एयरपोर्ट पिकअप के बाद जो रिश्ता नाम मांगने लगा
वह उसे लेने एयरपोर्ट आया था, जैसे कुछ टूटा ही न हो। लेकिन ट्रॉली के पास खड़ी वह लड़की अब वही नहीं थी जो हर अनकही बात को प्यार समझ लेती थी। रास्ते भर बेंगलुरु की रोशनी, पुराने स्क्रीनशॉट, UPI split की एक छोटी-सी शर्म और एक बड़े सवाल ने उनका पीछा किया—क्या हर नज़दीकी को नाम चाहिए, या बिना नाम के वही धीरे-धीरे खत्म हो जाती है?
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