इंदौर मेट्रो के प्लेटफ़ॉर्म पर अटका वह सवाल: हम आखिर हैं क्या
भीड़ के बीच मिली नज़र, unread message की चुभन, group chat की चुहल और आख़िरी ट्रेन से पहले की ठहरी हुई हवा—इंदौर के उस प्लेटफ़ॉर्म पर उन्हें पहली बार साफ़-साफ़ बोलना पड़ा कि बिना नाम के रिश्ता सबसे ज़्यादा किसे थकाता है।
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