मेहंदी की रात, अधूरा परिचय और पटना की आख़िरी रिहर्सल
शादी की भागदौड़ के बीच वह हर बार उसके पास लौट आती थी, और वह हर बार हँसी में बात टाल देता था। पटना की उस मेहंदी-भरी रात में उन्हें तय करना था कि यह रिश्ता सिर्फ सहूलियत है या वह बात, जिसका नाम लेने से दोनों डरते रहे।
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