले आज वह मानसिक रूप से ज्यादा तैयार थी। उसके मन में डर कम और उत्सुकता ज़्यादा थी।

Masterji shishya sex story in hindi

गुरूजी रसोई से शरबत के दो ग्लास ले कर आये और नव्या की तरफ एक ग्लास बढ़ाते हुए दूसरे ग्लास से खुद घूँट लेने लगे। नव्या ने ग्लास ले लिया। गर्मी में चलकर आने में उसे प्यास भी लग गई थी। शरबत ख़त्म हो गया। दोनों ने कोई बातचीत नहीं की। दोनों को शायद बोलने के लिए कुछ सूझ नहीं रहा था। दोनों के मन में आगे जो होने वाला है उसकी शंकाएँ सर्वोपरि थीं।

एक अनुभवी गुरु और एक मासूम शिष्या के बीच एक सेक्सुअल तनाव का माहौल बना हुआ है, दोनों जानते है क्या होने वाला है. पर कैसे होने वाला है? जानिए इस sex hindi kahani के आखिरी भाग में- masterji shishya sex story

गुरूजी रसोई से शरबत के दो ग्लास ले कर आये और नव्या की तरफ एक ग्लास बढ़ाते हुए दूसरे ग्लास से खुद घूँट लेने लगे। नव्या ने ग्लास ले लिया। गर्मी में चलकर आने में उसे प्यास भी लग गई थी। शरबत ख़त्म हो गया। दोनों ने कोई बातचीत नहीं की। दोनों को शायद बोलने के लिए कुछ सूझ नहीं रहा था। दोनों के मन में आगे जो होने वाला है उसकी शंकाएँ सर्वोपरि थीं।

गुरूजी ने अंततः चुप्पी तोड़ी,”कैसी हो ?”

नव्या सिर नीचा कर के चुप रही। masterji shishya sex story

“मालिश के लिए तैयार हो?”

नव्या कुछ नहीं बोली।

“मैं थोड़ी देर में आता हूँ, तुम मालिश के लिए तैयार होकर लेट जाओ।” यह कहकर गुरूजी बाथरूम में चले गए।

नव्या ने अपने कपड़े उतार कर सोफे पर करीने से रख दिए और चड्डी और चोली पहने ज़मीन पर गद्दे पर लेट गई और चादर से अपने आप को ढक लिया। अपने दोनों हाथ चादर के बाहर निकाल कर दोनों तरफ रख लिए।

गुरूजी , वापस आये तो बोले,” अरे तुम तो सीधी लेटी हो !! चलो उल्टी हो जाओ।” masterji shishya sex story

नव्या चादर के अन्दर ही अन्दर पलटने की नाकाम कोशिश करने लगी तो गुरूजी ने बोला,”नव्या , अब मुझसे क्या शर्माना। चलो जल्दी से पलट जाओ।”

नव्या ने चादर एक तरफ करके करवट ले ली और उल्टी लेट गई। लेट कर चादर ऊपर लेने का प्रयास करने लगी तो गुरूजी ने चादर परे करते हुए कहा,”अब इसकी कोई ज़रुरत नहीं है। ” masterji shishya sex story

“और इनकी भी कोई ज़रुरत नहीं है।” कहते हुए उन्होंने नव्या की चड्डी नीचे खींच दी और टांगें उठा कर अलग कर दी। फिर चोली का हुक खोल कर नव्या के पेट के नीचे हाथ डाल कर उसे ऊपर उठा लिया और चोली खींच कर हटा दी। अब नव्या बिलकुल नंगी हो गई थी। हालाँकि वह उल्टी लेटी हुई थी, उसने अपने हाथों से अपनी आँखें बंद कर लीं उसके नितम्बों की मांसपेशियाँ स्वतः ही कस गईं।गुरूजी को नव्या की यही अदाएं लुभाती थीं। उन्होंने उसकी पीठ और सिर पर हाथ फेर कर उसका हौसला बढ़ाया और उसकी मालिश करने में जुट गए।

गर्म तेल की मालिश से नव्या को बहुत चैन मिल रहा था। कल के मुकाबले आज गुरूजी ज़्यादा निश्चिंत हो कर हाथ चला रहे थे। उन्हें नव्या के भयभीत हो कर भाग जाने का डर नहीं था क्योंकि आज तो वह सब कुछ जानते हुए भी अपने आप उनके घर आई थी। मतलब, उसे भी इस में मज़ा आ रहा होगा। गुरूजी ने सही अनुमान लगाया। masterji shishya sex story

थोड़ी देर के बाद गुरूजी ने नव्या के ऊपर घुड़सवारी सा आसन जमा लिया और अपना कुर्ता उतार दिया। अब वे सिर्फ लुंगी पहने हुए थे। लुंगी को उन्होंने घुटनों तक चढ़ा लिया था अपर उनका लिंग अभी भी लुंगी में छिपा था।

इस अवस्था में उन्होंने नव्या के पिछले शरीर पर ऊपर से नीचे, यानि कन्धों से कूल्हों तक मालिश शुरू की। जब वे आगे की तरफ जाते तो जान बूझ कर अपनी लुंगी से ढके लिंग को नव्या के चूतड़ों से छुला देते। कपड़े के छूने से नव्या को जहाँ गुलगुली होती, गुरूजी के लंड की रगड़ से उसे वहीं रोमांच भी होता। गुरूजी को तो अच्छा लग ही रहा था, नव्या को भी मज़ा आ रहा था।

गुरूजी ने अपने आसन को इस तरह तय किया कि जब वे आगे को हाथ ले जाएँ, उनका लंड नव्या के चूतड़ों के बीच में, किसी हुक की मानिंद, लग जाये और उन्हें और आगे जाने से रोके। एक दो ऐसे वारों के बाद नव्या ने अपनी टाँगें स्वयं थोड़ी खोल दीं जिससे उनका लंड अब नव्या की गांड के छेद पर आकर रुकने लगा। जब ऐसा होता, नव्या को सरसराहट सी होती और उसके रोंगटे से खड़े होने लगते। उधर गुरूजी को नव्या की इस व्यवस्था से बड़ा प्रोत्साहन मिला और उन्होंने जोश में आते हुए अपनी लुंगी उतार फेंकी। masterji shishya sex story

अब वे दोनों पूरे नंगे थे। गुरूजी ने नव्या के हाथ उसकी आँखों पर से हटा कर बगल में कर दिए। अब वह एक तरफ से कुछ कुछ देख सकती थी। गुरूजी ने अपने वार जारी रखे जिसके फलस्वरूप उनका लंड तन कर प्रबल और विशाल हो गया और नव्या की गांड पर व्यापक प्रभाव डालने लगा।

गुरूजी आपे से बाहर नहीं होना चाहते थे सो उन्होंने झट से अपने आप को नीचे की तरफ सरका लिया और नव्या की टांगों पर ध्यान देने लगे। उनके हाथ नव्या की जांघों के बीच की दरार में खजाने को टटोलने लगे। नव्या से गुदगुदी सहन नहीं हो रही थी। वह हिलडुल कर बचाव करने लगी पर गुरूजी के हाथों से बच नहीं पा रही थी। जब कुछ नहीं कर पाई तो करवट ले कर सीधी हो गई। अपनी टाँगें और आँखें बंद कर लीं और हाथों से स्तन ढक लिए। गुरूजी इसी फिराक़ में थे। उन्होंने नव्या के पेट, पर हाथ फेरते हुए नव्या के हाथ उसके वक्ष से हटा दिए। masterji shishya sex story

तेल लगा कर अब वे उसकी छाती की मालिश कर रहे थे। नव्या के उरोज दमदार और मांसल लग रहे थे। उसकी चूचियां उठी हुई थीं और वह जल्दी जल्दी साँसें ले रही थी। गुरूजी का लंड नव्या की नाभि के ऊपर था और कभी कभी उनके लटके अंडकोष उसकी योनि के ऊपरी भाग को लग जाते। नव्या बेचैन हो रही थी। उसमें वासना की अग्नि प्रज्वलित हो चुकी थी और उसकी योनि प्रकृति की अपार गुरुत्वाकर्षण ताक़त से मजबूर गुरूजी के लिंग के लिए तृषित हो रही थी। सहसा उसकी योनि से द्रव्य पदार्थ रिसने लगा।

नव्या की टांगें अपने आप खुल गईं और गुरूजी के लिंग के अभिवादन को तत्पर हो गईं। गुरूजी को समझ आ रहा था। पर वे जल्दी में नहीं थे। वे न केवल अपने लिए इस अनमोल अवसर को यादगार बनाना चाहते थे वे नव्या के लिए भी उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण को ज़्यादा से ज़्यादा आनंददायक बनाना चाहते थे। वे उसकी लालसा और बढ़ाना चाहते थे।

उन्होंने आगे खिसक कर नव्या की आँखों पर पुच्ची की और फिर एक एक करके उसके चेहरे के हर हिस्से पर प्यार किया। जब तक उनके लब नव्या के अधरों को लगे, नव्या मचल उठी थी और उसने पहली बार कोई हरकत करते हुए गुरूजी को अपनी बाँहों में ले लिया और ज़ोर से उनका चुम्बन कर लिया। जीवन में पहली बार उसने ऐसा किया था। ज़ाहिर था उसे इस कला में बहुत कुछ सीखना था। masterji shishya sex story

गुरूजी ने उसे चुम्बन सिखाने के लिए उसके मुँह में अपनी ज़ुबान डाली और उसके मुँह का निरीक्षण करने लगे। थोड़ी देर बाद, एक अच्छी शिष्या की तरह उसने भी अपनी जीभ गुरूजी के मुख में डाल कर इधर उधर टटोलना शुरू किया।

अब गुरूजी नव्या के ऊपर लेट गए थे और उनका सीना नव्या के भरे और उभरे हुए उरोजों को दबा कर सपाट करने का बेकार प्रयत्न कर रहा था। नव्या की चूचियां गुरूजी के सीने में सींग मार रहीं थीं। गुरूजी ने कुछ ही देर में नव्या को चुम्बन कला में महारत दिला दी। अब वह जीभ चूसना, जीभ लड़ाना व मुँह के अन्दर के हिस्सों की जीभ से तहकीकात करने में निपुण लग रही थी। masterji shishya sex story

गुरूजी ने अगले पाठ की तरफ बढ़ते हुए अपने आप को नीचे सरका लिया और नव्या के स्तनों को प्यार करने लगे। उसके बोबों की परिधि को अपनी जीभ से रेखांकित करके उन्होंने दोनों स्तनों के हर पहलू को अच्छे तरह से मुँह से तराशा। फिर जिस तरह कुत्ते का पिल्ला तश्तरी से दूध पीता है वे उसकी चूचियां लपलपाने लगे। गुदगुदी के कारण नव्या लेटी लेटी उछलने लगी जिससे उसके स्तन गुरूजी के मुँह से और भी टकराने लगे। थूक से बोबे गीले हो गए थे और इस ठंडक से उसे सिरहन सी हो रही थी।

अब गुरूजी ने थोड़ा और नीचे की ओर रुख किया। उसके पेट और नाभि को चाटने लगे। नव्या कसमसा रही थी और गुलगुली से बचने की कोशिश कर रही थी। कभी कभी अपने हाथों से उनके सिर को रोकने की चेष्टा भी करती थी पर गुरूजी उसके हाथों को प्यार से अलग करके दबोच लेते थे। masterji shishya sex story

अब उनका मुँह नव्या की योनि के बहुत करीब आ गया था। उसकी योनि पानी के बाहर तड़पती मछली के होटों की तरह लपलपा रही थी। गुरूजी ने अपनी जीभ से उसकी योनि के मुकुट मटर की परिक्रमा लगाई तो नव्या एक फ़ुट उछल पड़ीं मानो घोड़ी दुलत्ती मार रही हो।

गुरूजी ने घोड़ी को वश में करने के लिए अपनी पकड़ मज़बूत की और जीभ से उसके भग-शिश्न को चाटने लगे। नव्या पूरी ताक़त से अपने आप को गुरूजी की गिरफ्त से छुटाने का प्रयास कर रही थी। गुरूजी ने रहम करते हुए पकड़ ढीली की और अपने जीभ रूपी खोज उपकरण को नव्या की योनि के ऊपर लगा दिया। नव्या की दशा आसमान से गिरे खजूर में अटके सी हो रही थी।

उसका बदन छटपटा रहा था। उसकी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी।

गुरूजी ने कुछ देर योनि से छेड़छाड़ के बाद अपनी जीभ योनि के अन्दर डाल दी। बस, नव्या का संयम टूट गया और वह आनंद से कराहने लगी। masterji shishya sex story

गुरूजी जान बूझ कर उसकी योनि का रस पान करना चाहते थे जिससे बाद में वे नव्या से अपने लिंग का मुखाभिगम आसानी से करवा पायें। जो सुख वे नव्या को दे रहे हैं, सूद समेत वापस लेना चाहते थे।

नव्या की योनि तो पहले से ही भीगी हुई थी, गुरूजी की लार से और भी गीली हो गई। अब गुरूजी को लगा कि वह घड़ी आ गई है जिसकी उन्हें इतनी देर से प्रतीक्षा थी।

उन्होंने ने नव्या से पूछा,”कैसा लग रहा है?” masterji shishya sex story

नव्या क्या कहती, चुप रही।

गुरूजी,”भई चुप रहने से मुझे क्या पता चलेगा…। अच्छा, यह बताओ कोई तकलीफ तो नहीं हो रही?”

नव्या,”जी नहीं !”

गुरूजी,”चलो अच्छा है, तकलीफ नहीं हो रही। तो अच्छा लग रहा है या नहीं?” masterji shishya sex story

नव्या चुप रही और अपनी आँखें ढक लीं।

गुरूजी,”तुम तो बहुत शरमा रही हो। शरमाने से काम नहीं चलेगा। मैं इतनी मेहनत कर रहा हूँ, यह तो बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं?”

यह पूछते वक़्त गुरूजी ने अपना लंड नव्या की चूत से सटा दिया और हल्का हल्का हिलाने लगे। उनके हाथ नव्या के पेट और उरोजों पर घूम रहे थे।

“जी, मज़ा आ रहा है।” नव्या ने सच उगल दिया।

गुरूजी,”तुम बहुत अच्छी लड़की हो। तुम चाहो तो इससे भी ज़्यादा मज़ा लूट सकती हो….। ”

नव्या चुप रही पर उसका रोम रोम जो कह रहा था वह गुरूजी को साफ़ सुनाई दे रहा था। फिर भी वे उसके मुँह से सुनना चाहते थे।

गुरूजी,”क्या कहती हो?” masterji shishya sex story

“जैसा आप ठीक समझें।” नव्या ने लाज शर्म त्यागते हुए कह ही दिया।

गुरूजी,”मैं तो इसे ठीक समझता ही हूँ पर तुम्हारी सहमति भी तो जरूरी है। बोलो और मज़े लेना चाहती हो?”

नव्या ने हाँ मैं सिर हिला दिया।

गुरूजी,”ऐसे नहीं। जो भी चाहती हो बोल कर बताओ !”

नव्या,”जी, और मज़े लेना चाहती हूँ।”

गुरूजी,” शाबाश। हो सकता है इसमें शुरू में थोड़ी पीड़ा हो। बोलो मंज़ूर है ?” masterji shishya sex story

नव्या,”जी मंज़ूर है।”

गुरूजी ने अपना लंड नव्या के योनि द्वार पर लगा ही रखा था। जैसे ही उसने अपनी मंजूरी दी, उन्होंने हल्का सा धक्का लगाया। चूंकि नव्या की चूत पूरी तरह गीली थी और वह मानसिक व शारीरिक रूप से पूर्णतया उत्तेजित थी, गुरूजी का औसत माप का लिंग उसकी तंग योनि में थोड़ा घुस गया। नव्या के मुँह से एक हिचकी सी निकली और उसने पास रखे गुरूजी के बाजुओं को कस कर पकड़ लिया।

गुरूजी उसे कम से कम दर्द देकर उसका कुंवारापन लूटना चाहते थे। गुरूजी ने आश्वासन के तौर पर लंड बाहर निकाला। नव्या की पकड़ थोड़ी ढीली हुई और उसने एक लम्बी सांस छोड़ी। जैसे ही नव्या ने सांस छोड़ी, गुरूजी ने एक और वार किया। इस बार लंड थोड़ा और अन्दर गया पर नव्या की कुंवारी योनि को नहीं भेद पाया।

उसकी झिल्ली पहरेदार की तरह उनके लंड का रास्ता रोके खड़ी थी। नव्या को इतना अचम्भा नहीं हुआ जितना पहली बार हुआ था फिर भी शायद वह वार के लिए तैयार नहीं थी। उसके मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई। गुरूजी ने फिर से लंड बाहर निकाल लिया पर योनिद्वार पर ही रखा। masterji shishya sex story

गुरूजी ने उसके चूतड़ों को सहलाया और घुटनों पर पुच्ची की। हालाँकि वे उसे कम से कम दर्द देना चाहते थे पर वे जानते थे कि कुंवारेपन की झिल्ली कई बार कठोर होती है और आसानी से नहीं टूटती। शायद नव्या की झिल्ली भी ऐसी ही थी। वे उसका ध्यान बँटा कर अचानक वार करना चाहते थे जिससे उसे कम से कम दर्द हो। जैसे डॉक्टर जब बच्चों को इंजेक्शन लगता है तो इधर उधर की बातों में लगा कर झट से सुई अन्दर कर देता है। नहीं तो बच्चे बहुत आनाकानी करते हैं और रोते हैं।

गुरूजी,”नव्या, तुम्हारा जन्मदिन कब है?”

“जी, २६ अगस्त को।”

“अच्छा, जन्मदिन कैसे मनाते हो ?”

“जी, कुछ ख़ास नहीं। मंदिर जाते हैं, पिताजी मिठाई लाते हैं। कभी कभी नए कपड़े भी मिल जाते हैं !”

गुरूजी,”तुम यहाँ पर कितने सालों से हो ?”

यह सवालात करते वक़्त गुरूजी अपने लंड से उसके योनिद्वार पर लगातार धीरे धीरे दस्तक दे रहे थे जिससे एक तो लंड कड़क रहे और दूसरा उनका निशाना न बिगड़े। masterji shishya sex story

“जी, करीब पांच साल से।”

“तुम्हारे कितने भाई बहन हैं?”

“जी, हम तीन बहनें हैं। भाई कोई नहीं है!”

“ओह, तो भाई की कमी खलती होगी !” masterji shishya sex story

“जी”

“कोई लड़का दोस्त है तुम्हारा ?”

“जी नहीं” नव्या ने ज़ोर से कहा। मानो ऐसा होना गलत बात हो।

“इसमें कोई गलत बात क्या है। हर लड़की के जीवन में कोई न कोई लड़का तो होना ही चाहिए !”

“किसलिए ?”

“किस लिए क्या ? किस करने के लिए और क्या !! आज तुम्हें चुम्मी में मज़ा नहीं आया क्या ?”

“जी आया था !”

गुरूजी ने अपने लंड के धक्कों का माप थोड़ा बढ़ाया। masterji shishya sex story

“क्या तुम लड़की को ऐसी चुम्मी देना चाहोगी?”

“ना ना ..। कभी नहीं !”

“तो फिर लड़का होना चाहिए ना ?”

“जी”

“अगर कोई और नहीं है तो मुझे ही अपना दोस्त समझ लो, ठीक ?” masterji shishya sex story

“जी ठीक”

उसके यह कहते ही गुरूजी ने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उनका लंड इस बार नव्या की झिल्ली के विरोध को पछाड़ते हुए काफी अन्दर चला गया।

नव्या बातों में लगी थी और गुरूजी की योजना नहीं जानती थी। इस अचानक आक्रमण से हक्की बक्की रह गई। उसकी योनि में एक तीव्र दर्द हुआ और उसको कुछ गर्म द्रव्य के बहने का अहसास हुआ। उसके मुँह से ज़ोर की चीख निकली और उसने गुरूजी के हाथ ज़ोर से जकड़ लिए।

गुरूजी थोड़ी देर रुके रहे। जब अचानक हुए दर्द का असर कुछ कम हुआ तो उन्होंने कहा,”मैंने कहा था थोड़ी पीड़ा होगी। बस अब नहीं होगी। यह दर्द तो तुम्हें कभी न कभी सहना ही था …। हर लड़की को सहना पड़ता है।”

नव्या कुछ नहीं बोली। masterji shishya sex story

गुरूजी का काम अभी पूरा नहीं हुआ था उनका लंड पूरी तरह नव्या में समावेश नहीं हुआ था। बड़े धीरज के साथ उन्होंने फिर से लंड की हरकत शुरू की। वे नव्या के शरीर पर चुम्मियां भी बरसा रहे थे और उसके चूत मटर के चारों ओर उंगली से हल्का दबाव भी डाल रहे थे। नव्या को दर्द हो रहा था और वह उसे सहन कर रही थी। जब कि दर्द उसकी योनि के अन्दर हो रहा था उसके बाक़ी जिस्म में एक नया सा सुख फैल रहा था। उसको योनि दर्द का मुआवज़ा बाक़ी जगह के सुख से मिल रहा था। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ।

गुरूजी,”अब कैसा लग रहा है ? तुम कहो तो बंद करुँ ?”

नव्या ने आँखों और सिर के इशारे से बताया वह ठीक है।

गुरूजी,”ठीक है। कभी भी दर्द सहन न हो तो मुझे बता देना। इसमें तुम्हें भी मज़ा आना चाहिए। ”

नव्या,”जी बता दूंगी”

अब गुरूजी ने जितना लंड अन्दर गया था उतनी दूरी के धक्के ही लगाने शुरू किये। नव्या को कामोत्तेजित रखने के लिए उसके संवेदनशील अंगों को सहलाते रहे और उसकी खूबसूरती की प्रशंसा करते रहे। नव्या धीरे धीरे उनके क्रिया-तंत्र से प्रभावित होने लगी और दर्द की अवहेलना करते हुए उनका साथ देने लगी।

नव्या के उत्साह से गुरूजी ने अपना ज़ोर बढ़ाया और अपने धक्कों में उन्नति लाते हुए नव्या की योनि के और भीतर प्रवेश में जुट गए। masterji shishya sex story

धैर्य और विश्वास के साथ हर नए धक्के में वे थोड़ी और नव्या कर रहे थे। नव्या भी उनकी इस सावधानी से खुश थी। उसे महसूस हो रहा था कि गुरूजी उसका ध्यान अपनी खुशी की तुलना में ज़्यादा रख रहे हैं। उसके मन में गुरूजी के प्रति प्यार उमड़ गया और उसने ऊपर उठकर उनके मुँह को चूम लिया। गुरूजी इस पुरस्कार के प्रबल दावेदार थे। उन्होंने भी उसके होटों पर चुम्मी कर दी और दोनों मुस्करा दिए।

गुरूजी ने अब अपना पौरुष दिखाना शुरू किया। अपने लंड से नव्या के योनि दुर्ग पर निर्णायक फतह पाने के लिए उन्होंने युद्धघोष कर दिया। उनका दंड नव्या की गुफा में अग्रसर हो रहा था। हर बार उनका लट्ठ पूरा बाहर आता और पूरे वेग से अन्दर प्रविष्ट होता। हर प्रहार में पिछली बार के मुकाबले ज़्यादा अन्दर जा रहा था।

आम तौर पर तो इतनी देर में उनका लंड पूर्णतया घर कर गया होता पर नव्या की नवेली चूत अत्यधिक तंग थी और गुरूजी के लंड को नितांत घर्षण प्रदान कर रही थी। उनके आनंद की चरम सीमा नहीं थी। वे इस उन्माद का लम्बे समय तक उपभोग करना चाहते थे इसलिए उन्हें कोई जल्दी नहीं थी। masterji shishya sex story

उधर नव्या भी गुरूजी के धैर्य युक्त रवैये से संतुष्ट थी और सम्भोग का आनंद उठा रही थे। अनायास ही उसके मुँह से किलकारियां निकलने लगीं। कभी कराहती कभी आहें भरती तो कभी कूकती। उसके इस संगीत से गुरूजी का आत्मविश्वास बढ़ रहा था और वे अपने मैथुन वेग में विविधता ला रहे थे। चार पांच छोटे वार के बाद एक दो लम्बे वार करते जिनमें उनका लंड योनि से पूरा बाहर आ कर फिर से पूरा अन्दर जाता था। वार की गति में भी बदलाव लाते …। कभी धीरे धीरे और कभी तेज़ तेज़।

इस परिवर्तन भरे क्रम से नव्या की उत्सुकता बढ़ रही थी। उसे यह नहीं पता चल रहा था कि आगे कैसा वार होगा !! गुरूजी का आत्म नियंत्रण अब अपनी सीमा के समीप पहुँच रहा था। बहुत देर से वे अपने आप को संभाले हुए थे। वे अपने स्खलन के पहले नव्या को चरमोत्कर्ष तक पहुँचाना चाहते थे। इस लक्ष्य से उन्होंने नव्या की भग-शिश्न (योनि मटर) को सुलगाना शुरू किया।

कहते हैं यह भाग लड़की के शरीर का इतना संवेदनशील हिस्सा है कि इसको कभी पकड़ना, मसलना या सहलाना नहीं चाहिए। सिर्फ इसके इर्द गिर्द उंगली से लड़की को छेड़ना चाहिए। उसकी कामुकता को भड़काना चाहिए । अगर सीधे सीधे उसकी मटर को छुएंगे तो वह शायद सह नहीं पाए और उसकी कामाग्नि भड़कने के बजाय बुझने लगे…. masterji shishya sex story

गुरूजी को यह सब पता था। वे सुनियोजित तरीके से नव्या की वासना रूपी आग में मटर की छेड़छाड़ से मानो घी डाल रहे थे। नव्या घी पड़ते ही प्रज्वलित हो गई और नागिन की तरह गुरूजी के बीन रूपी लंड के सामने डोलने लगी। उसके मुँह से अद्भुत आवाजें आने लगीं। उसने अपनी टांगों से गुरूजी की कमर को घेर लिया और उनके लिंग-योनि यातायात को और प्रघाढ़ बनाने में मदद करने लगी। उसने अपनी मुंदी आँखें खोल लीं और गुरूजी को आदर और प्यार के प्रभावशाली मिश्रण से देखने लगी।

गुरूजी की आँखें आसमान की तरफ थीं और वे भुजंगासन में नव्या को चोद रहे थे। उनकी साँसें तेज़ हो रहीं थीं। माथे पर पसीने की कुछ बूँदें छलक आईं थीं। वे एक निश्चित लय और ताल के साथ निरंतर ऊपर नीचे हो रहे थे। नव्या उन्हें देख कर आत्म विभोर हो रही थी। उसे गुरूजी पर अपना वशीकरण साफ़ दिख रहा था। उसने फिर से आँखें मूँद लीं और गुरूजी की लय से लय मिला कर धक्कम पेल करने लगी। masterji shishya sex story

अब उसके शरीर में एक तूफ़ान उत्पन्न होने लगा। उसे लगा मानो पूरा शरीर संवेदना से भर गया है। वह भौतिक सुख की सीढ़ीयों पर ऊपर को चली जा रही थी। उसमें उन्माद का नशा पनपने लगा। उसे लगा वह बेहोश हो जायेगी। गुरूजी अपनी लय में लगे हुए थे। नव्या का चैतन्य शरीर मोक्ष प्राप्ति की तरफ बढ़ रहा था।

फिर अचानक उसके गर्भ की गहराई में एक विस्फोट सा हुआ और वह थरथरा गई उसका जिस्म अकड़ कर उठा और धम्म से बिस्तर पर गिर गया। वह मूर्छित सी पड़ गई। उसकी योनि से एक धारा सी फूटी जिसने गुरूजी के लंड को नहला दिया। उनका गीला लंड और भी चपल हो गया और चूत के अन्दर बाहर आसानी से फिसलने लगा।

नव्या के कामोन्माद को देख कर गुरूजी का नियंत्रण भी टूट गया और उन्होंने एक संपूर्ण वार के साथ अपनी मोक्ष प्राप्ति कर ली। उनकी तृप्त आत्मा से एक सुखद चीत्कार निकली जिसने नव्या की योगनिद्रा को भंग कर दिया। उनके लिंग से एक गाढ़ा, दमदार और ओजस्वी वीर्य प्रपात छूटा जो उन्होंने नव्या के पेट और वक्ष स्थल पर उंडेल दिया। फिर थक कर खुद भी उस पर गिर गए। masterji shishya sex story

नव्या ने उनको अपनी बाँहों में भर लिया। नव्या और गुरूजी के शरीर उनके वीर्य रूपी गौंद से मानो चिपक से गए और वे न जाने कब तक यूँ ही लेटे रहे।

एक युग के बाद दोनों उठने को हुए तो पता चला की वीर्य गौंद से वे वाकई चिपक गए हैं। अलग होने की कोशिश में गुरूजी के सीने के बाल खिंच रहे थे और कुछ टूट कर नव्या के वक्ष पर लिस गए थे। नव्या को अचानक शर्म सी आने लगी और वह अपने आप को छुड़ा कर अपने कपड़े लेकर गुसलखाने की ओर भाग गई। वह नहा कर बाहर आई तो गुरूजी ने उसको एक बार फिर से आलिंगनबद्ध कर लिया और कृतज्ञ नज़रों से शुक्रिया देने लगे। नव्या ने उनका गाल चूम कर उनका धन्यवाद किया और घर जाने के लिए निकलने लगी। masterji shishya sex story

गुरूजी ने उसे पिछ्वाड़े से बाहर जाने का रास्ता बताया। वह जाने ही वाली थी कि उसे याद आया और बोली,”गुरूजी, आप अदिति को कोई मिठाई देने वाले थे। उस समय तो वह जल्दी में थी। कहो तो मैं ले जाऊं। मेरी बहनें खुश हो जायेंगी !”

गुरूजी एक ही दिन में तीन लड़कियों को खुश करने का मौका नहीं गवांना चाहते थे सो झट से बोले,”हाँ हाँ, क्यों नहीं। तुम पूरा डब्बा ही ले जाओ।” अब मुझे मिठाई की ज़रुरत नहीं रही। मेरी आत्मा तुम्हारे होंटों का रस पी कर हमेशा के लिए मीठी हो गई है।”

यह कहते हुए उन्होंने नव्या को मिठाई का डब्बा पकड़ा दिया। masterji shishya sex story

फिर उसकी आँखों में आँखें डाल कर बोले,”कल आओगी तो आज का मज़ा भूल जाओगी। कल एक विशेष पाठ पढ़ाना है तुम्हें। बोलो आओगी ना ? ”

“जी पूरी कोशिश करूंगी !” अब तो नव्या को रति सुख का चस्का लग गया था। लड़कियों को ख़ास तौर से इस चस्के का नशा बहुत गहरा लगता है !!!

गुरूजी ने पहले घर के बाहर जा कर मुआइना कर लिया कि कहीं कोई है तो नहीं और फिर नव्या को घर जाने की आज्ञा दे दी।

नव्या अपनी सूजी हुई योनि लिए अपने घर को चल दी। masterji shishya sex story

———–समाप्त———–

गुरूजी ने उस दिन के बाद नव्या की खूब बजाई. अब नव्या को दर्द नहीं होता, खूब उछल उछल के चुदवाती है. कुछ समय बाद गुरूजी ने उसकी छोटी बहन का भी मुहूर्त किया. पर वो sex hindi kahani फिर कभी..

इसके बाद तो बस मैं हर तरह से सेक्स का मजा लेने लगी। तो दोस्तों, ये Hindi sex stories यहीं ख़त्म होती है..

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