एयरपोर्ट पिकअप, आर्काइव चैट और भोपाल की वह आखिरी ड्राइव
वह उसे लेने एयरपोर्ट आया था, जैसे सिर्फ एक सवारी करनी हो। लेकिन ट्रॉली के पहियों, पार्किंग की रोशनी और रास्ते भर चुप पड़े फोन के बीच दोनों को समझ में आने लगा कि archived chat में डाली गई बातों की तरह रिश्ते भी गायब नहीं होते; वे बस नोटिफ़िकेशन बंद करके भीतर शोर करते रहते हैं।
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