ससुर बहु की पिपासा

ससुर जी रोज़ मेरी लेते थे, और क्यूँ न ले. ऐसा नामर्द बेटा पैदा किया है तो भरपाई तो करनी पड़ेगी न.. पर ससुर जी ने आज तो हद कर दी.. एक शानदार sasur bahu ki pipasa bahu porn story पढ़िए..

बहु तुमने क्या साफ़ की?”

“धीरे बोलिए पिताजी, चीकू सुन लेगा. पूरी हजामत कर दी, एक बाल नहीं छोड़ा.” ऐसा फुसफुसा कर कामिनी कमरे के कोने में खेलते हुए अपने बेटे चीकू को पढ़ाने लगी.

एक कमरे की खोली में रहते वागले परिवार के सदस्य किसी तरहं जीवन निर्वाह कर रहे थे. विनोद वागले दफ्तर में पियोन का काम करता था और रात को अक्सर शराब के नशे में आता था. उस रात भी वह नशे में धुत आया और खाना खा कर फर्श पर बिछे बिस्तर पर ढेर हो गया. विनोद के पिता साथ रखी खटाई पर लेट गए. कामिनी बत्ती बुझा पति और बच्चे के साथ सो गई.

खिड़की से आती बिजली के खम्बे की रौशनी कमरे को उजागर कर रही थी. कामिनी और उसके ससुर जगे हुए एक दुसरे को देख रहे थे. खटाई की ऊंचाई पर ससुर करवट लिए अपने पजामे से ढके गुप्तांग सहला रहे थे. फर्श पर पुत्र और पोते के साथ लेटी कामिनी से धीमी आवाज़ में पूछा, “अब तो दिखा दो बहु.” sasur bahu ki pipasa

कामिनी ने आहिस्ता से अपना साड़ी व पेटीकोट उठाया और गोश्तदार जांघें फैला दी. पैंटी तो पहनी ही नहीं थी. बेशर्म बहु अपनी नंगी बुर ससुर को दिखाने लगी. खाट पर लेटे ससुर ने तुरंत अपना पजामा खोल दिया और अपने पांच- इंच खड़े हुए लिंग को हिलाने लगे. कामिनी ने अपनी चूत के सारे बाल ससुर के आदेश पर दोपहर में शेव कर दिए थे. फैली हुई मांसल जाँघों के बीच से झांकती सफा-चट योनी ससुर के बुढ़ापे को जवान कर रही थी. ससुर खाट से उठ कर फर्श पर आ गए.

“पिताजी थोड़ी देर और रुकिए, चीकू कहीं जग न जाए. ये तो खर्राटे मार कर सो रहे हैं पर चीकू की नींद अभी कच्ची है.” कामिनी धीरे से बोली.

कामिनी चूत की फांकें खोल गीली सुराख़ प्रदर्शित कर रही थी. पायल उसके सुन्दर पैरों पर खनक रही थी. बुर दिखाती कामिनी ससुर के उठे लंड को निहारते हुए लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी. बहु के गुप्तांग पे ससुर का पूरा ध्यान केन्द्रित था.

“आइये पिता जी, आज मुझ पर उलटे चढिये.” कामिनी ने साड़ी-पेटीकोट पेट के ऊपर खींच कर अपना निचला बदन पूर्णतया नग्न कर दिया. ससुर ने अपना पजामा उतार कर कामिनी के मुख पर अपना लौड़ा सिधाया और उस पर उलटे लेट गए. फिर उसकी मांसल जांघों के बीच अपना मुख धर दिया. 69 मुद्रा में कामिनी अपने ससुर की लुल्ली चूसने लगी और ससुर अपनी बहु की चूत लपक-लपक कर चाटने लगे. विनोद और चीकू साथ गहरी नींद में सो रहे थे.

“बहु झांटों के बिना युवा लड़की जैसी बुर लग रही है तुम्हारी.” चाटना रोक कर ससुर मुड कर फुसफुसाए. sasur bahu ki pipasa

“आह…आह… आप ही के लिए गंजी करी है पिताजी. चुपचाप चाटिये, कहीं ये दोनों उठ न जाएँ … आह… आह…” कामिनी ससुर के कठोर लौड़े की चुस्की लेते हुए मतवाली हो रही थी.

विनोद वागले खांसने लगा, “ए कामिनी पानी पिलाओ.” खांसते खांसते लेटा हुआ विनोद उठ कर बैठ गया. अब तक ससुर तेज़ी से उठ खाट पर वापस लेट गय थे और अपने बेकपड़ा बदन को चादर से ढक लिया था.

“देखो तुम्हारी साड़ी घुटनों के ऊपर तक चढ़ी हुई है, बाबा देखेंगे तो क्या कहेंगे.” विनोद पत्नी की उजागर निचली काया देख बोला. वह कुछ पल पहले हो रही रतिक्रिया से बेखबर था.

कामिनी सोने का नाटक करते हुए बोली, “सॉरी चीकू के बाबा, साड़ी सोते हुए उठ गई होगी, मैं आपके लिए पानी लाती हूँ.”

“नहीं रुको कामिनी, देखो बाबा सो रहे हैं क्या?”

“हाँ, सो रहे हैं.” sasur bahu ki pipasa

विनोद पत्नी की ओर आया और उसकी साड़ी पूरी ऊपर चढ़ा दी. “अरे तुमने पैंटी नहीं पहनी हुई!”

“भूल गई होंगी.”

विनोद वागले ने पत्नी की टांगें फैलाईं और स्वयं झुक कर बुर के सम्मुख हो गय. “अरे तुमने यहाँ मेरा रेज़र चलाया, बहुत चिकनी लग रही हो.”

विनोद कामिनी की मांसल रानों के बीच लेट कर पत्नी की चूत चाटने लगे, “बड़ी गीली हो, क्या बात है.”

“अब गीली तो हूँगी ही, आप महीनों तक मेरे साथ कुछ नहीं करते तो रात को मेरा निजी भाग रिसता है. आप की जीभ बहुत अच्छी लग रही है.” कामिनी ने ससुर की राल में लेप गीली बुर का कारण होशियारी से छिपा लिया. पति के सर को अपनी योनी में समाए हुए विनोद के बालों को पकड़ कामिनी उसके चेहरे को अपने बालहीन योनिमार्ग पर रगड़ रही थी.

खटिया पर लेटे ससुर छिप कर अपने बेटे और बहु की यौन क्रिया देख रहे थे. क्योंकि विनोद का चेहरा जाँघों के बीच के अँधेरे में लिप्त था, ससुर मौका देख कामिनी के उठे हुए पाजेब पहने पैरों को कोमलता से छू रहे थे. काम-क्रिया में मस्त हुई कामिनी ससुर से आँखें मिला मुस्करा रही थी. पुत्र से चूत चटवाती बहु को देख ससुर धीमे-धीमे हस्त मैथुन कर रहे थे sasur bahu ki pipasa

विनोद अनजान था की जो कामुक रस वह चपड़-चपड़ उत्सुकतापूर्वक ग्रहण कर रहा था वह उसके पिता का झूटन था. बस चीकू ही वागले परिवार की खोली का इकलौता सदस्य था जो वास्तव में सो रहा था.
“आई दादा के पेट के ऊपर क्यों बैठी हो?” नादान चीकू ने ससुर के ऊपर चढ़ी हुई अपनी माँ से जिज्ञासा पूर्वक पूछा. नाइटी पहनी कामिनी लेटे हुए ससुर की सवारी कर रही थी. चुदासी बहु ऊपर-नीचे, आगे-पीछे होते हुए ससुर का लंड निगल रही थी.

“चीकू मैंने कितनी बार तुम्हें कहा है, तुम टी.वी. पर कार्टून देखो और मुझे परेशान मत करो.” भारी साँसें लेती कामिनी ने चीकू को फटकारा. नाइटी पहनी कामिनी अपने ससुर के ऊपर बैठ कर चुदवा रही थी. नाइटी ने खुद के बदन को ढका हुआ था और नीचे लेटे ससुर की इज्ज़त भी बरक़रार थी. नाइटी के अन्दर जो चल रहा था वह चीकू नहीं देख सकता था.

गुसलखाने से बहते पानी के बंद होने की आवाज़ आई. सम्भोग करती कामिनी तुरंत उठ खड़ी हुई और अपनी नाइटी गिरा दी. चूत के रसों में भीगा हुआ ससुर का खड़ा लंड स्पंदन करने लगा. ससुर भी झट से खड़े हो गए, लौड़ा संभाला और पायजामा बांधने लगे. गुसलखाने से विनोद वागले बाहर आया और सब साधारण पाया – कामिनी चाय बना रही थी, पिताजी अखबार पढ़ रहे थे और चीकू कार्टून देख रहा था. कामिनी और उसके ससुर ऐसे ही समय चुरा के कामुक खेल खेलते थे. sasur bahu ki pipasa

“आइये पिताजी, ये कपड़े सुखाने बाहर गए हैं.” कामिनी शौचालय में गई और नाइटी चढ़ा कर नाली पर बैठ गई. कामिनी का सुडौल गोश्तदार बदन, मोटी-मोटी चिकनी जांघें, खरबूज जैसे भारी नितम्ब और बीच में बच्चे दानी के छेद को ससुर घूरने लगे. मादक योनी मुंडी हुई पंखुड़ियों से ढकी थी. कामिनी पेशाब करने लगी. ससुर मूतती बहु के सामने जा बैठे और अपना हात गरम बहती मूत्र धार में धोने लगे.

शौचघर के खुले दरवाज़े की दहलीज पर बैठे ससुर प्रसन्न थे. बहु के ताज़े प्रवाह में अपना हात गीला करते हुए बोले, “बहु तुम मूत्रत्याग करते हुए अत्यंत कामोत्तेजक दिखती हो, मन करता है तुम्हारी मूत की बौछार में स्नान कर लूँ.”

“आइये न पिताजी, नीचे मुंह रखिये, मैं आपके मुख पर पेशाब करती हूँ.” ससुर ने यह सुन शीघ्रता से अपने चेहरे को नाली और बहु की चूत के बीच में धर दिया.

मूत्र के कसैले स्वाद को चखते हुस ससुर का सर पूरा भीग गया था. कामिनी की फूली हुई चिकनी चूत से बहते पीले पेशाब की बॉस ससुर को और उत्तेजित कर रही थी. पवित्र बहु की मूत की बरसात में नहा कर ससुर तृप्त हो गए थे.

“पिताजी साफ़ कर लीजिये, ये आते ही होंगे.” कामिनी उठ खड़ी हुई. पखाने की नाली पर विश्राम करते ससुर ने मग्गे में पानी लिया और अपना शीश धो लिया. sasur bahu ki pipasa

“बाबा आप सुबह तो नहाए थे अभी फिर क्यों?” विनोद वागले खोली में जब वापस आया तो पिता के गीले बाल देख हैरान हुआ.

“बेटे, बहुत पसीना आ रहा था तो सोचा नहा लूँ.” सर पोंछते हुए विनोद के पिता ने सफ़ाई दी.

“पापा, पापा, आई भी दादा के साथ बाथरूम में थीं.” चीकू ने भोलेपन अपनी पतिलंघन माँ का राज़ खोल दिया.

“पिताजी तौलिया भूल गए थे वही देने गई थी, ये चीकू तो कुछ भी बोल देता है.” कामिनी ने बात संभाली और चीकू को डांटा.
इतवार को विनोद वागले की छुट्टी थी और वह परिवार के साथ टी.वी. देख रहा था. छुट्टी वाले दिन विनोद सुबह से ही शराब पीना शुरू कर देता था. दोपहर होते-होते विनोद इतने नशे में था की ज़मीन पर बिछे गद्दे बेहोश हो सो गया. चीकू बाहर अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था. यह अवसर पाते ही ससुर कामिनी के साथ जा बैठे और चिपट कर चूमने लगे. कामिनी भी उत्सुकता से चुम्बन का उत्तर देने लगी. ससुर-बहु की जबानें लड़ने लगीं.

“बहु स्तनपान कराओ.” ससुर कामिनी का वक्षस्थल निहारते हुए बोले. कामिनी ने हँसते हुए अपने ब्लाउज़ के हुक खोले और ब्रा चढ़ा के अपने दोनों मम्मे मुक्त कर दिए. sasur bahu ki pipasa

ससुर बहु की गोद में लेट गए और चूचुक के आस-पास अपनी जिव्हा घुमाने लगे. फिर निपल अपने मुंह में ले चूसने लगे. कामिनी के कड़े उठे हुए उत्तेजित स्तनाग्र को लप-लप चाटने लगे. मम्मे चूसते हुए कामोत्तेजित ससुर पायजामा खोल अपने लिंग की मुठ्ठ मारने लगे.

“मुझे दीजिये पिताजी, मैं सहला देती हूँ.” बहु ने ससुर का पांच-इंच खड़ा लौड़ा अपने नियंत्रण में ले लिया. कामिनी की चूड़ियाँ हस्तमैथुन करते हुए छन-छन बज रही थीं. ससुर का मोटा कठोर लंड बहु की कोमल मुठ्ठी में लुका-छुपी खेल रहा था.

विनोद वागले बगल में बेहोश पड़ा था. कामिनी ने ससुर के लंड की मालिश की गति बढादी, कुछ जी देर में लौड़ा थरथराया और वीर्ये का फव्वारा निकाल दिया. थोडा स्खलित वीर्ये साथ में सोते विनोद के कपड़ों पर गिरा. कामिनी ने हात में चिपके द्रव्य को चाट लिया और ब्रा नीचे कर ब्लाउज के हुक बंद करने लगी. ससुर ने पायजामा चढ़ाया और अपनी खाट पर बैठ टी.वी. देखने लगे.

“बहु विनोद चला गया है, अब थोड़े सुविधापूर्ण लिबास में आ जाओ.” ससुर ने कामिनी को सुझाव दिया. विनोद के दफ्तर जाते ही कामिनी अपनी साड़ी उतार देती थी और ससुर के सामने ब्लाउज़-पेटीकोट पहने रहती थी. चीकू को समझाया हुआ था की उसकी आई गरमी के कारण इन अंदरूनी वस्त्रों में घर का काम करती थी. आज भी उसने ऐसा ही किया.

ससुर ने विस्मित होकर धीरे से कहा, “बहु, आज तुमने जांघिया नहीं उतारा?” sasur bahu ki pipasa

“क्षमा कीजिये पिताजी, एक-दम भूल गई!” कामिनी चूड़ियाँ खनखनाते हुए पेटीकोट के अन्दर पहुँची और अपनी पैंटी उतार के अल्मारी में तह कर के रख दी. फिर शीशे के सामने जा कर होठों पर लिपस्टिक और माथे पर बिंदिया सजाई.

“अब आओ तुम्हार पैरों के नाखूनों पर नेल-पॉलिश लगा दूँ.” ससुर ने लाल नेल-पॉलिश बहु को दिखाते हुए बुलाया.

सुसज्जित कामिनी शरारती मुस्कुराहट देते हुए ससुर के सामने कुर्सी रख कर बैठ गई. उसने टी.वी. देखते चीकू की ओर अपनी पीठ कर दी और फर्श पर बैठे ससुर की गोद में अपना पैर रख दिया.

“आई, दादा क्या कर रहे हैं?” उत्सुक चीकू ने मुड़ कर पूछा.

“दादा आई के पैर के नाखूनों में नेल-पॉलिश लगा रहे हैं.” कामिनी ने अपने पुत्र को अनसुना किया और पेटीकोट चढ़ा लिया. ससुर के सामने अपने सुन्दर कमनीय पैरों को प्रत्यक्ष कर दिया. ससुर की नज़रें बहु के घुटनों के स्तर पर थीं.

“बेटी दूसरा पैर मेरे कंधे पर रख लो.” ससुर ने बहु के गुप्तांगों का निरिक्षण करने की व्यवस्था की. कामिनी ने ऐसा ही किया और अपने पेटीकोट के अन्दर का बहुमूल्य रहस्य सुगम्य बनाया.

ससुर की आँखें आनंदित हो गईं. बहु की मोटी गोश्तदार नंगी रानें आखिरकार खुल गई थीं. बीच में बालहीन चूत का नज़ारा दिख रहा था. कामिनी बार-बार पीछे मुड़ के देख रही थी की चीकू कहीं बहु ससुर की काम-क्रिया न देख ले.

“बहु चिंता मत करो, चीकू टी.वी. देखने में व्यस्त है. मैं देख रहा हूँ उसको, जैसे ही वो इधर आएगा मैं तुम्हें सावधान कर दूंगा.” ससुर ने फुसफुसाया. वे कामिनी के पैर के नाखूनों पर शिष्टता से लाल नेल-पॉलिश लगाने लगे और खुली हुई जाँघों के बीच का आकर्षक दृश्य टकटकी लगा के देखने लगे. sasur bahu ki pipasa

“पिताजी मुझे पता है की आपको मेरा योनिमुख निहारने में कितना हर्ष मिलता है. मैं इनके जाने की बेताबी से प्रतीक्षा करती हूँ ताकि आपको यह ख़ुशी दे सकूँ.” कामिनी ससुर से काना-फूसी कर रही थी और टांग उठा कर अपनी शेव की हुई बुर को इस निःशुल्क कामुक प्रदर्शनी में प्रकाशित कर रही थी. ससुर बहु की रमणीय बालहीन चूत देखते हुए प्रेम से उसके पैरों की सेवा कर रहे थे. साथ-साथ वे कामिनी की अंदरूनी रानें मृदुलता से मल रहे थे, पर वह बहु की बुर को स्पर्श नहीं कर रहे थे. इस खेल से कामिनी की काम वासना उत्तेजित हो रही थी.

“बहु, चीकू आ रहा है, जल्दी से पेटीकोट नीचे कर लो.” ससुर ने चेतावनी दी. कामिनी ने झट से पेटीकोट नीचे किया और ससुर बहु के पैर पर नेल-पॉलिश लगाने लगे.

“चीकू तुम्हें कितनी बार कहा है, तुम टी.वी. पर कार्टून देखो और मुझे परेशान मत करो.” कामिनी ने चीकू को फटकारा. बेटा वापस गया और टी.वी. देखने लगा. कामिनी ने फिर पेटीकोट उठा अपनी जंघाएँ फैलाईं और ससुर के कंधे पर एक पांव रख कामोत्तेजक नग्नता उजागर करी.

पैर और रानें मलते हुए ससुर ने देखा की बहु की चूत भड़क कर गीली हो गई थी. कामिनी की वासना जागृत हो रही थी, वह गहरी सांसें ले आँखें मूंदे हुई थी. ससुर घड़ी में समय देखा और बोले, “बेटी, मैंने मकान मालिक विक्रम साहब को आज बुलाया है, वे आते ही होंगे.”

“उन्हें क्यूँ बुलाया पिताजी.” कामिनी बेचैन हो एकाएक खड़ी हो गई. तभी खटखटाहट हुई और ससुर दरवाज़ा खोलने बढे. sasur bahu ki pipasa

“अरे ठहरिये पिताजी, मैं साड़ी तो पहन लूँ.” कामिनी पेटीकोट को ठीक-ठाक करती हुई अपनी साड़ी ढूँढने लगी. लेकिन ससुर ने तत्काल खोली का द्वार खोल दिया. क़ीमती सूट पहने हुए मकान मालिक विक्रम साहब अन्दर आये, ससुर ने उनके पांव छूकर स्वागत किया. कामिनी वहीँ खड़ी हो शर्म से अपने वक्षस्थल को छिपाने लगी. केवल ब्लाउज़ और पेटीकोट में बेपर्दा, उसके गाल लज्जा से लाल हो गय और वह झेंप रही थी.

“शरमाओ नहीं कामिनी रानी, मुझे तुमसे ही बात करनी है. चीकू बेटे मेरा ड्राईवर तुम्हें आइस-क्रीम खिलाने ले जाएगा. भाग कर जाओ, कार में वो तुम्हारा तुम्हारा वेट कर रहा है.” विक्रम साहब गहरी आवाज़ में बोले, चीकू दौड़ के खोली छोड़ नीचे खड़ी कार में चला गया. विक्रम साहब ने अपना कोट उतारा और कामिनी को ऊपर से नीचे तक ताकने लगे.

ससुर ने खोली का दरवाज़ा बंद कर कुण्डी लगा दी, “बेटी घबराओ नहीं, विक्रम साहब तुम्हें भोगना चाहते हैं. विनोद की कमाई से हमारा गुज़ारा कहाँ चलता है, विक्रम साहब हमारा किराया माफ़ कर देंगे और खूब रूपये भी देंगे. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, तुमसे मिलने ये महीने में बस एक दो बार आया करेंगे.”

“लेकिन पिताजी आप तो पहले विक्रम काका के ड्राइवर रह चुके हैं और आप ही ने मुझे बताया था की काका वेश्याओं के पास जाते हैं. माफ़ कीजिये विक्रम काका मैं ये सब नहीं कहना चाहती थी.” भयभीत कामिनी परेशान हो रही थी.

ससुर ने बात संभाली, “बेटी इसलिय मैं इनके पास गया था और तुम्हारी यौन सुख देने की निपुणता की प्रशंसा की थी. मेरे और इनके बीच कुछ नहीं छिपा, इन्होने ही तो हमें यह खोली दी है. इन्हें मैंने बताया की तुम्हारी यौनरुची प्रबल है जो मेरा बेटा विनोद नहीं बुझा पाता तो तुम मेरे साथ काम-क्रीड़ा करती हो. sasur bahu ki pipasa

मैंने विक्रम साहब को राय दी की अगर ये तुम्हें अपनी रखैल बना लें तो हमारी आमदनी भी बढ़ जाएगी और सबसे महत्वपूर्ण जो कामोन्माद ये तुम्हें दे सकते हैं वो कोई और नहीं दे सकता. तुम सुरक्षित हो, मैं हरदम तुम्हारे साथ रहूँगा. विक्रम साहब के साथ मैंने कई रातें रंडी-खानों में बिताई हैं तो हमारे बीच कोई शर्म नहीं है.” ससुर ब्लाउज़-पेटीकोट पहनी बहु को प्रलोभन देते हुए फुसलाने लगे.

“ठीक है पिताजी, आप जैसा उचित समझें. लेकिन आप काका की क्या विशिष्टता बता रहे हैं?” कामिनी थोड़ी तनाव मुक्त हो गई थी. मन ही मन उसकी इच्छा जग रही थी.

“कामिनी रानी मैं बताता हूँ.” विक्रम साहब ने पैंट की चेन खोली और अपना लिंग निकाल कर हिलाने लगे. कुछ ही पल में उनका शिश्न आठ-इंच बड़ा हो गया. मोटे लौड़े का सुपाड़ा चमकने लगा.

ससुर बहु के पास गए और हात पकड़ कर विक्रम साहब के करीब ले आये. फिर ससुर ने कामिनी की हथेली सख्त लंड से जोड़ दी. ब्लाउज़-पेटीकोट पहनी कामिनी लौड़े को घूरते हुए स्वाभाविक रूप से सहलाने लगी. ससुर प्रसन्न होकर बोले, “इतना बड़ा खम्बा तुमने पहले नहीं देखा होगा बहु. आओ घुटनों के बल बैठो और इसे चूस के साहब की सेवा करो.”

चरित्रहीन कामिनी वासना के वशीभूत घुटनों पर झुक कर विक्रम साहब का गीला सुपाड़ा चाटने लगी. फिर मुंह खोल मोटा लंड चाव से सुड़कते हुए चूसने लगी. sasur bahu ki pipasa

“शाबाश कामिनी रानी, वागले सही कह रहा था तुम तो अनुभवी रंडियों से भी अधिक कुशल हो!” विक्रम साहब कामिनी के शिश्न-चूषण से आनंदित हो रहे थे.

ससुर ने चूसने में मसरूफ़ बहु के ब्लाउज़ के हुक खोले और ब्रा भी उतार फैंकी. फिर पेटीकोट के नाड़े को खोल घुटनों के बल बैठी कामिनी को पूर्णतयः नग्न कर दिया. कामिनी ने पैंटी तो पहले से ही उतार रखी थी. नंगी कामिनी विक्रम साहब से आँखें मिलाती हुई चुस्की लगाकर अपने मुंह से उनके लिंग को भिगो कर उत्तेजित कर रही थी. विक्रम साहब कामिनी के बालों को पकड़ कर अपने आठ-इंची मोटे लौड़े से उसका मुख-चोदन कर रहे थे. निर्लज्ज कामिनी की चूड़ियाँ शिश्न-चूषण के दौरान लौड़े को हाथ से हिलाने के कारण झनझना रही थीं.

“ठहरो बहु, अपनी गंजी बुर तो दिखाओ साहब को.” ससुर ने कामिनी को निर्देश दिया.

बेकपड़ा कामिनी चूसना छोड़ कर उठ खड़ी हुई और ज़मीन पर बिछे गद्दे पर लेट गई. बेशर्म हो उसने अपनी टांगें उठाईं और पैरों को हवा में करके संभाल लिया. उसकी चाँदी की पाजेब पैरों की घुटिका से उतर घुटनों की ओर पिंडली पर स्थायी हो गई थी. लुभावनी सफाचट फूली हुई योनी प्रदर्शित कर विक्रम साहब को रिझाने लगी. मोटा लंड चूसने से उसकी लिपस्टिक लबों पर से कपोलों पर फैल गई थी. लम्बे बाल तितर-बितर हो उलझ गए थे.

“आइये साहब, देखिये इसकी गंजी बुर को. मुझे पता है की आपको शेव की हुई फुद्दियाँ पसंद हैं. मैंने ही इसकी बच्चादानी के बाल हटवाएं हैं.” sasur bahu ki pipasa

शर्ट-पैंट पहने और अनावृत कड़ा लौड़ा हाथ में लिए विक्रम साहब नितम्बिनी कामिनी को प्रेम पूर्वक निहारने लगे. उसका सुडौल जिस्म, भारी कुल्हे, विलासमय स्तन अति आकर्षक दीख रहे थे. गोश्तदार चिकनी जंघाएँ गुप्तांग को अलंकृत कर रहीं थीं. पायल पैरों पर चढ़ी हुई चमक रही थी. घुटने पकड़ी हुई कोमल बाहों पर कांच की रंग-बिरंगी चूड़ियों का आभूषण लुभावना लग रहा था. चिकनी चूत के प्रवेश द्वार की पंखुड़ियों के बीच से झाँकता हुआ लाल चीरा कामोत्तेजना के रसों से गीला था. यह बहुमूल्य स्त्रीधन का खज़ाना लुटने के लिए आमंत्रण दे रहा था.

स्वयं की कामुक सुन्दरता में विलीन विक्रम साहब को चुदासी कामिनी ने पुकारा, “अब आइये विक्रम काका, यह दासी आपकी रखैल बनने के लिए उत्सुक है.”

“शाबाश बहु, तुम से यही आशा थी. आइये साहब जी भर की चोदिये मेरी बहु को.” ससुर गदगद हो कर बोले.

विक्रम साहब ने शर्ट और पैंट उतारी, फिर अंतर्वस्त्र उतारे तो कामिनी ने उनकी बलवान देह सराही. कामिनी को उनका हृष्ट-पुष्ट सफ़ेद बालों से भरा सीना देखा और मजबूत भुजाएँ जांचीं. अभी तक कठोर खड़ा हुआ आठ-इंची लंड फुंकार मार रहा था.

“वागले ज़रा अपनी राल से कामिनी डार्लिंग को घर्षणहीन करो, मैं इसकी तंग गली में सुगमता से प्रविष्ट होना चाहता हूँ. रानी तुम तब तक इसे और चूसो.” विक्रम साहब लेटी हुई कामिनी के सिराहने पर जा बैठे. चुदासी औरत यजमान के सख्त लिंग को चुम्बन देने लगी. चूमते चूमते कामिनी उनके अण्डकोश चाटने लगी. sasur bahu ki pipasa

मालिक की आज्ञा का पालन करते हुए ससुर बहु की रानों के बीच बैठ उसकी बुर चाटने लगे. चपड़-चपड़ चाटते हुए ससुर ने पर्याप्त रूप से लंड चूसती कामिनी के योनिमार्ग को अपने थूक से लबा-लब लेप कर दिया. “साहब बहु की दरार चिकनी कर दी है, आप पधारिये. बहु नितम्ब के नीचे ये तकिये रख लो, साहब का मोटा शिश्न ग्रहण करने में आसानी होगी.”

कामिनी ने उचक कर अपने चूतड़ तकियों से ऊँचे कर उठा दिए. विक्रम साहब कामिनी की उभरी हुई गीली चूत के पास आये और अपना आठ-इंची मोटे लौड़े को साध के प्यासी बुर में घुसाने लगे. और फिर धक्का मार पूरा लिंग चूत के अन्दर पेल दिया. कामिनी आँख बंद कर आनन्द से कराहने लगी.

विक्रम साहब ने गति का इज़ाफा किया और कामिनी के मांसल कूल्हों पर चपत मारते हुए चोदने लगे. कामिनी आहें भरने लगी और हर धक्के का उचक-उचक कर जवाब देने लगी. विक्रम साहब ने कामिनी के घुटने उसके कानों के झुमकों के निकट टिका दिए थे, और फूली हुई चुदासी बुर को डट के चोद रहे थे.

“क्षमा कीजिये विक्रम साहब, बहु को शायद नज़ारा देख सदमा पहुँचा है इसलिए बाहर गई है. मैं उसे अभी वापस लेकर आता हूँ.” ससुर विक्रम साहब के बँगले में अपनी बहु कामिनी को सजा-धजा कर ले आए थे. पर कामिनी ने जब देखा की विक्रम साहब लौंडेबाज़ी में मसरूफ़ हैं तो वो खफा हो निकल गई.

“वागले तुमने कामिनी डार्लिंग को बताया नहीं की हम यह शौक भी रखते हैं?” अपने नेपाली नौकर बादल की गाण्ड मारते हुए विक्रम साहब ने ससुर से पूछा.

“मैंने उचित नहीं समझा साहब. सोचा की आपको समलिंगी-मैथुन करता देख बहु जिज्ञासु हो जाएगी और आपकी योजना के अनुसार यहाँ चल रही काम-क्रिया में शामिल हो जाएगी.” ससुर चिंतित हो समझाने लगे.

इतनी देर में कामिनी स्वयं ही कमरे में लौट आयी, “विक्रम काका, मैं अपने बचपने पर शर्मिंदा हूँ.” साड़ी पहनी कामिनी सोफे पर गुदा-सहवास करवाते बादल के निकट जा बैठी. बादल आराम से लेटा अपने मालिक के आठ-इंची मोटे लौड़े को अपने युवा मलाशय में स्वीकार कर रहा था. रूपवान नेपाली नौकर की निर्बल लुल्ली चुदाई के साथ-साथ डोल रही थी. कामिनी अपने प्रेमी विक्रम काका के विशाल शिश्न को गोरे बादल की संकीर्ण पखाना-निर्गम नली में ओझल होता देख अचंभित और उत्तेजित हो रही थी. गाण्ड मरवाने का लुत्फ़ उठाता हुआ बादल कामिनी से नज़रें मिला मुस्कुरा रहा था और हर धक्के के साथ सिसकारी भर रहा था.

“कामिनी डार्लिंग, देखो हमारा बादल कितना सुन्दर लड़का है. यह समलिंगकामी है और केवल हमसे गुदा-सवारी कराता है. हमें इसके साथ सम्भोग करना बहुत पसंद है हालांकि तुम्हारे से अधिक नहीं.” विक्रम साहब बादल का मल-द्वार प्रबलता से चोदते जा रहे थे. sasur bahu ki pipasa

“बहु, तनिक कपड़े उतारो. तुम और बादल मिल कर विक्रम साहब की सेवा करो. साहब अवश्य तुम दोनों को बराबर प्यार देंगे.” ससुर बहु को प्रोत्साहन देने लगे.

“हाँ कामिनी रानी, तुम हमारे बादल के सलोने मुख-मंडल पर विराजो. इस गांडू को अपने रसों की मदिरा पिलाओ.” आगे-पीछे हो मूसली घुसाते विक्रम साहब ने अपनी आकर्षक रखैल कामिनी को आदेश दिया.

कामोत्तेजित कामिनी ने तुरंत साड़ी के अन्दर पहुँच कर पैंटी निकाल दी. विक्रम साहब गुलाबी पैंटी लेकर सूंघने लगे. फिर कामिनी साड़ी-पेटीकोट कमर के ऊपर खींच कर सोफे पर चढ़ गई. चुद्ता समलिंगी बादल सूजी हुई गीली योनी को लालसा से देखने लगा. कामिनी ने अपने चूतड़ों को लेटे हुए बादल के चेहरे पर उकड़ूँ बन ठहरा दिया. बादल ने भारी कूल्हों के बीच छिपी चूत की उपरी त्वचा को खोल कर योनीमार्ग को बंधनमुक्त किया. रसीली बुर की महक बादल की नासिकाओं में बस गई और वह लपा-लप कुत्ते की तरंह चूत चाटने लगा.

“आह..आह… विक्रम काका इस लड़के की छोटी सी लुल्ली झटके खाती हुई कितनी प्यारी लग रही है!” नीचे लेटे समलिंगकामुक बादल की जीह्वा स्पर्श से मदहोश कामिनी की काम भावना प्रज्वलित हो गई थी.

विक्रम साहब ने बादल की लचीली टांगें हवा में उठा उसके गोरे नितम्ब समलैंगिक सहवास के योग्य व्यवस्थित किये हुए थे. तेल से चिकना किया हुआ मलाशय बहुधा अभ्यास के कारण घनिष्ठ लौड़ा आसानी से हज़म कर रहा था. बादल की ढीली नपुंसक लुल्ली उसकी गाण्ड में हो रहे सशक्त हमले का उत्तर देते हुए उसके स्वयं के पेट पर तमाचे मार रही थी. नेपाली बादल कामिनी की चूत का रस चखने के साथ-साथ अपने पिछवाड़े की खुजली भी शांत करा रहा था. मालिक के शिश्न को अपनी पखाना-निर्गम संवरणी से पकड़कर गरम नर-सुरंग में कैद किये हुए था. फच… फच… फच चपत जमाने की ध्वनी समलिंगी व्यभिचार की घोषणा कर रही थी. sasur bahu ki pipasa

“बहु विक्रम साहब को चुम्बन तो दो.”

ससुर जी बड़ी गरमजोशी के साथ अपनी बहु को चुदवा रहे थे और बहु उछल उछल के मज़े दे रही थी. इन ससुर बहु की जुगलबंदी की bahu porn stories का अगला गरमा गरम भाग-

विक्रम साहब ने बादल की लचीली टांगें हवा में उठा उसके गोरे नितम्ब समलैंगिक सहवास के योग्य व्यवस्थित किये हुए थे. तेल से चिकना किया हुआ मलाशय बहुधा अभ्यास के कारण घनिष्ठ लौड़ा आसानी से हज़म कर रहा था. बादल की ढीली नपुंसक लुल्ली उसकी गाण्ड में हो रहे सशक्त हमले का उत्तर देते हुए उसके स्वयं के पेट पर तमाचे मार रही थी. नेपाली बादल कामिनी की चूत का रस चखने के साथ-साथ अपने पिछवाड़े की खुजली भी शांत करा रहा था. मालिक के शिश्न को अपनी पखाना-निर्गम संवरणी से पकड़कर गरम नर-सुरंग में कैद किये हुए था. फच… फच… फच चपत जमाने की ध्वनी समलिंगी व्यभिचार की घोषणा कर रही थी. sasur bahu ki pipasa

“बहु विक्रम साहब को चुम्बन तो दो.”

दृश्य का मज़ा लते हुए ससुर ने बादल से चूत चटवाती कामिनी को सुझाव दिया. सुन्दर नेपाली नौकर बादल का चेहरा बहु के मांसल चूतड़ों के नीचे छिपा हुआ था. कामिनी आगे बढ़ कर अपने प्रेमी विक्रम काका के होठ चूमने लगी. दास की नर-गुदा सम्भोग करते विक्रम साहब अपनी रखैल की जीभ को चूसने लगे. बादल औरत और मर्द दोनों का आनंद उठा रहा था.

“कामिनी डार्लिंग, बादल के मुख को अपने गुप्तांग से दबाकर ज़ोंर से रगड़ो. यह स्वपीड़न-कामुक है, इसे पीड़ा सह कर कामोन्माद प्राप्त होता है.” विक्रम साहब ने कामिनी का मार्गदर्शन किया. कामिनी ने अपना पूरा वज़न गांडू बादल का चेहरा दबोचने में लगा दिया. गुदा-मैथुन कराता बादल अपने सर के ऊपर कामिनी की चिकनी नशीली योनी की हुकूमत का मज़ा लेने लगा. कामिनी बादल की निर्बल लुल्ली हिलाने लगी, उसके लघु अंडकोष के नीचे विक्रम साहब का खम्बा पिस्टन की तरंह नर-योनी के अन्दर-बाहर हो रहा था. कामिनी प्रेमी की लौंडेबाज़ी में भाग ले कर संतुष्ट थी, उत्तेजित बुर देख-भाल स्त्रैण बादल कर रहा था.

“विक्रम काका, आप कहाँ पानी निकालेंगे?” कामिनी ने पूछा. sasur bahu ki pipasa

“बस निकलने वाला है कामिनी डार्लिंग, बादल को मुक्त करो यही मेरा पानी निगलेगा.” कामिनी विक्रम साहब की बात मानते हुए अर्धनग्न अवस्था में सोफे पर खड़ी हो गई. कुछ ही पलों में साहब ने बादल की पखाना-निर्गम सुरंग से अपना लण्ड निकाला और समलिंगी नेपाली नौकर के पूरे खुले हुए मुंह में खाली कर दिया. सुरूप बादल पूरा वीर्ये बेसब्री से पी गया.

ससुर ताली बजाने लगे, “देखो बहु बादल का पुष्ठभाग कैसे कली से पुष्प बन गया है.” कामिनी ने ससुर के कहने पर देखा की वाकई नेपाली गांडू का गुदा-द्वार सुर्ख लाल था और चुदाई से फैल गया था.

बेडरूम से छप-छप, फच-फच सुनाई देते मंद स्वर मैथुन का संकेत थे . विनोद ने जिज्ञासापूर्वक विक्रम साहब के शयनकक्ष की ओर कदम बढ़ाए . थोड़े से खुले हुए किवाड़ में झाँका तो देखा की विक्रम साहब चुदाई के जोश में खोए हुए थे . काम-क्रिया का परिश्रम करते हुए वर-वधु गंदे शब्द चिल्ला रहे थे . दम्पति का केवल निचला नग्न भाग विनोद वागले की दृष्टि में था . बिस्तर पर उलझे हुए जिस्मों का ऊपरी शेष भाग दरवाज़े से ताक- झाँक करता विनोद नहीं देख पा रहा था .

“ऐसे ही चुदवाया करो रानी , आज तो योनिमार्ग अतिशय गीला है .” विक्रम साहब अपनी रखैल कामिनी वागले की शुद्धता लूटते हुए पुकार रहे थे . वह इस हक़ीक़त से अनजान थे की उनकी प्रियतमा का कानूनी स्वामी कमरे के बाहर था . sasur bahu ki pipasa

शयनकक्ष के फ़र्श पर बिखरी हुई साड़ी विनोद वागले को जानी-पहचानी लग रही थी . कुर्सी पर ब्रा और पेटीकोट फेंका हुआ था . विक्रम साहब के नीचे चुदती विनोद की जोरू के पायल पहने मनमोहक पैर हर धक्के के समकालीन हिल रहे थे . इतनी देर में विक्रम साहब का नौकर बादल आ गया और विनोद वागले को कमरे में झांकता हुआ पाया . विनोद की बादल से नज़रें मिली तो वह झेंप गया और तुरंत बैठक में वापस आ गया .

“कैसे आना हुआ विनोद बेटे, माफ़ करना तुम अनचाहे हमारी यौन लीला के साक्षी बने . तुम तो जानते हो हम कितने रंगीले आदमी हैं .” बादल की हिदायत पर कुछ समय पश्चात् विक्रम साहब कामिनी को बेडरूम में छोड़ कर विनोद से मिलने आये और हँसते हुए दिल्लगी करने लगे .

“मालिक मैंने कुछ नहीं देखा . पिताजी ने आपके बगीचे की घास काटने को कहा था, वही रख-रखाव करने आया हूँ .” सम्भोग करती हुई पत्नी की बिखरी साड़ी पर ध्यान देने के बावजूद, बुद्धिहीन विनोद को कुछ संदेह नहीं हुआ .

गाउन पहने विक्रम साहब मूर्ख विनोद वागले की अनभिज्ञता से आश्वस्त हो गए . बगल के कमरे से विनोद की व्यभिचारिणी बीवी अपने पति और प्रेमी का वार्तालाप सुन रही थी . समागम से श्वासहीन, बेकपड़ा कामिनी वागले हाथ-पैर पसारे बिछौने पर ढेर थी . उसके सघन वक्षस्थल पर गाढ़ा श्वेत वीर्ये फैला हुआ था . sasur bahu ki pipasa

“धन्यवाद विनोद, तुम और तुम्हारे पिता हमारी कितनी सेवा करते हो . आज संध्या की फैंसी-ड्रेस पार्टी में क्या तुम बादल के साथ मदिरा सेवन में मदद कर सकते हो? हमारे थोड़े विशिष्ट अतिथि आयेंगे . सब लोग मुखौटा लगाए होंगे ताकि किसी को कोई पहचान न सके .” विक्रम साहब ने विनोद वागले को कार्य सौंपा .

“अवश्य मालिक, मैं अभी बागबानी करके जाता हूँ और साँझ को साफ़ कपड़े पहन कर काम करने आ जाऊँगा .” विनोद आश्वासन दे कर चला गया . विक्रम साहब वापस बेडरूम में विनोद की स्वच्छंद धर्मपत्नी और अपनी रखैल कामिनी वागले के पास गए .

“विक्रम काका यह आपने क्या कर दिया, इनके होते हुए मैं पार्टी में कैसे शामिल हो पाऊँगी ?” कामिनी ताज्जुब थी .”

“चिन्ता मत करो डार्लिंग, तुम तो स्कूली-छात्रा वाली वर्दी पहन रही हो और फिर मुखौटा भी पहने होगी . तुम्हारा बेवकूफ पति तुम्हें नहीं पहचान पायेगा .” विक्रम साहब ने अपनी सुन्दर प्रेयसी को साहस दिलाया .

“इस हथिनी जैसी चाल वाली छात्रा से हमारी भेंट तो कराओ विक्रम .” बनावटी फ़ौजी-वर्दी पहने नकाबपोश मंत्री जी ने अनुरोध किया . कामिनी श्वेत स्कूली-वर्दी की स्कर्ट पहने मटक-मटक कर पार्टी में आए कुलीन लोगों के साथ घुल-मिल रही थी . सब मेहमान मुखौटों के पीछे अपने चेहरे छिपाए हुए थे . कामिनी ने भी मुखमंडल मुखौटे से ढका हुआ था और हाथ में मदिरा का ग्लास लिए थी . sasur bahu ki pipasa

ड्रिंक्स बांटता हुआ विनोद अपनी मास्क-पहनी गृहणी को अपर्याप्त एवं उकसाने वाले वस्त्र पहनी कोई वेश्या समझ रहा था . आख़िरकार ऐसी शिक्षालय वाली लघु स्कर्ट कोई रंडी ही सँभाल सकती थी . कामिनी की मोटी टांगें घुटनों से नीचे अनाश्रित थीं . उसने कन्याओं वाली दो चोटियाँ कर रखी थीं . पाँव में विद्यार्थियों वाले जूते और चोली के स्थान पर वर्दी की सफ़ेद कमीज़ पहनी थी . तंग पोशाक में से कामिनी का सुडौल शरीर फ़ूट-फ़ूट कर निकल रहा था .

“अवश्य मंत्री महोदय, यह हमारी सजनी कामिनी है . यह आपको हमारे बँगले का दौरा कराएगी .” विक्रम साहब ने कामिनी को देख आँख मारी और ध्यान दिया की उनकी बातें विनोद की श्रवणसीमा में न हों . दावत बाग़ में ज़ोरों से चल रही थी, उच्च्वर्गिये लोग विभिन्न प्रकार के वेषों में आये हुए थे .

प्रशिक्षित कामिनी ने मंत्री जी के साथ कोठी का निरीक्षण शयनकक्ष से आरम्भ किया . “मंत्री जी देखिये इस छात्रा के जूतों के फीते खुल गए हैं, तनिक बाँधने में मदद करेंगे ?” कामोत्तेजक ढंग से कामिनी ने बिस्तर पर आसीन मंत्री जी की जांघ पर पाँव रख दिया और उनका मुखौटा हटा दिया . sasur bahu ki pipasa

मंत्री जी उठी हुई टाँग से बेपर्दा कामिनी की गोश्तदार रानें निहारने लगे . फिर सिर झुका कर श्वेत-स्कर्ट की चुन्नटों के भीतर का दर्शन करने लगे . उत्तेजित हो पैरों को मलते हुए उन्हें चूमने लगे . हाथ पसार के कामिनी की लाल पैंटी उसके मांसल कूल्हों से उतारने लगे .

“मंत्री जी यह क्या अभद्र व्यवहार कर रहें हैं . आपकी छात्रा को लाज आ रही है .” कामिनी नटखट ढंग से मिथ्या विरोध करने लगी और स्वयं पैंटी का सरकाव सुगम कर दिया . मंत्री जी ने पैंटी उतार फेंकी और कामिनी की चिकनी बालहीन चूत स्कूली-स्कर्ट के अन्दर अनाभूषित कर दी . फिर खड़ी हुई कामिनी का पाँव अपने कंधे पर टिका दिया और उसकी मादक बुर उचक कर कुत्ते की तरंह सूंघने लगे . मंत्री जी का शीर्ष स्कर्ट के अन्दर संगुप्त था . उन्होंने कामिनी की लुभावनी योनी का मुखाभिगम आरम्भ कर दिया . भगोष्ठ की फांकें खोल अपनी ज़बान से लपड़-लपड़ चाटने लगे .

बेडरूम की खिड़की के बाहर बाग़ में से यह रति-क्रिया विनोद वागले देख रहा था . कामिनी का मुखौटा पहने होने के कारण वह अज्ञात था की मंत्री जी से जिह्वा-सम्भोग कराती औरत उसकी पतिव्रता जोरू थी . स्कूली वर्दी में कामिनी अति कामुक प्रतीत हो रही थी, विनोद अपना लण्ड पतलून के अन्दर सहला रहा था . अकस्मात् विनोद ने अपने गुप्तांग पर स्पर्श महसूस किया, उसने देखा की समलिंगी बादल मुस्कराता हुआ उसका लौड़ा पकड़ने के चेष्ठा कर रहा है . sasur bahu ki pipasa

भड़के हुस विनोद को इसमें आपत्ति नहीं हुई और उसने नेपाली नौकर को अनुमति दे दी . बादल घुटनों पर बैठ विनोद की चेन खोलने लगा और फौरन शीष्ण-चूषण शुरू कर दिया . गांडू बादल का स्नेहमय गरम मुख विनोद की वासना उभाड़ने लगा . बादल कभी विनोद का सुपाड़ा चाटता तो कभी पूरे लिंग को ऊपर से नीचे तक चूमता . स्लर्प-स्लर्प ध्वनी करते हुए बादल आँखें मूँद लण्ड चुस्की लगाकर चूस रहा था .

अब तक कमरे के अन्दर का नज़ारा बदल गया था . सफ़ेद स्कर्ट पहनी कामिनी वागले बिस्तर पर लेटे मंत्री जी के लिंग पर सवार थी . वह उठक-बैठक कर चुद रही थी . कामिनी के भारी चूतड़ मंत्री जी के पिण्ड पर छप-छप तमाचे मार रहे थे . कामिनी सिस्कारियां ले रही थी और रति-क्रिया करते हुए बारम्बार मंत्री जी को झुक कर चुम्बन दे रही थी .

“चलो कामिनी-बाई अब कुतिया बन जाओ . तुम्हें विक्रम मेरी खातिर करने का कितना पैसा दे रहा है ?” मंत्री जी ने अपनी फौजी-वर्दी की पतलून उतार बिस्तर के किनारे मोर्चा ले लिया . विवाहित गृहणी कामिनी अपने को वेश्या बोला जाना पसंद कर रही थी .

“दस हजार रूपये मंत्री जी . आपने सही पहचाना, मैं कॉल-गर्ल हूँ . आप जैसे ग्राहकों की होटलों में सेवा करती हूँ . मेरा घरवाला शराबी है, मेरे ससुर ही मेरे दलाल हैं . मैं आपके लिए अवश्य कुत्ती बनूँगी .” अधनंगी कामिनी वागले स्कूली स्कर्ट-कमीज़ पहने निर्देशित मुद्रा लेने लगी . देह-व्यापार की ख़रीदी हुई वस्तु के रूप में वह काम-भोग के विविध अनुभवों की और इच्छुक हो गई थी . sasur bahu ki pipasa

“तुम वेश्यावृत्ति के कार्य में अपनी मोटी गाण्ड में डंडा तो लेती ही होगी . मुझे तुम जैसी रंडियों की बुण्ड में सख्त इंजेक्शन लगाने की रूचि है .” अपना सात-इंची लौड़ा लहराते हुए मंत्री जी अश्लील प्रश्न पूछने लगे . पके हुए फल समान भारी वक्षों की धनि कामिनी कच्ची बालिकाओं की स्कूली-वर्दी में अति सुन्दर लग रही थी . भोगी सुडौल गज-गामिनी बदन को भंग करने के उत्सुक मंत्री जी कामिनी के मैथुनिक सौंदर्य से मंत्रमुग्ध थे .

“नहीं मंत्री जी, मैंने सुना है इस अकथनीये कार्य में महिलाओं को पीड़ा होती है .” हाथ-पैरों के सहारे गद्दे पर घोड़ी की आकृति में कायान्तरित कामिनी प्रतिरोध करने लगी . श्वेत स्कर्ट के भीतर उसके चर्बीदार नितम्ब की रूपरेखा कामुक आमंत्रण दे रही थी . पग पर विद्यालय के जूते स्कूली-वर्दी की वेशभूषा के अनुरूप कामिनी ने अभी भी पहने हुए थे .

“अरे नहीं प्यारी , जैसे तुम्हारी योनी घुसपैठ की आदि हो गई है वैसे ही तुम्हारे कुँवारे पिछवाड़े को अभ्यास की ज़रुरत है . मैं तो हैरान हूँ की तुम जैसी स्वच्छंद-सम्भोग की अभिलाषी औरत की बुण्ड अभी तक अनन्वेषित है ! मैं वैसलीन का उपयोग कर सहजता से तुम्हारे गुदा-कौमार्य का उद्घाटन करूंगा, व्याकुल न हो .” कामोत्तेजित मंत्री जी ने कुतिया बनी कामिनी की चुन्नटों वाली स्कर्ट थोड़ी सी चढ़ाई और उसके गोलाकार मादक चूतड़ चूमने लगे .

अभी-अभी व्यभिचार से शिथिल भीगी हुई सफाचट बुर को चाटने लगे . अविवेकी नारी के फूले हुए प्रताड़ित लाल जननांग पर मंत्री जी जीभ का पोंछा लगाने लगे . योनी-रस पीते हुए मंत्री जी ने कामिनी के कूल्हों को खंडित कर उसकी मल-निर्गम सुरंग को अपनी अंगुली से खोदना आरम्भ किया . वेसलीन से सनी अंगुली मलाशय की आंतरिक दीवार घर्षणहीन करने लगी . sasur bahu ki pipasa

खिड़की के बाहर लौड़ा चूसता समलैंगिक बादल भीतर की गतिविधियाँ देख प्रेरित हो रहा था . उसने विनोद वागले से गुज़ारिश की और मुड़ गया . कामोत्तेजीत विनोद ने पीछे से लड़के को अपनी बाहों में समेट लिया और उसके आसन पर अपना उजागर लिंग रगड़ने लगा . विनोद चिकने बादल की गर्दन को जगह-जगह काटने लगा . नेपाली गांडू विनोद के ठोस लिंग को पकड़ कर हलके-हलके मुठ मार रहा था . शादी-शुदा विनोद बादल की ढीली लुल्ली अपनी उँगलियों से महसूस करने लगा . शीशे का दरीचा बंद होने के कारण विनोद भीतर का दृश्य देख तो पा रहा था परन्तु वार्तालाप को सुन नहीं सकता था .

बेडरूम में मंत्री जी कुतिया बनी कामिनी वागले के पीछे स्थित अपने लण्ड पर वेसलीन लगा रहे थे . नितम्बिनी कामिनी का गुदा-द्वार श्वेत स्कूली-स्कर्ट के घूंघट से बेपर्दा हो लौड़े को लुभा रहा था . गुदगुदी स्थूल जंघाएँ खोल अपने कूल्हों को उत्थित कर कामिनी अब गाण्ड मरवाने का तजुर्बा प्राप्त करने की इच्छुक थी . वह प्रसन्न थी की तत्पश्चात अपने आशिक़ विक्रम काका को अपनी तंग पखाना-निकास नली में स्वीकार कर पाएगी .

इस भेंट से उसके बलमा अवश्य हर्षित होंगे . इस कल्पना के मध्य में मंत्री जी अपनी काम वासना पूर्ण करते हुए सुपाड़े को कामिनी के नितम्ब में प्रविष्ट कर दिया . कामिनी दर्द से कराही और अपनी बेरोजगार बुर को मलने लगी . मंत्री जी ने पूरा भाला धकेल दिया और कामिनी के गोश्तदार चूतड़ों पर तमाचे मारते हुए उत्साहयुक्त चुदाई करने लगे . कामिनी सिसकारियाँ भरने लगी और पीड़ा से नयन मूंदे हुए अपने होठ काटने लगी . हमले के साथ-साथ कामिनी की दोनो छात्राओं वाली चोटियाँ झूल रहीं थीं . सफ़ेद स्कर्ट कमर पर चढ़ी हुई नग्न निचले जिस्म की और शोभा बढ़ा रही थी . विलासमय नितम्बों की चर्बी जोशपूर्ण झटकों से थरथरा रही थी . sasur bahu ki pipasa

बाहर समलिंगकामुक बादल ने अपनी निक्कर उतार दी थी . हाथों में थूक-थूक कर खुद के समलिंगी गुदा द्वार को गीला कर मैथुन के लिए गमनिय बना रहा था . विनोद बादल के लड़कपन को अपने खड़े हुए धड़कते खम्बे से भ्रष्ट करने के लिए तरस रहा था .

“आशा है कामिनी रानी आपको बखूबी संतुष्ट कर रही है मंत्री जी ?” विक्रम साहब शयनकक्ष में दाखिल हुए और यौन क्रिया करते हुए मंत्री जी से उनके हाल-चाल पूछे .

“तुम्हारी भाड़े की छिनाल बड़ी मजेदार है विक्रम . इसकी तंग अनुभवहीन गाण्ड लेने में बहुत आनन्द आ रहा है . देखो कितनी सरगर्मी से अपना लदा हुआ पिछवाड़ा बजवा रही है .” हाँफते हुए मंत्री जी कामिनी की चुदने की प्रतिभा की प्रशंसा करने लगे .

“आह… आह… विक्रम काका, आह… आह… मंत्री जी के शिक्षण से अब मेरी गुदा लाभदायक हो गई है . आह. .. यह कड़वा ज्ञान दुखदायी तो था पर अनूठा भी है . आह… आह… यदि मंत्री जी बुरा न माने तो आप भी परखिये . आह… आह… ” धक्कों की वजह से आहें भरती कामिनी अपने महबूब विक्रम काका को मंत्री जी से अदला-बदली करने का सुझाव देने लगी .

खिडके के बाहर विनोद ने भी बादल के मलाशय में गोता लगा दिया था और फुर्तीले समलैंगिक सहवास में डूबा हुआ था . बादल ने अपनी राल से अपना गुदा द्वार तरल कर लिया था और अपनी भूखी गुफा में कठोर लौड़ा निगल रहा था . नपुंसक गांडू छोकरा लण्ड ग्रहण करने की लत शांत कर रहा था . दीवार के सहारे टेढ़ा खड़ा होकर अपना कामुक युवा मलाशय विनोद को भेंट किये हुए था .

मित्रता में मंत्री जी ने अपना स्थान विक्रम साहब को हस्तांतरण कर दिया और वह तुरंत कामिनी के चूतड़ों के मध्य की शोषित मणि लूटने लगे . विक्रम काका को सुख से अपने पिछवाड़े में स्वीकार कर, कामिनी मंत्री जी के लम्बवत्त लिंग को चूसने लगी .

“यह स्त्री तो वास्तव में परपुरुष-गामिनी कलाओं में निपुण है विक्रम, और ऊपर से इसका भड़कीला छात्रा वेष … उत्तम, अति उत्तम !” मंत्री जी दो पुरुषों की सेवा करती शर्मीली पतिव्रता कामिनी का गुणगान करने लगे . कुछ पलों में मंत्री जी ने कामिनी के मुख में लिंग स्खलित कर दिया, कामिनी पूरे शुक्राणु पी गई .

विक्रम साहब ने भी कामिनी की मस्त गाण्ड के अन्दर अपना वीर्ये निकाल फेंका . चरम-आनन्द प्राप्त कर कामिनी थक कर बिस्तर पर लेट गई, उसके कूल्हों के बीच से चिपचिपा श्वेत रिसाव निकास करने लगा और लबों के कोनों से भी चाश्नी जैसा बीज चूने लगा . अर्धनग्न कामिनी काम-क्रिया का रसास्वादन करने के उपरांत भी अपने सुडौल बदन पर स्कूली-वर्दी की कामोत्तेजक स्कर्ट-कमीज़ पहने हुई थी .

बाहर कामिनी का कानूनी नाथ ने पत्नी की रंगरलियों से बेखबर समलैंगिक समागम का कामोन्माद हासिल किया था . कामाकर्षक बादल के मलाशय में अपनी धातु त्याग कर विनोद तृप्त हो गया था .

“कामिनी, डाइनिंग टेबल पर पैर नीचे रख कर बैठते हैं .” विनोद वागले ने पत्नी को नई भोजन-टेबल पर खाने की रीति समझाई . कामिनी कुर्सी पर आलती-पालती मारे बैठी हुई थी . आकर्षक स्त्री ने साड़ी चढ़ाई हुई थी . विक्रम साहब मिसेज़ वागले के बगल में बैठे उसकी अनावृत जंघाएँ सहला रहे थे . यह कार्यक्रम टेबले के नीचे छुपा हुआ था . सामने बैठा विनोद वागले शराब के नशे में धुत्त था .

“सॉरी चीकू के बाबा, मेरे पैर में दर्द हो रहा था इसलिए कुर्सी पर रख लिया .” कामिनी ने पाँव नीचे कर दिए . विक्रम साहब ने अपने बँगले पर वागले दम्पति को रात के खाने पर बुलाया था . डाइनिंग टेबल पर साथ बैठे हुए तीनों खाना खा रहे थे .

“विनोद तुम व्हिस्की पियो, कामिनी को तंग मत करो .” विक्रम साहब ने शराब की बोतल आगे करी .

विनोद व्हिस्की पी कर मदहोश था . थोड़ी देर में विनोद ने टेबल पर सर रख कर आँखें मूँद लीं . विक्रम साहब और कामिनी ने विनोद को सहारा दे उठाया और सोफे पर लिटा दिया . विनोद को सोता देख विक्रम साहब ने अपनी रखैल को आग़ोश में लिया और चुम्बन दी . कामिनी सोफे पर पति के बगल में बैठ गई और विक्रम साहब की पतलून खोल उनके लण्ड के साथ खेलने लगी . उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और प्रेमी का लौड़ा चूमने लगी . गीला सुपाड़ा चाटते हुए अंडकोष सहलाने लगी . sasur bahu ki pipasa

“यह क्या कर रही हो कामिनी !”, विनोद जग गया और दृश्य देख भौंचक्का हो गया . समीप बैठी धर्मपत्नी पिता समान विक्रम साहब का शिश्न-चूषण कर रही थी .

“चीकू के बाबा, आप तो मेरे साथ कुछ करते नहीं हैं और फिर विक्रम काका का लिंग आपकी तुलना कितना विशाल है . आप चुपचाप देखिये, हमारी काम-क्रिया में बाधा मत डालिए .” पति को डांट कर कामिनी पुनः आशिक़ का आठ-इंची खम्बा चूसने लगी .

“विनोद तुम्हें तो पता होना चाहिए की हम तुम्हारी जोरू के साथ नियमित रूप से सम्भोग करते हैं . तुम्हारे पिता इसके बदले हमसे रूपये लेते हैं और तुम्हारा घर इन्ही पैसों से चलता है . डार्लिंग ने मंत्री जी के साथ भी रति-क्रिया कर उन्हें खुश किया है .” कामिनी के केशों में उँगलियाँ चलाते हुए विक्रम साहब में मुख-चोदन जारी रखा

“ठीक है विक्रम साहब, आप इस वेश्या को भोगिये . मैं चलता हूँ .” विनोद उठ कर प्रस्थान करने लगा .

“नहीं आप यहीं बैठिये, मैं विक्रम काका को आपका तुच्छ शिश्न दिखाना चाहती हूँ . अपनी पैंट खोलिए .” कुलटा कामिनी प्रेमी के मोटे लौड़े को हिलाते हुए पति विनोद को सता रही थी . अपमानित हो विनोद ने शर्मनाक कार्य किया और चेन खोल कर अपनी लुल्ली प्रदर्शित कर दी .

“देखिये विक्रम काका, आपके हथोड़े के सामने इनकी छड़ी कितनी छोटी और निर्बल है .” कामिनी ने पति विनोद की लुल्ली उठाई और हँसने लगी . शर्मिंदा हो विनोद ने अपना चेहरा हाथों से ढक लिया .

“चीकू के बाबा, आँखें खोलिए और अपनी पत्नी को योग्य मर्द के साथ अच्छे से सहवास करते हुए देखिये .” कामिनी ने विनोद के चेहरे से उसके हाथ हटाए और मुस्कुराते हुए विक्रम साहब का चमकता हुआ सुपाड़ा जिह्वा निकाल चाटने लगी . फिर लण्ड चूसते हुए पति को शरारती ढंग से मुड़-मुड़ कर देखने लगी . लज्जित विनोद जोरू को पराये पुरुष के साथ यौन-क्रिया करता देख कामोत्तेजित हो रहा था, वह अपने लिंग को सहलाने लगा . sasur bahu ki pipasa

“अच्छे से चूसो कामिनी, विक्रम साहब के तने को अपने कंठ तक ले कर खाओ . शाबाश, ऐसे ही .” हस्तमैथुन करता हुआ विनोद शिश्न-चूषण करती स्त्री को प्रोत्साहन देने लगा . पति के समर्थन से प्रसन्न कामिनी ने पलट कर विनोद को चुम्बन दी . विनोद ने पत्नी के लब और ज़बान चूमते हुए विक्रम साहब के लौड़े के स्वाद का अनुभव किया .

“आप भी चखिए न, मज़ा आएगा .” कामिनी ने विनोद वागले का मुख विक्रम साहब के कठोर लण्ड की ओर धकेल दिया . उत्तेजित विनोद ने स्वेच्छा से मोटा लिंग मुंह में ले लिया और चूसने लगा . कामिनी पति विनोद के बाल जकड़ कर उसके शीश को धक्के देने लगी . विनोद के मुंह में निष्ठुर लौड़ा अन्दर-बाहर होने लगा . कामिनी पति के साथ मिल कर विक्रम साहब का आठ-इंची स्तम्भ को चाटने-चूसने लगी .

“कैसा लगा मुखाभिगम करके विनोद? अब तुम कामिनी डार्लिंग को नग्न करो . हम तुम्हारी जोरू के साथ समागम करना चाहते हैं .” विक्रम साहब ने आदेश दिया . अपने थूक से लतपत लौड़े को विनोद ने छोड़ा .

विनोद वागले ने कामिनी की साड़ी उतार दी और उसका पेटीकोट गिरा दिया . फिर पत्नी के ब्लाउज़ के हुक खोल दिए और श्रीमती को सोफे पर लिटा दिया .

“चीकू के बाबा, मेरी ब्रा और पैंटी भी उतारिये . विक्रम काका के लिए मुझे पूरा निर्वस्त्र करिए और उन्हें मुझ पर सवार होने का निमंत्रण दीजिये .” कामिनी अपने स्वामी को अपमानित करते हुए निर्देश दिया . लाचार विनोद ने अपनी औरत के अंतर्वस्त्र भी उतार दिए और उसे पूर्णतया नंगी कर दिया . sasur bahu ki pipasa

“आइये विक्रम साहब, कृपया मेरी कामुक जोरू के साथ रति-संयोंग कीजिये .” विनोद ने नग्न लेटी कामिनी को पेश किया .

विक्रम साहब की दृष्टि कामिनी की सुडौल काया पर थी, चर्बीदार चिकनी जंघाएँ, कमनीय पायल पहने पाँव, लचीली कमर और बीच में शेव की हुई सफाचट बालहीन चूत . कामिनी भगोष्ठ की फांकें अपनी उँगलियों से खिला कर नम योनी अपने महबूब को भेंट करने लगी . खड़े हुए लौड़े ने शीघ्र ही गीली बुर में प्रवेश कर दिया . चरित्रहीन कामिनी उचक-उचक कर डट के चुदने लगी .

“आह… आह… आप तो शराब के नशे में रहते हैं, मेरी काम-वासना ऐसे बलवान पुरुष ही कर सकते हैं . अपनी बेकार डंडी देखिये, यह विक्रम काका के मूंसल से कहाँ मुक़ाबला कर सकती है . आह… आह… ” चुदाई से कामोत्तेजित कामिनी विनोद को नीचा दिखाते रही .

“विनोद हमें सम्भोग करता देख तुम्हें कैसा लग रहा है ?” चोदते हुए विक्रम साहब प्रश्न करने लगे . सहवास में मग्न कामिनी उनके मजबूत सीने के सफ़ेद बालों को सहला रही थी .

“बहुत आनंद आ रहा है विक्रम साहब, आपका ज़ोरदार लिंग कामिनी की योनी के अन्दर-बाहर होता हुआ कामोत्तेजक लग रहा है . कृपया मेरी जोरू को ताकत लगा कर चोदिये .” विनोद अपने लुल्ले को सहलाता हुआ यौन-क्रिया का मज़ा ले रहा था . कामिनी सिस्कारियां मार रही थी . sasur bahu ki pipasa

विक्रम साहब भका-भक समागम कर रहे थे . पुख्ता मोटे लण्ड से चुदवाते हुए कामिनी के भारी नितम्ब थरथरा कर हिल रहे थे . दोनों प्रेमी गहरी साँसे ले रहे थे . कुछ ही पलों में विक्रम साहब कामिनी के तपते हुए चिकने योनिमार्ग में स्खलित हो गए .

“आइये चीकू के बाबा, मेरा योनिमुख साफ़ कीजिये .” कामिनी ने विनोद वागले को आज्ञा दी . विनोद तुरंत फूली हुई चिकनी चूत के निकट गया . वह फैली हुई रानों के बीच स्थापित हो, बुर से रिसता हुआ ताज़ा-ताज़ा गाढ़ा वीर्ये चाटने व निगलने लगा

मेरे ससुर ने मेरा दलाल बनके अब मेरी चूत एक मंत्री को भेंट कर दी. और मेरा निकम्मा पति तो बस मेरी वीर्य से भीगी बूर साफ़ कर सकता है.. इस bahu hindi sex story का आखिरी भाग..

विक्रम साहब भका-भक समागम कर रहे थे . पुख्ता मोटे लण्ड से चुदवाते हुए कामिनी के भारी नितम्ब थरथरा कर हिल रहे थे . दोनों प्रेमी गहरी साँसे ले रहे थे . कुछ ही पलों में विक्रम साहब कामिनी के तपते हुए चिकने योनिमार्ग में स्खलित हो गए .

“आइये चीकू के बाबा, मेरा योनिमुख साफ़ कीजिये .” कामिनी ने विनोद वागले को आज्ञा दी . विनोद तुरंत फूली हुई चिकनी चूत के निकट गया . वह फैली हुई रानों के बीच स्थापित हो, बुर से रिसता हुआ ताज़ा-ताज़ा गाढ़ा वीर्ये चाटने व निगलने लगा

“क्या हुआ कामिनी, कहाँ भाग रही हो ?” मंत्रीजी के कार्यालय से तेज़ी से निकलती हुई पत्नी को देख विनोद वागले उत्सुक हो गया . sasur bahu ki pipasa

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“म…म…म… म म .” कामिनी मुंह बंद करे हुए मंत्रालय के महिला शौचालय में घुस गई . विनोद शौचघर के बाहर प्रतीक्षा करने लगा . थोड़ी देर में कामिनी निकली और पति को डांटने लगी .

“आप भी कैसे प्रश्न पूछते हैं ! आपको पता है की मंत्रिजो और श्रीमान सिंघानिया के बीच आज ख़ास समझोता हुआ है . इतने बड़े उद्योगपति का आदर-सत्कार करने के लिए ही मुझे बुलवाया था .” कामिनी क्रोधित होकर अपने नाथ को समझाने लगी .

“लेकिन प्रिय तुम प्रसाधन कक्ष इतनी जल्दी क्यों जा रही थीं, और मुझे उत्तर भी नहीं दिया ?” विनोद परेशान था .

“चीकू के बाबा आप भी कितने नासमझ हैं . मेरे मुख में श्रीमान सिंघानिया का वीर्ये था, वही थूकने गई थी . बीज से भरे हुए मुख से मैं कैसे बोल सकती थी ! अब चलिए, हमें मंत्रीजी के साथ उनके फार्महाउस जाना है .” कामिनी ने विवरण दिया .

मंत्रीजी की गाड़ी हाइवे पर चल रही थी . ड्राइवर और विनोद वागले आगे बैठे थे, कामिनी मंत्रीजी के साथ पीछे .

“ड्राइवर ए.सी. चलाओ, गर्मी लग रही है . कामिनी तुमने बहुत अच्छे से सिंघानिया की ख़ातिर की, हमारा सौदा पक्का हो गया . इसमें तुम्हारा बहुत बड़ा हाथ है, नहीं मुँह है !” मंत्रीजी ठहाके मार कर हंसने लगे .

“श्रीमान सिंघानिया पर अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ी . वह तो जल्दी ही स्खलित हो गए . उन्होंने कल मुझे होटल में बुलाया है .” कामिनी ने ड्राइवर की और इशारा करते हुए मंत्रीजी से धीरे से बोला .

“तुम हमारे निकट बैठो कामिनी, ड्राइवर से कोई शर्म नहीं अपना ही आदमी है . विनोद तुम्हारी पत्नी यथार्थ श्रेष्ठ अभिनेत्री है .” मंत्रीजी ने कामिनी के गल पर चुम्बन दी और उसका पल्लू गिरा दिया . फिर ब्लाउज़ के हुक खोल दिए, उनके हाथ कामिनी की ब्रा के अन्दर चूचियों से खेलने लगे . विवाहित रंडी के निपल एकदम सख्त हो गए थे . विनोद घूम-घूम कर पीछे की सीट पर चल रहे तमाशे को देख रहा था . ड्राइवर भी गाड़ी के शीशे में पीछे देखे जा रहा था .

“कामिनी अंगिया भी उतार दो, मंत्रीजी सुगमता से आनंद ले पाएँगे . सफ़र बहुत लम्बा है .” विनोद जोरू को सुझाव देते हुए अपने गुप्तांग मल रहा था . sasur bahu ki pipasa

कामिनी ने अपनी ब्रा उतार दी और अधनंगी हो गई . गुलाबी रंग की खड़ी हुई चूचियाँ ऐसी लग रही थीं जैसे नर्म गुदगुदे खरबूजों पर मीठी किशमिश . सांवले परिवेश के घेरे में दोनों निपल उभर कर उजागर थे . मंत्रीजी चूचुकों को अपनी दो उँगलियों के बीच में लेकर धीरे-धीरे मसल रहे थे, और प्यार से उनको खींच रहे थे .

कामिनी चिकोटी काटने पर सिसकारियाँ भर रही थी, उसकी आँखें एकदम नशीली हो चुकी थीं . कामिनी ने मंत्रीजी का सिर को पकड़ कर अपने स्तनों पर झुका दिया . मंत्रीजी ने अपने होंठ चुचियों से भर लिये वह धीरे-धीरे उसकी चुचियों को चूसने लगे . उत्तेजित हो उन्होंने अपने दांत भी चुचियों पर गड़ा दिये जिससे कामिनी के मुँह से हलकी सी चीख निकल गई . चलती गाडी में कामिनी मंत्रीजी के बालों को पकड़ कर अपने वक्षस्थल पर और दबा रही थी .

“साहब क्या गाड़ी किनारे लगा दूँ ?” ड्राइवर इस कामुक खेल को शीशे में देख कर बोला .

“बिलकुल नहीं, अगर हम रुके तो पहुँचते हुए अँधेरा हो जाएगा . तुम अपने को अलग महसूस मत करो . गाड़ी चलाते रहो, विनोद तुम्हारा अंग-मर्दन करेगा . क्यों विनोद, विक्रम ने बताया की तुमने उत्साहपूर्वक चुसाव किया था .” मंत्रीजी अर्धनग्न औरत के मम्मे टटोलते हुए शरारत करने लगे .

“अवश्य मंत्रीजी, मेरे पति किसी और काम के तो हैं नहीं . चीकू के बाबा चलिए ड्राइवर जी के तनाव का समाधान कीजिये . और हाँ, सावधानी से कहीं इनका सड़क से ध्यान भंग न हो .” अपने नाथ की तौहीन करते हुए कामिनी ने निर्देश दिया .

“ठीक है प्रिय, तुम जैसा कहो . तुम भी पूरी तरह निर्वस्त्र हो जाओ और मंत्रीजी को अपनी आकर्षक देह पेश करो .” विनोद गाड़ी चालक की पतलून पर हाथ फेरने लगा . ड्राइवर विनोद को देख मुस्कुराया और पीछे के शीशे में हो रही काम-क्रिया देखते रहा . विनोद ने चालक की पैंट की चेन धीरे से खोली और अंडरवियर में क़ैद उसके लण्ड को सहलाने लगा . विनोद अपनी पैंट खोल अपनी लुल्ली को निकाल कर हिलाने लगा .

पीछे की सीट पर कामिनी ने अपनी साड़ी पूरी उतार दी . ब्लाउज़ व ब्रा तो पहले से कार में अलग पड़े हुए थे . पेटीकोट पहनी कामिनी ने फिर मंत्रीजी के होठों को अपने होठों में भर लिया और अपनी जीभ को उनके मुंह में डाल कर घुमाने लगी . दोनो एक दुसरे को प्रेम से चुमने लगे .

“तेरी जोरू तो बड़ी मस्त है विनोद, तुझसे मर्दों की सेवा करवाती है और तुझे इसमें मज़ा भी आता है . तेरा क्या खड़ा नहीं होता ?” ड्राइवर की नज़र विनोद के लुल्ले पर पड़ी तो उसने सवाल किया . विनोद ने ड्राइवर के जांघिये में से उसका फुंकार मारता लण्ड निकाल कर रोशन कर दिया . फनफनाते स्तम्भ को विनोद अपने दोनों हाथों से दूहने लगा . गाड़ी चलाते हुए चालक ने अपनी टांगें फैला दी . विनोद ने ड्राइवर के अंडकोष हल्के-हल्के मसले और वज़नदार लौड़े की मुट्ठी मारने लगा .

“ड्राइवर जी आपके दैत्य के सामने मेरा लुल्ला तो निम्न है . देखो कामिनी कितना मोटा है !” भौंचक्के विनोद ने चिल्ला कर अपनी पत्नी को बताया . ड्राइवर का काला खम्बा अत्यंत मोटा था, विनोद अनावृत कठोर लिंग का हस्तमैथुन करने लगा . कामिनी ने आगे झुक कर सामने की सीट का दृश्य स्वयं देखा .

“आप इसका सम्मानपूर्वक रसज्ञान कीजिये . आप अपनी स्त्री को तो संतुष्ट कर नहीं सकते, कम से कम इस कड़े शिश्न को तो कामोन्माद दीजिये . चलिए, ड्राइवर जी की गोद में अपना सर झुकाइये .” कामिनी ने विनोद वागले को धकेला . आज्ञाकारी विनोद ड्राइवर के चमकीले नम सुपाड़े को अपनी ज़बान निकाल कर चाटने लगा . कामिनी ने वापस पिछली सीट पर टेक लगा कर मंत्रीजी को आँख मारी . बेचारे विनोद को शिश्न-चूषण करता देख मंत्रीजी हंसने लगे .

विनोद ने गप से लण्ड के सुपाड़े को अपने होठों के बीच दबोच लिया . होठों को आगे पीछे करते हुए लौड़े को चूसने लगा . वाहन चलाता ड्राइवर विनोद के सर को पकड़ कर हौले-हौले सहलाने लगा .

कामिनी ने अपने पेटीकोट को अब पुरा उपर उठा दिया, गांड उठा कर उसके नीचे से भी पेटीकोट के कपड़े को हटा दिया . अब कामिनी पूरी नंगी दिख रही थी . उसकी चौडी चकली झांटहीन चूत मंत्रीजी निहार रहे थे . अपनी गोरी रानों को फैला कर कामिनी ने फूली हुई बुर की दोनो फांको को उँगलियों से पृथक किया . मंत्रीजी की आँखें भुखे कुत्ते के जैसी चमक गईं थीं . वो आंखे फाड़-फाड़ कर कामिनी की खूबसूरत डबल-रोटी जैसी फुली हुई चुत को देख रहे थे . मुंडे हुए भगोष्ठ के बीच गुलाबी योनिमार्ग में से निकलता रस कार की सीट पर निशान छोड़ रहा था

“आइये मंत्रीजी प्रीतिभोज आरंभ कीजिये . देखिये आपकी आशा में आपकी दासी की योनी कैसे रिसाव कर रही है .” कामिनी कामोत्तेजक ढंग से अपनी जंघाएँ चौड़ी कर यजमान को निमंत्रण देने लगी . गाड़ी चला रहा ड्राइवर अपना लण्ड विनोद से चुस्वाते हुए शीशे में पीछे का मनमोहक नज़ारा देख रहा था .

मंत्रीजी चुपचाप झुक कर कामिनी की दोनो रानों पर अपने हाथों को जमा कर अपनी जीभ निकाल कर चूत के गुलाबी होठों को चाटने लगे . मंत्रीजी ने बुर के भगनशे को अपने होठों के बीच ले लिया और चुसने लगे . कामिनी की चूत टीट-चुसाई पर मस्त हो कर और पानी छोड़ने लगी . मंत्रीजी आवारा कुत्ते की तरंह लफड़-लफड़ करते हुए अपनी खुरदरी जीभ से कामिनी की बुर चाटे जा रहे थे .

चुत की गुलाबी पंखुडीयों पर खुरदरी जीभ का हर प्रहार कामिनी को अच्छा लग रहा था . मंत्रीजी के सर को अपनी चूत पर और कस के दबा कर कामिनी आहें भरने लगी . ड्राइवर ने गाड़ी सड़क के किनारे रोक दी और पीछे चल रही कामुक यौन-क्रिया मुड़ कर देखने लगा, साथ ही वह विनोद का सर अपने मज़बूत लौड़े पर ऊपर नीचे करने लगा . मरदाना लिंग चूसता विनोद अपने लुल्ले को भी कामोत्तेजित हो फुर्ती से हिला रहा था .

“कामिनी जी, आपके पतिदेव अपने पिछवाड़े में मेहमान लेते हैं क्या ?” कामांध ड्राइवर ने बुर चटवाती विवाहिता से प्रश्न किया . मंत्रीजी कामिनी के गुप्तांग में खोये हुए थे, उनको कुछ सुनाई और दिखाई नहीं दे रहा था .

“ड्राइवर जी इसमें पूछना क्या, ये तो बिलकुल निकम्मे हैं . आप इनका जैसे चाहें उपयोग कीजिये . यह समलैंगिक मुख-मैथुन पसंद करने लगे हैं तो गुदा-भेदन भी अवश्य सराहेंगे . सुनिए अब मुँह में से निकालिए और उलटे होकर ड्राइवर जी को चढ़ने दीजिये .” कामिनी ने पति को आज्ञा दी . विनोद चुपचाप सीट पर घुटनों के बल घोड़ी बन गया . गाडी की आगे की सीट पर उल्टा स्थापित विनोद अब पीछे बैठी जोरू को ठीक से देख पा रहा था . चूत चटवाती चरित्रहीन पत्नी विनोद के चेहरे के सामने थी . विनोद ने अपनी पतलून घुटनों तक गिरा दी . अंदर विनोद ने अपनी जोरू की रेशमी लाल पैंटी पहनी हुई थी .

“देखिये कामिनी जी विनोद ने औरतों वाली लाल कच्छी पहनी हुई है !” विस्मित चालक ने रेशमी पैंटी को भी खींच कर विनोद के घुटनों तक उतार दिया .

“हाँ ड्राइवर जी, यह मेरा काजल और लिपस्टिक भी लगाते हैं . आप इन्हें अच्छे से भ्रष्ट कर के सबक सिखाइए .” कामिनी ने विनोद के गाल पर थप्पड़ मारा और उसे ज़लील किया .

विनोद के नग्न नितम्ब भड़के हुए चालक की सेवा में हाजिर थे . विनोद ने पत्नी से चेहरे की क्रीम मांगी .

“ड्राइवर जी थोड़ी क्रीम अपने हथियार पर लेप लीजिये . कृपया धीरे से प्रहार कीजिये . मैं आपको पूरा सहयोग दूंगा, कई दिनों से मेरी भी गुदा-सम्भोग कराने की चाह है .” अपना मलाशय उचका कर विनोद वागले अपनी गांड में मोटा लौड़ा लेने की तमन्ना करने लगा .

पीछे मंत्रीजी को बुर चाटने में मज़ा आ रहा था . उन्होंने चूत की दोनो फांको को अपनी उँगलियों से फैला कर पुरा चीडोर दिया और जीभ को नुकीला कर के गुलाबी छेद में डाल कर घुमाने लगे . योनी एकदम पसीज कर पानी छोड रही थी . नुकीली जीभ को चुत के गुलाबी छेद में डाल कर घुमाते हुए चुत की दिवारों से रिस रहे पानी को मंत्रीजी लपड़-लपड़ चाटने और पीने लगे .

विनोद उचक कर सीट के सहारे अपने चुतडों को उभार कर घोड़ी बना हुआ था . ड्राइवर पिछे आया और जल्दी से उसने विनोद की कमीज़ उठा कर कमर के ऊपर कर दी . रेशमी लाल कच्छी पहले ही नीचे खिसकी हुई थी . विनोद की मख्खन मलाई सी, चमचमाती गोरी गांड ड्राइवर की आंखो के सामने आ गई . लुभावने चूतड़ों से झांकता छेद ड्राइवर की काम वासना बढ़ा रहा था . दोनो चूतड़ के बीच में गांड का भुरे रंग का छेद फकफका रहा था, एकदम छोटा-सा गोल छेद . चालक ने हल्के-से अपने हाथ को उस छेद पर रख दिया और हल्के-हल्के उसे सहलाने लगा . विनोद कराहने लगा .

“क्या कर रहे हो ड्राइवर जी ? जल्दी से करिए न .” विनोद अपने चूतड़ों को हिलाते हुए बोला .

चूतड़ हिलाने पर थल-थला गये . एकदम गुदाज और मांसल गांड और उसके बीच की खाई देख कामांध ड्राइवर का लण्ड फुंकार उठा . कामोत्तेजित ड्राइवर तेजी से नीचे झुका, और पच-पच करते हुए विनोद के चूतड़ों को चुमने लगा . दोनो मांसल चूतड़ों को अपनी मुठ्ठी में ले कर मसलते हुए, चुमते हुए, चाटने लगा .

विनोद का बदन भी सिहर उठा . बिना कुछ बोले उसमे अपनी टांगे और फैला दी . फिर ड्राइवर ने दोनो चूतड़ों को फैला दिया और उसके बीच की खाई में भुरे रंग की विनोद का गोल सीकुड़ा हुआ गांड का छेद नज़र आने लगा . छेद पर जैसे ही ड्राइवर ने हल्के से अपनी जीभ चलायी विनोद के पैर काँप उठे . उसने कभी सोचा भी नही था की यह जंगली आदमी ऐसे समलिंगी प्यार करेगा .

ड्राइवर ने देखा की विनोद के चूतड़ों के बीच जीभ फिराने से गांड का छेद अपने आप हल्के-हल्के फैलने और सिकुड़ने लगा . विनोद के पैर हल्के-हल्के थर-थरा रहे थे .

“कामिनी जी, आपके पति की नर-योनी बड़ी सुहानी है . मुझे अपने नाग के लिए गरम-गरम बिल चाहिए अब चाहें वो नर का हो या नारी का हो !” चालक ने इस बार जीभ को पुरी खाई में उपर से नीचे तक चलाया . जिह्वा को नितम्ब के सिकुड़े हुए छेद के पास ला कर रोक दिया और कुरेदने लगा . नग्न कामिनी ने पेटीकोट को मंत्रीजी की खोपड़ी के ऊपर दाल दिया था . मंत्रीजी सुन्दर छिनाल के पेटीकोट के अन्दर जननांग को अपनी राल से रंगलेप कर रहे थे .

विनोद के पुरे बदन में सनसनी दौड़ गई . उसने कभी सपने में भी नही सोचा था की हाइवे के किनारे गाड़ी में बैठे-बीठाये उसकी गांड चाटने वाला प्रेमी मिल जायेगा . मारे उत्तेजना के उसके मुँह से आवाज़ नहीं निकल रही थी . गु-गु स्वर निकालते हुए अपने हाथ को पिछे ले जा कर विनोद अपने चूतड़ों को खींच कर फैलाने लगा .

ड्राइवर समझ गया था की विनोद को आनंद आ रहा है . उसने गांड के छेद के ठीक पास में दोनो तरफ अपने दोनो अंगूठे लगाये और छेद को चौड़ा कर ज़बान मलाशय के अन्दर पेल दी . चालक गुदा-द्वार में जिह्वा चलाते हुए विनोद के नितम्बों पर हल्के-हल्के दांत भी गड़ा रहा था . गांड की गुदगुदी ने विनोद को एकदम बेहाल कर दिया था उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी .

विनोद की नर-योनी में आग लगी हुइ थी, उसने एक हाथ पीछे करके चालक के लौड़े को पकडा और अपने लुभावने गुलाबी छेद पर रगड़ने लगा . ड्राइवर के थूक से गीली नर-योनी ने सटाक से के पहाड़ी-आलू जैसे सुपाड़े को निगल लिया .

“आह… ड्राइवर जी , हाँ ऐसे ही, आह… ” विनोद सातवें आसमान में था .

चालक ने खचाक से एक जोरदार धक्का मारा . विनोद की उठी हुई गीली नर-योनी ने झट से पुरे डंडे को निगल लिया . पुरा लण्ड अपने मलाशय में लेकर विनोद ने मीठे दर्द के कारण अपनी आँखें बंद कर लीं . ड्राइवर ने विनोद की कमर पकड़ कर उसके चूतड़ उठाए और उसकी नाज़ुक संकोचक-पेशी को भंग करते हुए दो-तीन और धक्के लगा दिये . विनोद कराहने लगा तो कामिनी ने उसे एक और ज़ोरदार तमाचा मारा .

“चिल्लाइये मत, चुपचाप स्वीकार कीजिये . आपकी इतने समय से समलिंगकामुक इच्छाएं थीं अब ड्राइवर जी गुदा-सहवास कर रहे हैं तो आप कृतज्ञ हो कर अपना आभार प्रकट कीजिये .” कामिनी पति को फटकारने लगी .

“क्षमा चाहता हूँ ड्राइवर जी, कृपया निर्दयी हो कर अपने भाले से हमला कीजिये . मैं आपका गुलाम हूँ, मुझे नववधू के समान लूटिये . मेरा थरथराता छेद आपकी संपत्ति है, इसे कृपया अपना पानी देकर सींचिये .” गांड मरवाता विनोद कामुक वार्तालाप करने लगा .

ड्राइवर की समझ में नहीं आ रहा था की गांड मारने में इतना हर्ष मिलता है . उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके लौड़ा गरम भठ्ठी में मंत्रमुग्ध है . विनोद वागले पूरा सहयोग देता हुआ पीछे उचक-उचक कर गांड मरवा रहा था . नर-योनी के रस से चमचमाता हुआ लिंग चालक ने बाहर निकाला फिर तेज़ी से विनोद की लाल सुरंग में वापस पेल दिया . ड्राइवर खचाक-खचाक धक्के लगाने लगा . पखाना-निर्गम नली में शिश्न ऐसे उपयुक्त था जैसे ओखली में मूसल .

विनोद की नर-योनी चुद चुद कर खिल गई थी . मोटे लण्ड को खा कर अनचुदी नर-योनी बौरा कर पुष्पित हो गई थी . कठोर लौड़ा मलाशय की दीवारों से एकदम चिपक कर रगड़ता हुआ पूरा अन्दर तक घुस जाता था और फिर उसी तरह से गुदा की दीवारों का घर्षण करते हुए सुपाड़े तक सटाक से निकल कर फिर से घुसने के लिये तैयार हो जाता था . विनोद की मेहमान-नवाज़ प्रताड़ित नर-योनी में चालक का काला नाग अब सटा-सट अन्दर बाहर हो रहा था .

गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी कामिनी बगल में विराजमान मंत्रीजी के खड़े हुए लौड़े को हिला रही थी . मंत्रीजी कुलटा औरत की गीली बुर में उंगल कर रहे थे . कामिनी के पति को चुदते देख मंत्रीजी उत्तेजित हो रहे थे . कामिनी भी समलैंगिक ठुकाई देख अति प्रसन्न थी . गुदा बजवाते विनोद ने अपनी हथेली पर ढेर सारा थूक निकाला और हाथ तान कर मंत्रीजी के लाल सुपाड़े पर धीरे-धीरे अपनी राल का लेप करने लगा . लौड़े के तने को तो कामिनी हस्तमैथुन कर रही थी और अब सुपाड़े पर विनोद अपनी लार का मक्खन सजा रहा था . मंत्रीजी और विनोद एक दुसरे से नज़र मिलाकर मुस्कुराने लगे .

फिर विनोद ने गरदन मोड़ कर अपने आशिक़ को देखने की कोशिश की परन्तु धक्कों की रफ़्तार इतनी तेज़ और झटकेदार थी की उसका सर फिर गिर गया . विनोद के मूंह से ऊँचे स्वर में सिस्कारियां निकल रहीं थीं और वह अपने कूल्हे उठा-उठा कर सशक्त स्तम्भ निगल रहा था . लण्ड सीधा उसकी जलती हुई नर-योनी पर ठोकर मार रहा था और विनोद बार-बार सुखद चीखें निकाल रहा था . विनोद की समलैंगिक अभिलाषा सम्पूर्ण हो रही थी . आज उसको बहुत दिनों के बाद ऐसा अनोखा मज़ा आ रहा था . ड्राइवर और विनोद वागले, दोनों कुत्ते -कुत्तिया की तरंह हांफ रहे थे और हिलती हुई गाड़ी में गच-गच, फच-फच की आवाजें गूँज रही थीं .

“तुम अब पीछे आ जाओ . तुम्हारी यौन-क्रिया देख हमें विनोद के पिछवाड़े में इंजेक्शन लगाने की चाह हो रही है .” मंत्रीजी ने गांड मारते हुए चालक को आदेश दिया . ड्राइवर गाड़ी से बाहर निकल कर पीछे की सीट पर आ गया और मंत्रीजी अधनंगे ही आगे की सीट पर चले गए .

कुत्ता बना हुआ विनोद मस्त हो कर गांड हवा में लहरा रहा था . मंत्रीजी ने मोर्चा संभाला और विनोद की खुली हुई पखाना-निर्गम सुरंग में अपना लिंग पेल दिया . अकस्मात प्रहार से विनोद चिल्लाया और अपनी तंग गुदा-संवरणी को शिश्न पर व्यवस्थित करने लगा . थोड़ी ही देर में नर-योनी की लचीली अवरोधिनी ने शिथिल हो कर अपना मुंह खोल दिया और मंत्रीजी का उत्तेजित लण्ड सुगमता से हज़म करने लगी .

“आह… ऐसे ही धक्के मारिये मंत्रीजी, आह… आह… बहुत आनंद आ रहा है आपका लिंग निगल कर . मैं आपकी दुल्हन हूँ मुझे अपवित्र कीजिये . आह… आह… ” विनोद चुदासा हो कर मंत्रीजी को प्रेरित कर रहा था .

“लो विनोद, पूरा लो, वाकई तुम्हारी प्रचण्ड सुरंग कसी हुई है . तुम्हारी खुजली मिटाते हुए हमारे साथी की जकड़ कर मालिश हो रही है .” मंत्रीजी गांड मारने का लुत्फ़ उठा रहे थे .

पीछे की सीट पर कामिनी पेटीकोट चढ़ा कर नंगी लेट गई और अपनी दोनो टांगो को घुटनो के पास से मोड कर फैला दीया . ड्राइवर अपना खम्बा हाथ में लेकर जल्दी से कामिनी की दोनो जांघो के बीच में आया और योनी पर लगा कर हल्का सा झटका दिया . लण्ड का सुपाड़ा रंडी की भोसड़ी में घुस गया . काला सुपाड़ा घुसते ही कामिनी ने अपनी गांड उचका दी, मोटा पहाड़ी आलू जैसा सुपाड़ा पुरा घुस गया .

विवाहिता औरत की फुद्दी एकदम गरम भठ्ठी की तरह थी . चूत की गरमी को पाकर ड्राइवर का लौड़ा फनफना गया . पानी छोड रही बुर में लिंग कच से फिसलता चला गया . कुंवारी लौंडिया होती तो शायद रुकता, मगर यह तो बाज़ारू राण्ड की सैंकड़ों बार चुदी हुई चूत थी . काला नाग योनी में कामिनी को महसूस हो रहा था जैसे मोटा लोहे का डन्डा गरम करके डाल दिया हो . लण्ड गीली योनी के आखिरी कोने तक पहुँच कर ठोकर मार रहा था .

“हाये… ड्राइवर जी आपका केला बहुत मज़ेदार है . देखिये मेरी योनी कितना पानी छोड़ रही है . हाये.. हाये… ” कामिनी बुर चुदवाने में मस्त थी, उसकी गोश्तदार जंघाएँ और सुन्दर चूतड़ मैथुन को सुहावना बना रहे थे . चुदाई से पूरी गाड़ी हिल रही थी .

ड्राइवर का लण्ड बुर को कुचल रहा था . अन्दर घुसते समय चूत के दुप-दुपाते छेद को पुरा चौड़ा कर देता था और फिर जब बाहर निकलता था तो भगोष्ठ की पत्तियां अपने आप सिकुड़ कर छेद को फिर से छोटा बना देती . बडे होठों वाली वेश्या की गुदाज चूत गद्देदार और तंग थी . योनी के होठों में लौड़ा धंसाते हुए ड्राइवर तेज़ी से आक्रमण कर रहा था . कामिनी आहें भर रही थी, उसका पति विनोद भी सिस्कारियां ले रहा था .

आगे की सीट पर गुदा-सम्भोग करते हुए मंत्रीजी विनोद के लुल्ले को अपना हाथ बढ़ा कर नीचे से सहला रहे थे . गांड मरवाते हुए विनोद का लुल्ला मंत्रीजी की मुट्ठी में तन गया था . मलाशय के भीतर चोट मारते हुए मंत्रीजी का अंडकोष विनोद के लटके हुए टट्टे पर तमाचा मार रहा था, विनोद की लुल्ली धक्कों से हर तरफ हिल रही थी .

मंत्रीजी अपना सख्त शिश्न चटाके की आवाज़ के साथ बाहर खींचते तो विनोद का गरम लाल मलाशय नज़र आता और तुरंत उसकी भूरी संकोचक-पेशी वापस सिकुड़ जाती . फिर वो लचकदार संवरणी पर थूकते और राल से गीला कर पुनः अपना प्रबल लौड़ा नर-योनी के अन्दर भोंक देते .

विनोद हर धावे पर हर्ष से चीखता . जब कुत्ते बने विनोद की गुदा में लण्ड पूरा अन्दर बैठा होता तो मंत्रीजी उसका लटकता लुल्ला कस कर दबाते और विनोद के बदन में सिहरन दौड़ जाती . कुछ ही पलों में पिछवाड़े में लण्ड निगलता विनोद कंपकंपा कर मंत्रीजी की हथेली में स्खलित हो गया . मंत्रीजी ने विनोद की लुल्ली निचोड़ कर खाली कर दी और अपनी हथेली पर चिपके गांडू के पानी को सूंघने लगे . थोड़ा वीर्ये उन्होंने चाट भी लिया .

फिट मंत्रीजी झटके मारने लगे और उनके ठोस लिंग ने विनोद की चुस्त नर-योनी में उलटी कर दी . जब मंत्रीजी ने अपना लौड़ा सूजी हुई लाल गुदा से बाहर निकाला तो उनका चिपचिपा वीर्ये विनोद के टट्टे और जाँघों पर बहने लगा .

कामिनी नीचे से गांड उछालती, चालक के चूतड़ को दोनो हाथों से पकड़ कर अपनी चूत के उपर दबाती और गपा-गप लौड़ा खाती . विनोद की चुदाई की ध्वनी के साथ गाड़ी में कामिनी की चूत के पानी में फच-फच करते हुए लौड़े के अन्दर-बाहर होने की आवाज़ भी गूँज रही थी . नीचे से धक्का मारती और उपर से ड्राइवर का धका-धक काला लण्ड खाती विवाहिता स्त्री अब चरम-सीमा पर पहुँच चुकी थी .

गांड उछालती हुइ अपनी टांगो को चालक की कमर पर कस कर कामिनी चिल्लाने लगी . उसने ड्राइवर को अपनी बाहों में कस लिया और उसकी चूत ने पानी फेंकना शुरु कर दीया . ड्राइवर के लौड़े से भी तेज़ फव्वारे के साथ पानी निकलना शुरु हो गया . चालक के होंठ कामिनी के होठों से चिपके हुए थे, दोनो के बदन अकड़ गए थे . दोनों ने कामोन्माद प्राप्त किया और गाड़ी की सीट पर वीर्ये के निशान छोड़ दिए .

————-समाप्त————–

मैं और निकम्मा पति एक साथ चुद रहे थे और एक साथ ही लोगों को संतुष्ट कर रहे थे.. अब तो मैं अपने गांडू पति के सामने ही चुदवा लेती हूँ.. ये bahu hindi sex story यहीं ख़त्म करती हूँ..

इसके बाद तो बस मैं हर तरह से सेक्स का मजा लेने लगी। तो दोस्तों, ये Hindi sex stories यहीं ख़त्म होती है..

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