हिंदी कहानी संग्रह

वे कहानियाँ जो नज़दीकियों, सही समय और अनकही भावनाओं की धड़कन को पकड़ती हैं।

धीरे-धीरे बढ़ते लगाव, बारिश में लौटती मुलाक़ातों, चुप रहकर भी बहुत कुछ कह देने वाले रिश्तों और दिल में देर तक ठहर जाने वाले पलों का यह एक सधा हुआ संग्रह है।

20 लंबी कहानियाँ प्यार और भावना हर हफ्ते नया पाठ
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बेंगलुरु एयरपोर्ट के बाहर शाम की रोशनी में ट्रॉली के पास खड़े दो लोगों का उदास दृश्य
एयरपोर्ट पिकअप के बाद जो रिश्ता नाम मांगने लगा
वह उसे लेने एयरपोर्ट आया था, जैसे कुछ टूटा ही न हो। लेकिन ट्रॉली के पास खड़ी वह लड़की अब वही नहीं थी जो हर अनकही बात को प्यार समझ लेती थी। रास्ते भर बेंगलुरु की रोशनी, पुराने स्क्रीनशॉट, UPI split की एक छोटी-सी शर्म और एक बड़े सवाल ने उनका पीछा किया—क्या हर नज़दीकी को नाम चाहिए, या बिना नाम के वही धीरे-धीरे खत्म हो जाती है?

नई कहानियाँ

ताज़ा भावनात्मक और रिश्तों की कहानियाँ, जिनमें शहर, लोग, झिझक, चाहत और याद रह जाने वाले पल बराबरी से मौजूद हैं।

भोपाल के गरबा प्रैक्टिस हॉल में रोशनी के बीच डांडिया पकड़े खड़े दो युवा

गरबा प्रैक्टिस, soft launch और बीच में अटकी हुई हाँ

गरबा के हर round के बीच उनके पास दो-दो मिनट की बातचीत होती थी, लेकिन वही दो मिनट पूरे दिन पर भारी पड़ते थे। एक आधी दिखाई गई इंस्टाग्राम स्टोरी, दोस्तों के अंदाज़े और पुराने टूटे भरोसे के बीच काव्या को समझ नहीं आ रहा था कि अंशुमान उसे अपने जीवन में जगह दे रहा है या बस किसी खूबसूरत frame में रख रहा है।

नागपुर के कॉलेज फेस्ट में स्टेज लाइट्स और फोटो बूथ के पास खड़े दो छात्र

नागपुर का कॉलेज फेस्ट, archived chat और आधी रह गई बात

फेस्ट की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था, बस उनकी बातचीत का मतलब धुंधला पड़ गया था। एक archived chat, कुछ देर से आए replies और backstage की भागदौड़ ने मिताली को उस रात यह तय करने पर मजबूर कर दिया कि वह चुप रहकर धीरे-धीरे दूर होगी या एक बार साफ-साफ पूछेगी कि उनके बीच बचा क्या है।

भुवनेश्वर के एक शांत बुकस्टोर में खिड़की के पास किताबों और नोटबुक के साथ बैठी दो युवा आकृतियाँ

भुवनेश्वर के बुकस्टोर के कोने में एक गलत मीम ने सच बुलवा लिया

रिद्धिमा ने जो मीम अपनी दोस्त को भेजना चाहा था, वह सीधे फैमिली ग्रुप में पहुँच गया। उस एक स्क्रीनशॉट ने भुवनेश्वर के एक बुकस्टोर के कोने में बैठकर चल रही महीनों पुरानी चुप्पी को तोड़ दिया, और दो लोगों को यह तय करना पड़ा कि वे दूसरों के इशारों से चलेंगे या अपने दिल की धीमी लेकिन साफ़ आवाज़ सुनेंगे।

“कहानियाँ उन्हीं रोज़मर्रा की जगहों के आसपास ठहरती हैं जहाँ दिल अक्सर सबसे ज़्यादा सच बोलता है — ऑफिस, सफ़र, बारिश, शादी की हलचल, कॉफी ब्रेक और वे लंबी चुप्पियाँ जिनमें रिश्ते अपना रूप बदलते हैं।”

दिल की कहानी